अनंत के उस पार.

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अनंत के उस पार पति की रहस्यमयी मृत्यु के बाद मीरा नीलगढ़ लौटती है, लेकिन वहाँ उसे बदलती तस्वीरें, रहस्यमयी डायरी और ऐसे संकेत मिलते हैं जो उसकी पूरी पहचान पर सवाल खड़े कर देते हैं। हर 47 वर्ष में होने वाली नील रात परतों के बीच की दुनिया को जोड़ती है और मीरा को पता चलता है कि आर्यन शायद मरा नहीं है। उसे उसे पाने के लिए एक ऐसी दुनिया में जाना होगा जहाँ समय, यादें और पहचान सब बदल जाते हैं। लेकिन उस पार जाने की कीमत है अपना अतीत और अपनी यादें खो देना। इस कहानी को सुनने के लिए Pocket FM पर जाएँ

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अनंत के उस पार - 1

वह आखिरी सुबहनीलगढ़ की सुबह कभी रोशनी के साथ नहीं आती थी। यहाँ सवेरा किसी पुराने कैनवास पर बिखरे और सफ़ेद रंगों के धुंधले घोल जैसा होता था, जो धीरे-धीरे पहाड़ियों की ढलानों पर फैलता था। समुद्र तल से बाईस सौ मीटर की ऊँचाई पर बसा यह छोटा सा कस्बा जब ओस और धुंध की चादर से बाहर निकलने की कोशिश करता, तब तक दोपहर के बारह बज चुके होते थे। देवदार और बलूत के ऊँचे, काले पेड़ इस धुंध में किसी खामोश पहरेदार की तरह खड़े रहते थे, मानो वे सदियों पुराना कोई ऐसा रहस्य छुपा रहे हों also you can listen on pocket fm ...Read More

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अनंत के उस पार - 2

अध्याय 2 तीसरा दिनदाह-संस्कार के बाद का सन्नाटा मौत के सन्नाटे से भी ज़्यादा ज़हरीला होता है। मौत में फिर भी एक झटका होता है, एक चीख होती है, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद जब श्मशान की राख ठंडी पड़ने लगती है, तब जो खालीपन घर की दीवारों में उतरता है, वह इंसान को अंदर से खोखला कर देता है।आज आर्यन की मृत्यु का तीसरा दिन था।नीलगढ़ के श्मशान घाट पर जब आर्यन की चिता जल रही थी, तब भी धुंध इतनी घनी थी कि दस कदम दूर खड़े लोग भी साये जैसे लग रहे थे। चिता की लपटें ...Read More