रहस्यमयी जंगल का दरवाज़ा

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शाम के लगभग सात बज रहे थे। सूरज पहाड़ियों के पीछे छिप चुका था और गाँव के चारों ओर अँधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। हवा में हल्की ठंडक थी और दूर जंगल से झींगुरों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं। गाँव के आखिरी छोर पर रहने वाला आर्यन अपनी साइकिल लेकर घर लौट रहा था। रास्ता सुनसान था। चारों तरफ पेड़ों की लंबी परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं। अचानक उसे जंगल की तरफ से किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

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रहस्यमयी जंगल का दरवाज़ा - भाग 1

रहस्यमयी जंगल का दरवाज़ा — भाग 1लेखक: संदीप बिन्दशाम के लगभग सात बज रहे थे। सूरज पहाड़ियों के पीछे चुका था और गाँव के चारों ओर अँधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। हवा में हल्की ठंडक थी और दूर जंगल से झींगुरों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं।गाँव के आखिरी छोर पर रहने वाला आर्यन अपनी साइकिल लेकर घर लौट रहा था। रास्ता सुनसान था। चारों तरफ पेड़ों की लंबी परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं।अचानक उसे जंगल की तरफ से किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।“बचाओ... कोई है?”आर्यन ने तुरंत साइकिल रोक दी।उसने ध्यान से सुना।कुछ क्षण तक ...Read More