दो धड़कनें, एक वादा

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एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदलने वाला था। Preview-आखिरी खत रात के 2 बजकर 17 मिनट हो चुके थे। पूरा घर अंधेरे में डूबा था। लेकिन कमरे के कोने में रखी एक छोटी-सी मेज पर अब भी एक दीपक जल रहा था। उस दीपक के सामने प्रियांक बैठा था। उसकी आँखें लाल थीं। हाथ में एक पुराना खत था... और सामने दीवार पर लगी एक तस्वीर। तस्वीर में एक मुस्कुराता हुआ चेहरा था।

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दो धड़कनें, एक वादा - 1

एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदलने वाला था।Preview-आखिरी के 2 बजकर 17 मिनट हो चुके थे।पूरा घर अंधेरे में डूबा था।लेकिन कमरे के कोने में रखी एक छोटी-सी मेज पर अब भी एक दीपक जल रहा था।उस दीपक के सामने प्रियांक बैठा था।उसकी आँखें लाल थीं।हाथ में एक पुराना खत था...और सामने दीवार पर लगी एक तस्वीर।तस्वीर में एक मुस्कुराता हुआ चेहरा था।हार्दिक।प्रियांक का बड़ा भाई।उसने काँपते हाथों से खत खोला।कागज पर सिर्फ चार लाइनें लिखी थीं—“प्रियांक,अगर तू ये खत पढ़ रहा है, तो समझ लेना मैं तुझसे ...Read More

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दो धड़कनें, एक वादा - 2

PART 2 — रिश्तों का इम्तिहानसुबह की पहली किरण खिड़की से कमरे के अंदर आ रही थी। प्रियांक अभी नींद में सो रहा था, जबकि यज्ञी रसोई में चाय बना रही थी। तभी उसकी नजर आँगन में बैठे हार्दिक पर पड़ी। वह अकेला बैठा था और उसके हाथ में एक कागज था। चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आँखों में थकान साफ दिखाई दे रही थी। यज्ञी धीरे-धीरे उसके पास गई और बोली, “भैया?” हार्दिक ने तुरंत कागज मोड़कर अपनी जेब में रख लिया और मुस्कुराते हुए पूछा, “अरे यज्ञी, तुम कब आई?” यज्ञी ने कहा, “अभी... प्रियांक सो रहा ...Read More

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दो धड़कनें, एक वादा - 3

PART 3 — आखिरी वादाशादी की शहनाई अब भी बज रही थी, लेकिन घर के अंदर हर किसी के से खुशी गायब हो चुकी थी। हार्दिक जमीन पर बेहोश पड़ा था और प्रियांक उसे अपनी बाँहों में उठाए लगातार कह रहा था, “भैया... आँखें खोलो। आज मेरी शादी है। आपने ही तो कहा था कि मेरी शादी अपनी आँखों से देखोगे। अब ऐसे कैसे चले जाओगे?” यज्ञी एक कोने में खड़ी काँप रही थी। उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कुछ देर बाद एम्बुलेंस आई और हार्दिक को अस्पताल ले जाया गया। प्रियांक उसके ...Read More