Two beats, one promise - 2 in Hindi Love Stories by priyanshi bhuva books and stories PDF | दो धड़कनें, एक वादा - 2

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दो धड़कनें, एक वादा - 2

PART 2 — रिश्तों का इम्तिहान

सुबह की पहली किरण खिड़की से कमरे के अंदर आ रही थी। प्रियांक अभी गहरी नींद में सो रहा था, जबकि यज्ञी रसोई में चाय बना रही थी। तभी उसकी नजर आँगन में बैठे हार्दिक पर पड़ी। वह अकेला बैठा था और उसके हाथ में एक कागज था। चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आँखों में थकान साफ दिखाई दे रही थी। यज्ञी धीरे-धीरे उसके पास गई और बोली, “भैया?” हार्दिक ने तुरंत कागज मोड़कर अपनी जेब में रख लिया और मुस्कुराते हुए पूछा, “अरे यज्ञी, तुम कब आई?” यज्ञी ने कहा, “अभी... प्रियांक सो रहा है।” हार्दिक ने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। यज्ञी कुछ पल उसे देखती रही, फिर बोली, “आप ठीक तो हैं?” हार्दिक ने बात टालते हुए कहा, “मुझे क्या हुआ?” लेकिन यज्ञी उसकी आँखों में छिपा दर्द समझ चुकी थी। उसने धीरे से पूछा, “भैया... सच बताइए।” हार्दिक कुछ देर तक चुप रहा। आखिरकार उसने अपनी जेब से वह कागज निकालकर यज्ञी के हाथ में दे दिया। रिपोर्ट देखते ही यज्ञी के हाथ काँपने लगे। उसकी आँखों में आँसू आ गए। “ये... कब से?” उसने काँपती आवाज में पूछा। हार्दिक ने धीरे से कहा, “कुछ समय से।” यज्ञी ने पूछा, “प्रियांक को पता है?” हार्दिक ने सिर हिला दिया, “नहीं।” “आप उसे बताएँगे?” हार्दिक ने तुरंत कहा, “नहीं।” यज्ञी हैरान थी। “लेकिन क्यों?” हार्दिक ने सोते हुए प्रियांक के कमरे की तरफ देखा और कहा, “उसकी जिंदगी में अभी बहुत कुछ अच्छा होने वाला है। उसकी खुशी मेरी वजह से खराब नहीं होगी।” यज्ञी की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने कहा, “लेकिन आप उसके भाई हैं।” हार्दिक हल्का-सा मुस्कुराया और बोला, “इसीलिए तो।” यज्ञी ने रिपोर्ट अपने सीने से लगा ली। “भैया... आप ठीक हो जाएंगे।” हार्दिक ने उसकी तरफ देखा और बहुत धीमी आवाज में कहा, “काश।” सिर्फ एक शब्द था, लेकिन उस एक शब्द ने यज्ञी को अंदर तक हिला दिया। उसे समझ आ गया था कि हार्दिक खुद भी जानता था कि समय उसके साथ नहीं था।

कुछ दिनों बाद हार्दिक ने सुबह-सुबह प्रियांक को जगाया। “उठ छोटे।” प्रियांक ने आँखें बंद रखते हुए कहा, “क्या हुआ भैया?” हार्दिक ने मुस्कुराकर कहा, “आज यज्ञी के घर जाना है।” प्रियांक तुरंत उठकर बैठ गया। “क्यों?” हार्दिक ने कहा, “तुम्हारी शादी की बात करने।” प्रियांक कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा और फिर खुशी से हँस पड़ा। “सच में?” हार्दिक ने कहा, “हाँ।” प्रियांक ने पूछा, “लेकिन यज्ञी के पापा मानेंगे?” हार्दिक ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “तू प्यार करता है उससे?” प्रियांक ने बिना सोचे कहा, “बहुत।” हार्दिक मुस्कुराया और बोला, “तो डर किस बात का?” प्रियांक ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया। “आप दुनिया के सबसे अच्छे भैया हो।” हार्दिक ने अपने आँसू छुपाते हुए उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, “बस तू हमेशा खुश रहना।” प्रियांक को क्या पता था कि शायद यह गले लगना उनके बीच का आखिरी लंबा गले लगना था।

हार्दिक, प्रियांक और यज्ञी उसके घर पहुँचे। विराज दरवाजे पर खड़े थे। हार्दिक को देखते ही उनका चेहरा गंभीर हो गया। कई सालों से दोनों परिवारों के बीच जो दूरी थी, वह आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। विराज ने हार्दिक की तरफ देखते हुए पूछा, “तुम?” हार्दिक ने शांत आवाज में कहा, “आज पुराने हिसाब की बात करने नहीं आया।” कुछ पल की खामोशी के बाद उसने कहा, “मैं अपने भाई का हाथ आपकी बेटी के हाथ में माँगने आया हूँ।” कमरे में सन्नाटा छा गया। यज्ञी की धड़कन तेज हो गई। विराज ने पहले प्रियांक की तरफ देखा और फिर यज्ञी की तरफ। उन्होंने पूछा, “क्या तुम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हो?” प्रियांक ने बिना झिझक कहा, “जी।” यज्ञी ने भी चुपचाप सिर झुका दिया। विराज की आँखों में दर्द था। उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि हमारे पुराने रिश्तों की सजा तुम दोनों को न भुगतनी पड़े।” हार्दिक ने जवाब दिया, “इस बार हमारे बच्चों को हमारे अतीत की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।” विराज ने हार्दिक की तरफ देखा। कई सालों बाद पहली बार दोनों के बीच दुश्मनी से ज्यादा पछतावा दिखाई दे रहा था। आखिरकार विराज ने धीरे से कहा, “मुझे मंजूर है।” यज्ञी की आँखों से आँसू निकल आए और प्रियांक ने खुशी से हार्दिक को गले लगा लिया। लेकिन हार्दिक की मुस्कान के पीछे एक गहरा दर्द छिपा था। उसे पता था कि शायद वह उस शादी के बाद ज्यादा समय तक नहीं रहेगा।

शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं। घर में फिर से हँसी गूँजने लगी। प्रियांक कभी कपड़े देखता, कभी सजावट और कभी यज्ञी को फोन करता। हर बार हार्दिक उसे चिढ़ाता। “इतनी बार फोन करेगा तो शादी के दिन बात करने के लिए क्या बचेगा?” प्रियांक हँसकर कहता, “भैया, आप नहीं समझोगे।” हार्दिक मुस्कुराकर कहता, “मैं सब समझता हूँ।” प्रियांक पूछता, “क्या?” हार्दिक कहता, “प्यार।” प्रियांक कुछ पल के लिए चुप हो जाता। हार्दिक उसकी तरफ देखते हुए कहता, “बस एक बात याद रखना। प्यार करना आसान है, लेकिन निभाना मुश्किल। और तुम दोनों को इसे निभाना है।” प्रियांक सिर हिलाकर कहता, “वादा।” हार्दिक उसकी पीठ थपथपा देता, लेकिन उसके मन में सिर्फ एक ही बात थी—काश वह इस पल को हमेशा के लिए रोक सकता।

शादी की तैयारियों के बीच यज्ञी अक्सर हार्दिक को देखती रहती थी। एक दिन उसने आखिरकार पूछ ही लिया, “भैया, आप मुझे कुछ बताना चाहते हैं?” हार्दिक ने हैरानी से पूछा, “क्यों?” यज्ञी बोली, “क्योंकि आपकी आँखें कुछ और कहती हैं।” हार्दिक हल्का-सा मुस्कुराया और बोला, “तुम बहुत समझदार हो गई हो।” यज्ञी ने कहा, “आप मजाक मत कीजिए।” हार्दिक कुछ देर चुप रहा। फिर उसने धीमी आवाज में कहा, “डर मत।” यज्ञी ने पूछा, “किस बात से?” हार्दिक बोला, “आने वाले कल से।” यज्ञी की आँखों में आँसू आ गए। उसने पूछा, “आपको कुछ होने वाला है?” हार्दिक ने उसका चेहरा अपनी तरफ करते हुए कहा, “अगर कभी मैं तुम्हारे साथ न रहूँ...” यज्ञी ने तुरंत उसके मुँह पर हाथ रख दिया और बोली, “ऐसा मत बोलिए।” हार्दिक ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “बस मेरी बात सुनो। प्रियांक को कभी टूटने मत देना।” यज्ञी रोते हुए बोली, “आप खुद उसे क्यों नहीं संभालेंगे?” हार्दिक की आवाज बहुत धीमी हो गई, “हर कहानी में हर किरदार आखिरी पन्ने तक नहीं रहता।” यज्ञी की आँखों से आँसू बहने लगे। अब उसे समझ आ चुका था कि हार्दिक उसे अपनी मौत के लिए तैयार कर रहा था।

इधर प्रियांक अपने माता-पिता की मौत का सच जानने की कोशिश कर रहा था। उसने पुराने दस्तावेज निकाले, पुरानी तस्वीरें देखीं और पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए। तभी उसे एक तस्वीर मिली जिसमें उसके पिता के साथ एक आदमी खड़ा था। वही आदमी जिसे उसने अपने पिता की पुरानी डायरी में कई बार देखा था। उसका नाम था राघव। प्रियांक को याद आया कि हार्दिक ने कभी इस नाम का जिक्र नहीं किया था। वह तस्वीर लेकर हार्दिक के पास पहुँचा और पूछा, “भैया, ये कौन है?” तस्वीर देखते ही हार्दिक का चेहरा बदल गया। प्रियांक ने पूछा, “आप इसे जानते हैं?” हार्दिक ने धीरे से कहा, “हाँ।” प्रियांक ने पूछा, “कौन है?” हार्दिक ने कहा, “वही इंसान जिसकी वजह से हमारे माता-पिता की जिंदगी बर्बाद हुई।” प्रियांक के चेहरे का रंग उड़ गया। उसने पूछा, “और अब वो कहाँ है?” हार्दिक ने कहा, “शहर में।” प्रियांक हैरान रह गया। “तो आपने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?” हार्दिक ने कहा, “क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तू बदले की आग में अपनी जिंदगी जला दे।” प्रियांक ने मुट्ठी भींचते हुए कहा, “लेकिन मैं सच जानना चाहता हूँ।” हार्दिक ने उसकी तरफ देखा और कहा, “सच जानना और सच का सामना करना दोनों अलग चीजें हैं।” प्रियांक ने जवाब दिया, “मैं तैयार हूँ।” हार्दिक ने आँखें बंद कर लीं। उसे पता था कि अब अतीत फिर से उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुका था।

उधर यज्ञी ने भी अपने पिता से राघव के बारे में पूछ लिया। “पापा, राघव कौन है?” विराज का चेहरा सफेद पड़ गया। उन्होंने पूछा, “तुमने उसका नाम कहाँ सुना?” यज्ञी ने कहा, “प्रियांक की पुरानी तस्वीर में।” विराज ने गहरी साँस ली और कहा, “राघव ही वह आदमी था जिसने तुम्हारे और प्रियांक के परिवारों के बीच सब कुछ खराब किया।” यज्ञी ने पूछा, “लेकिन आप उसके साथ क्यों थे?” विराज कुछ देर चुप रहे और फिर बोले, “मैं उसके साथ नहीं था। मैं उसके खिलाफ गवाही देने वाला था।” यज्ञी ने हैरानी से पूछा, “फिर आपने गवाही क्यों नहीं दी?” विराज की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने कहा, “क्योंकि उसने मुझे धमकी दी थी।” यज्ञी ने पूछा, “किस बात की?” विराज ने उसकी तरफ देखा और कहा, “तुम्हारी।” यज्ञी के पैरों तले जमीन खिसक गई। “मेरी?” विराज ने सिर हिलाया। “हाँ। मुझे डर था कि अगर राघव को पता चला कि तुम सच जानती हो, तो वह तुम्हें भी नुकसान पहुँचा सकता है।” यज्ञी कुछ बोल नहीं पाई। अब उसे समझ आ रहा था कि उसके पिता अपराधी कम और डरे हुए इंसान ज्यादा थे।

सच सामने आने के बाद प्रियांक बदलने लगा। वह पहले जैसा हँसता नहीं था और यज्ञी से भी कम बात करने लगा था। एक रात यज्ञी ने पूछा, “तुम मुझसे नाराज हो?” प्रियांक ने कहा, “नहीं।” यज्ञी ने पूछा, “फिर दूर क्यों हो?” प्रियांक कुछ नहीं बोला। यज्ञी ने कहा, “अगर मेरे परिवार की वजह से तुम्हें दर्द हो रहा है तो मुझे सजा मत दो।” प्रियांक ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “मैं तुम्हें सजा नहीं दे रहा।” यज्ञी ने पूछा, “फिर?” प्रियांक ने कहा, “मैं डर रहा हूँ।” यज्ञी ने पूछा, “किससे?” प्रियांक ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तुम्हें खोने से।” यज्ञी की आँखों में आँसू आ गए। प्रियांक ने कहा, “मुझे लगता है कि जितना हम इस अतीत में जाएंगे, उतना ही हमारा भविष्य टूटता जाएगा।” यज्ञी ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “तो हम अतीत को वहीं छोड़ देंगे।” प्रियांक ने पूछा, “क्या इतना आसान है?” यज्ञी ने कहा, “नहीं। लेकिन हम कोशिश तो कर सकते हैं।” प्रियांक ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और कहा, “मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा।” यज्ञी मुस्कुराई और बोली, “मैं भी नहीं।”

शादी में कुछ ही दिन बचे थे। हार्दिक हर तैयारी खुद कर रहा था। उसने यज्ञी की पसंद का कमरा सजवाया, प्रियांक के लिए कपड़े खरीदे और घर की दीवारों पर नई तस्वीरें लगवाईं। एक दिन प्रियांक ने पूछा, “भैया, आप इतना सब क्यों कर रहे हो?” हार्दिक मुस्कुराकर बोला, “क्योंकि तेरी शादी है।” प्रियांक ने कहा, “लेकिन आप आराम भी तो कर सकते हो।” हार्दिक ने कहा, “शादी एक बार होती है।” प्रियांक हँसकर बोला, “और आपकी?” हार्दिक कुछ पल चुप रहा। फिर उसने कहा, “मेरी खुशी तो तेरी खुशी में है।” प्रियांक ने उसे गले लगा लिया। हार्दिक ने उसकी पीठ थपथपाई और अपनी आँखों में आए आँसुओं को छुपा लिया।

आखिरकार सगाई का दिन आ गया। यज्ञी लाल कपड़ों में बहुत खूबसूरत लग रही थी। प्रियांक उसे देखकर बस देखता ही रह गया। पीछे से हार्दिक ने मजाक में कहा, “क्या हुआ?” प्रियांक ने कहा, “कुछ नहीं।” हार्दिक हँसते हुए बोला, “देखता ही रहेगा या अंगूठी भी पहनाएगा?” सब हँस पड़े। सगाई की रस्म शुरू हुई। प्रियांक ने यज्ञी की उंगली में अंगूठी पहनाई और यज्ञी ने भी उसे अंगूठी पहनाई। तालियाँ बजने लगीं। हार्दिक सबसे पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था। तभी यज्ञी उसके पास गई और उसने हार्दिक के हाथ में राखी बाँध दी। हार्दिक हैरान होकर बोला, “ये क्या?” यज्ञी मुस्कुराई और बोली, “आप सिर्फ मेरे होने वाले पति के भाई नहीं हैं... मेरे भाई हैं।” हार्दिक की आँखें भर आईं। उसने यज्ञी के सिर पर हाथ रखा और कहा, “खुश रहना।” यज्ञी ने कहा, “आप भी।” हार्दिक ने धीरे से कहा, “मैं रहूँगा।” लेकिन वह यह नहीं बता सका कि शायद उसके पास ज्यादा समय नहीं था।

शादी से एक दिन पहले हार्दिक ने यज्ञी को अपने पास बुलाया। उसके हाथ में एक लाल दुपट्टा था। उसने दुपट्टा यज्ञी की तरफ बढ़ाते हुए कहा, “ये लो।” यज्ञी ने पूछा, “मेरे लिए?” हार्दिक ने कहा, “हाँ।” यज्ञी ने दुपट्टा हाथ में लिया और कहा, “बहुत सुंदर है।” हार्दिक ने कहा, “इसे हमेशा संभालकर रखना।” यज्ञी ने पूछा, “क्यों?” हार्दिक हल्का-सा मुस्कुराया और बोला, “कभी जरूरत पड़ेगी।” यज्ञी ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “आप फिर ऐसी बातें कर रहे हैं।” हार्दिक ने कहा, “कुछ चीजों की कीमत तब समझ आती है जब वो हमारे पास नहीं रहतीं।” यज्ञी की आँखें नम हो गईं। उसने कहा, “आप मुझे डरा रहे हैं।” हार्दिक ने उसके माथे पर हाथ रखा और कहा, “डरना मत। कल जब तू दुल्हन बनेगी ना, तो मैं सबसे ज्यादा खुश रहूँगा।” यज्ञी रो पड़ी। हार्दिक ने उसे गले लगा लिया। वह लाल दुपट्टा सिर्फ एक तोहफा नहीं था। वह हार्दिक की आखिरी निशानी थी।

उस रात पूरा घर सो चुका था। हार्दिक अकेला अपने कमरे में बैठा था। उसने एक कागज निकाला और लिखना शुरू किया, “प्रिय प्रियांक, अगर तू ये खत पढ़ रहा है तो शायद मैं तेरे पास नहीं हूँ। लेकिन मेरी एक बात हमेशा याद रखना। तू कभी अकेला नहीं होगा, क्योंकि यज्ञी तेरे साथ होगी। उसे कभी मत छोड़ना। वह सिर्फ तेरी पत्नी नहीं, मेरी बहन भी है। और हाँ, मुझे याद करके रोना मत। मैं चाहता हूँ कि तू खुश रहे, क्योंकि तेरी खुशी ही मेरी सबसे बड़ी जीत है। तेरा भैया, हार्दिक।” हार्दिक ने खत मोड़ा और उसे एक लिफाफे में रखकर मेज की दराज में रख दिया। फिर उसने प्रियांक के कमरे की तरफ देखा और धीरे से कहा, “कल मेरा छोटा भाई दूल्हा बनेगा।” उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। उसने छाती पकड़ ली। कुछ सेकंड तक वह दर्द सहता रहा और फिर धीरे-धीरे फर्श पर बैठ गया। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। लेकिन उसके चेहरे पर अब भी सिर्फ प्रियांक और यज्ञी की तस्वीर थी। उसने बहुत धीमी आवाज में कहा, “बस... कल तक।” और फिर उसकी आँखें बंद हो गईं।

सुबह घर में शहनाई बज रही थी। यज्ञी दुल्हन बनने के लिए तैयार हो रही थी। प्रियांक अपने कमरे में कपड़े पहन रहा था। घर में हर तरफ खुशी थी। लेकिन उसी समय हार्दिक अपने कमरे में जमीन पर बेहोश पड़ा था। उसके पास मेज पर वही आखिरी खत रखा था। दरवाजे के बाहर से प्रियांक की आवाज आई, “भैया!” कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर आवाज लगाई, “भैया, जल्दी आइए... मेरी शादी है!” फिर भी कोई जवाब नहीं आया। प्रियांक ने दरवाजा खोला। उसकी नजर जमीन पर पड़े हार्दिक पर गई। उसके चेहरे की मुस्कान एक पल में गायब हो गई। “भैया...?” वह दौड़कर उसके पास गया। “भैया!” हार्दिक ने आँखें खोलने की कोशिश की, लेकिन इस बार उसके पास बोलने की ताकत नहीं थी। प्रियांक चीख पड़ा, “कोई एम्बुलेंस बुलाओ!” यज्ञी भी दौड़ती हुई वहाँ पहुँची। उसकी नजर हार्दिक पर पड़ी और उसके हाथ से लाल दुपट्टा नीचे गिर गया।

शादी की शहनाई अब भी बज रही थी...

लेकिन उस घर में पहली बार किसी को वह शहनाई...

मौत की आवाज जैसी लग रही थी।

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