हर कहानी की एक शुरुआत होती है। लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान नहीं — किस्मत खुद लिखती है। कुछ रिश्ते यूँ ही नहीं बनते। कुछ मुलाकातें संयोग नहीं होतीं। और कुछ जुदाइयाँ… सिर्फ जुदाई नहीं — एक श्राप की छाया होती हैं। यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं है। न ही सिर्फ बदले की। न ही सिर्फ धोखे और नफरत की। यह कहानी है एक ऐसे श्राप की — जो सदियों से प्रेम पर ग्रहण बनकर छाया हुआ है। कहते हैं, जब भी कोई प्रेम अपनी पूर्णता के करीब पहुँचता है —
श्रापित नज़र - 1 - मंदिर की सीढ़ियां
हर कहानी की एक शुरुआत होती है।लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान नहीं — किस्मत खुद लिखती रिश्ते यूँ ही नहीं बनते।कुछ मुलाकातें संयोग नहीं होतीं।और कुछ जुदाइयाँ… सिर्फ जुदाई नहीं — एक श्राप की छाया होती हैं।यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं है।न ही सिर्फ बदले की।न ही सिर्फ धोखे और नफरत की।यह कहानी है एक ऐसे श्राप की —जो सदियों से प्रेम पर ग्रहण बनकर छाया हुआ है।कहते हैं, जब भी कोई प्रेम अपनी पूर्णता के करीब पहुँचता है —वक्त की कोई अदृश्य शक्ति उसे तोड देती है।क्या इस सदी में भी प्यार पर ग्रहण ...Read More
श्रापित नज़र - 2
राजीव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,All right, Miss श्रावणी. तुम्हारी आँखों में सच्चाई है। Welcome to JS Group Architectures।यह सुनते ही जैसे समय एक पल को ठहर गया।श्रावणी की उंगलियाँ, जो अब तक फाइल के कोने को कसकर पकडे थीं, ढीली पड गईं। उसके चेहरे पर खुशी की चमक फैल गई — धीमे- धीमे, जैसे सूरज बादलों के पीछे से निकलता है।उसकी आँखों में सपनों की रोशनी साफ दिखाई दे रही थी।वर्षों का संघर्ष।अनगिनत रातों की दुआएँ।अकेलेपन के बीच खुद को संभालना।सब जैसे एक क्षण में सार्थक हो गया।Thank you so much, सर… उसकी आवाज में कृतज्ञता थी ...Read More