कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं। न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार। बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा बन जाता है, जिसके बिना हम अपनी कहानी की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन क्या हर मुलाकात सिर्फ एक संयोग होती है? या फिर कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में आने से पहले ही कहीं लिखे जा चुके होते हैं? आशी को इन बातों पर कभी विश्वास नहीं था।
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 1
भूमिकाकहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं।न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार।बस एक दिन अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा बन जाता है, जिसके बिना हम अपनी कहानी की कल्पना भी नहीं कर सकते।लेकिन क्या हर मुलाकात सिर्फ एक संयोग होती है?या फिर कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में आने से पहले ही कहीं लिखे जा चुके होते हैं?आशी को इन बातों पर कभी विश्वास नहीं था।उसके लिए ज़िंदगी बहुत सीधी थी—सुबह उठो, अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करो, लोगों की उम्मीदों पर खरा उ ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 2
सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से होकर कमरे में फैल रही थी, लेकिन आशी की आँखें पूरी की अधूरी नींद की वजह से भारी थीं।उसका फोन तकिए के पास रखा था।वही फोन, जिस पर पिछली रात वह अजीब-सा संदेश आया था।आशी ने करवट बदलते हुए फोन उठाया और स्क्रीन को देखा। उसने शायद रात में दस बार वह संदेश पढ़ा होगा, लेकिन सुबह उठते ही उसकी नजर फिर उसी पर चली गई।“तुमने लिखना क्यों छोड़ दिया?”उसने धीरे से साँस छोड़ी।“कौन हो सकता है?” उसने खुद से कहा।तभी कमरे के बाहर से तेज़ आवाज़ आई—“आशी दीदी! अगर पाँच ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 3
विहान कुछ देर तक फोन की स्क्रीन को देखता रहा।स्क्रीन पर वही संदेश था—“कुछ कहानियाँ शुरू होने से पहले एक-दूसरे से जुड़ चुकी होती हैं।”वह कुर्सी पर पीछे टिक गया।कमरे में हल्की-सी खामोशी थी। खिड़की के बाहर सड़क पर गाड़ियों की आवाज़ आ रही थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।उसने संदेश को दोबारा पढ़ा।फिर धीरे से फोन टेबल पर रख दिया।“अजीब है…”विहान ने खुद से कहा।उसे समझ नहीं आ रहा था कि किसी अनजान व्यक्ति को उसकी लिखी हुई बातों के बारे में कैसे पता हो सकता है।तभी कमरे का दरवाज़ा खुला।“भाई?”कबीर अंदर आया और हाथ में चाय ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 4
“विहान।”बस एक नाम था।लेकिन उस एक नाम को पढ़ते ही Aashi की उंगलियाँ फोन की स्क्रीन पर रुक गईं।कुछ तक वह सिर्फ उस message को देखती रही।विहान।नाम जाना-पहचाना था।इतना जाना-पहचाना कि उसे लगा जैसे उसने इसे कहीं पहले पढ़ा हो… या शायद किसी पुराने पन्ने पर लिखा हो।लेकिन कहाँ?Aashi ने धीरे से फोन नीचे रख दिया।“क्या हुआ?”Meera की आवाज़ सुनकर Aashi चौंक गई।“कुछ नहीं।”“कुछ नहीं?” Meera ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “पिछले दस मिनट से तुम एक ही जगह देख रही हो।”Aashi ने हल्की-सी मुस्कान दी।“उसने अपना नाम बता दिया।”“कौन?”Aashi ने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया।Meera ने message ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 5
Aashi कुछ देर तक उस तारीख को देखती रही।22 August.सिर्फ दो शब्द और कुछ अंक थे, लेकिन उसके लिए तारीख किसी बंद दरवाज़े की तरह थी।ऐसा दरवाज़ा, जिसे उसने बहुत पहले बंद कर दिया था।उसने डायरी को धीरे से पलटा।कुछ पन्ने खाली थे। कुछ पर अधूरी कविताएँ थीं। कहीं-कहीं छोटी-छोटी बातें लिखी थीं, जिन्हें पढ़कर उसे अपना पुराना रूप याद आ रहा था।एक पन्ने पर लिखा था—“कभी-कभी हम किसी चीज़ को इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि हमें उससे प्यार नहीं रहा… बल्कि इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि उससे जुड़ी याद बहुत भारी हो जाती है।”Aashi की आँखें उस लाइन पर टिक ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 6
“वो लड़का, जिसे Aarav याद नहीं कर पा रहा था…”Aashi कुछ देर तक वहीं बैठी रही।उसकी उँगलियाँ अब भी नीली डायरी के कवर पर थीं।Aarav के आखिरी शब्द उसके कानों में बार-बार गूंज रहे थे—“बस इतना कि वो आपके लिए एक डायरी लेकर आया था।”Aashi ने धीरे से डायरी खोली।पहले पन्ने पर वही छोटा-सा अक्षर था—V.उसने अपनी उँगली उस अक्षर पर रखी।“अगर वो Vihaan था… तो Aarav को उसका चेहरा याद क्यों नहीं?”उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।तभी फोन की स्क्रीन जल उठी।Vihaan का message था।“तुम्हें अब उस दिन की कितनी बातें याद आ रही हैं?”Aashi ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 7
Aashi काफी देर तक उस कागज़ को अपने हाथों में पकड़े बैठी रही।कमरे में पूरी तरह शांति थी, लेकिन अंदर जैसे कई सवाल एक साथ शोर कर रहे थे।उसने कागज़ को दोबारा पढ़ा—“अगर कभी Vihaan वापस आए, तो उसे यह मत बताना कि तुमने मुझे पहचान लिया है।”“लेकिन ये किसने लिखा था?”Aashi ने खुद से पूछा।उसकी नज़र डायरी पर गई।उसे अचानक याद आया कि इस डायरी के बारे में उसके अलावा बहुत कम लोग जानते थे।फिर यह कागज़ यहाँ आया कैसे?उसने फोन उठाया और Vihaan का chat खोला।कुछ देर तक वह message box को देखती रही।फिर उसने लिखा—“Vihaan…”कुछ सेकंड ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 8
“कल… उसी जगह।”Vihaan का आखिरी message पढ़ने के बाद भी Aashi काफी देर तक फोन हाथ में लिए बैठी मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी। वह जानती थी कि अगले दिन उसे उस जगह जाना होगा, जहाँ उसकी जिंदगी की कोई भूली हुई कहानी शायद उसका इंतज़ार कर रही थी।लेकिन घरवालों से क्या कहेगी?वह पूरी रात ठीक से सो नहीं पाई।सुबह जब उसकी आँख खुली, तो खिड़की से आती धूप कमरे में फैल चुकी थी। उसने सबसे पहले फोन देखा। Vihaan की तरफ से कोई नया message नहीं था।शायद उसे भी पता था कि अब अगली बात आमने-सामने ही ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 9
Aashi की उँगलियाँ उस कागज़ पर जमी रह गईं।उसकी आँखें बार-बार उसी नाम को पढ़ रही थीं।लेकिन उसका दिमाग नाम को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।“ये… यहाँ कैसे?”उसके होंठों से बस इतना ही निकला।Vihaan सामने खड़ा उसे देख रहा था। उसके चेहरे पर हैरानी नहीं थी, जैसे वह पहले से जानता हो कि कागज़ पर क्या लिखा है।Aashi ने तुरंत उसकी तरफ देखा।“तुम्हें इस नाम के बारे में पहले से पता था?”Vihaan ने कुछ पल चुप रहने के बाद कहा—“हाँ।”“तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”“क्योंकि ये बात सिर्फ मेरे बताने से समझ नहीं आती, Aashi।”Aashi ने ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 10
Aashi अपनी माँ के सामने खड़ी थी।Suman की आँखों में देखकर उसे महसूस हो रहा था कि आज उसे ऐसा जानने को मिलेगा, जिसका इंतज़ार शायद वह खुद भी इतने सालों से कर रही थी।“माँ, प्लीज़… अब मुझे सब बता दीजिए। 22 August को आखिर हुआ क्या था?”Suman ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।“बैठ जाओ, बेटा।”Aashi उनके पास बैठ गई। उसकी नज़र बार-बार माँ के चेहरे पर जा रही थी।Suman ने कुछ पल बाद बोलना शुरू किया।“उस दिन तुम बहुत परेशान थीं। तुम्हारे पापा से तुम्हारी किसी बात पर बहस हुई थी। तुम अपने कमरे में चली गई ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 11
सुबह की धूप खिड़की से होते हुए Aashi के कमरे में आ रही थी।Aashi अपनी नोटबुक खोले बैठी थी। लिखी हुई एक लाइन को वह पिछले दस मिनट से देख रही थी।“कुछ लोग हमारी कहानी में अचानक वापस नहीं आते। शायद वे वहीं से शुरुआत करने आते हैं, जहाँ हम अपनी कहानी अधूरी छोड़ आए थे।”उसने नीचे लिखा Vihaan का नाम देखा और तुरंत पेन से उसे घेर दिया।“ये मैंने क्या लिख दिया?”वह खुद से बुदबुदाई और नोटबुक बंद करने लगी।तभी Aarav कमरे में आ गया।“दीदी, क्या छिपा रही हो?”“कुछ नहीं!”“अच्छा? फिर नोटबुक बंद क्यों कर दी? कहीं किसी ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 12
Aashi घर पहुँची तो उसके चेहरे पर अब भी वही हल्की-सी मुस्कान थी।उसने बैग मेज़ पर रखा और फोन Vihaan का मैसेज दोबारा पढ़ा।“क्योंकि आज बहुत दिनों बाद किसी के साथ समय बिताकर अच्छा लगा।”Aashi ने मैसेज पढ़ते हुए खुद से कहा, “इतनी-सी बात पर कोई इतना खुश होता है क्या?”फिर अगले ही पल वह मुस्कुरा दी।“लेकिन… अच्छा तो मुझे भी लगा था।”उसने फोन रख दिया और कपड़े बदलने लगी। तभी माँ की आवाज़ आई—“Aashi, खाना लगा दूँ?”“हाँ माँ, बस आई!”खाने की मेज़ पर Suman ने बेटी के चेहरे की तरफ देखा।“आज कॉलेज में कुछ अच्छा हुआ है क्या?”Aashi ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 13
सुबह Aashi कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी, तभी उसके फोन पर Vihaan का मैसेज आया।Vihaan: Good writer sahiba! आज क्या लिखने का इरादा है?Aashi ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।Aashi: अभी तो कॉलेज जा रही हूँ। वहाँ पहुँचकर अगर किसी ने परेशान नहीं किया, तो शायद कुछ लिख लूँ।Vihaan: तो फिर तुम्हें परेशान करने का अधिकार सिर्फ मुझे है?Aashi ने मैसेज पढ़कर आँखें घुमाईं।Aashi: आपको किसने दिया ये अधिकार?Vihaan: तुम्हारी मुस्कान ने।Aashi कुछ पल तक स्क्रीन देखती रही। फिर उसने फोन बंद कर दिया।“ये लड़का कभी सीधी बात नहीं कर सकता क्या?”लेकिन उसके चेहरे पर आई मुस्कान ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 14
अगली सुबह Aashi की शुरुआत अपनी डायरी से हुई। रात को लिखी गई पंक्तियाँ पढ़कर उसके चेहरे पर हल्की आ गई। उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि पिछले कुछ दिनों में उसकी जिंदगी इतनी बदल कैसे गई थी।कुछ समय पहले तक वह अपनी भावनाएँ किसी से कहने के बजाय डायरी में लिख दिया करती थी। लेकिन अब एक ऐसा इंसान था, जिससे बात करने के बाद उसे अपनी बातें छिपाने की जरूरत महसूस नहीं होती थी।तभी Aarav कमरे में आया।“दीदी, सुबह-सुबह इतनी मुस्कान? कोई खास बात है क्या?”Aashi ने डायरी बंद कर दी। “तुम्हें अपने स्कूल ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 15
सुबह की हल्की धूप Aashi के कमरे में उतर रही थी। वह अपनी डायरी खोले बैठी थी, लेकिन पिछले मिनट से एक ही पंक्ति को देख रही थी।“कुछ लोग धीरे-धीरे हमारी आदत बन जाते हैं, और हमें पता भी नहीं चलता।”उसने पेन उठाया और नीचे एक और पंक्ति लिख दी—“और फिर उनकी एक छोटी-सी बात भी पूरे दिन का हाल बदल देती है।”तभी फोन की स्क्रीन चमकी।Vihaan: Good morning, writer sahiba! आज कोई नई कहानी लिखी या फिर मेरी शिकायतों की लिस्ट तैयार हो रही है?Aashi मुस्कुराई।Aashi: आपकी शिकायतों की लिस्ट के लिए अलग डायरी खरीदनी पड़ेगी।Vihaan: इतनी शिकायतें? ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 16
सुबह Aashi की आँख खुली तो सबसे पहले उसकी नजर मेज पर रखी डायरी पर गई। पिछली रात उसने Vihaan के बारे में जो लिखा था, उसे याद करके वह मुस्कुरा दी।“ये क्या हो रहा है मुझे?” उसने खुद से पूछा। “पहले हर बात डायरी को बताती थी, अब डायरी में भी उसी की बातें लिख रही हूँ!”वह अपनी ही बात पर हँस पड़ी और तैयार होने लगी।नाश्ते की मेज पर Aarav पहले से बैठा था। Aashi को देखते ही उसने कहा, “दीदी, आज फिर चेहरे पर चमक है। कोई नई कहानी लिखी है या कहानी का हीरो कुछ ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 17
सुबह Aashi अपनी डायरी खोले बैठी थी। रात को लिखी गई कहानी का आखिरी पन्ना अभी भी अधूरा था। कई बार उसे पूरा करने की कोशिश की, लेकिन हर बार कलम वहीं रुक जाती।कहानी में एक लड़की थी, जो अपनी भावनाएँ शब्दों में लिखना जानती थी, लेकिन किसी के सामने उन्हें बोलने से डरती थी। उसकी जिंदगी में एक ऐसा इंसान आया था, जो उससे बहुत सवाल नहीं करता था, बस उसकी बात सुनता था।Aashi ने पन्ने पर लिखा—“वह उसकी कहानी का नायक था या सिर्फ एक ऐसा मुसाफिर, जो कुछ दूर साथ चलने आया था—यह वह नहीं जानती ...Read More
तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 18
सुबह Aashi अपनी डायरी लेकर खिड़की के पास बैठी थी। पिछली शाम Vihaan को अपनी कहानी सुनाने के बाद मन में एक अलग-सा आत्मविश्वास आ गया था। पहली बार उसे लगा था कि उसकी लिखी हुई बातें सिर्फ उसके कमरे और डायरी तक सीमित रहने के लिए नहीं बनी हैं।उसने डायरी का आखिरी पन्ना खोला और कहानी के नीचे लिखा—“कभी-कभी हमें किसी ऐसे इंसान की जरूरत होती है, जो हमें रास्ता दिखाए नहीं, बल्कि हमारे अपने रास्ते पर चलने का भरोसा दे।”वह पंक्ति पढ़कर मुस्कुराई और डायरी बंद कर दी।तभी Aarav कमरे में आया।“दीदी, आप सुबह से लिख रही ...Read More