I found you when I lost myself - 6 in Hindi Love Stories by Khwaab books and stories PDF | तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 6

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तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 6

“वो लड़का, जिसे Aarav याद नहीं कर पा रहा था…”
Aashi कुछ देर तक वहीं बैठी रही।
उसकी उँगलियाँ अब भी उस नीली डायरी के कवर पर थीं।
Aarav के आखिरी शब्द उसके कानों में बार-बार गूंज रहे थे—
“बस इतना कि वो आपके लिए एक डायरी लेकर आया था।”
Aashi ने धीरे से डायरी खोली।
पहले पन्ने पर वही छोटा-सा अक्षर था—
V.
उसने अपनी उँगली उस अक्षर पर रखी।
“अगर वो Vihaan था… तो Aarav को उसका चेहरा याद क्यों नहीं?”
उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
तभी फोन की स्क्रीन जल उठी।
Vihaan का message था।
“तुम्हें अब उस दिन की कितनी बातें याद आ रही हैं?”
Aashi कुछ सेकंड तक स्क्रीन देखती रही।
फिर उसने लिखा—
“इतना कि अब मैं भूलना चाहती हूँ… लेकिन भूल नहीं पा रही।”
कुछ देर तक कोई reply नहीं आया।
Aashi ने फोन एक तरफ रख दिया।
लेकिन कुछ ही सेकंड बाद notification फिर आया।
“क्योंकि तुमने उस दिन जो खोया था, वो सिर्फ एक चीज़ नहीं थी।”
Aashi का दिल जैसे एक पल के लिए रुक गया।
उसने तुरंत पूछा—
“तो फिर क्या खोया था?”
इस बार Vihaan का जवाब आने में काफी समय लगा।
फिर स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन दिखाई दी—
“तुम्हारा भरोसा।”
Aashi की आँखें उस message पर टिक गईं।
भरोसा?
किस पर?
Vihaan पर?
अपने पापा पर?
या खुद पर?
उसने जल्दी से type किया—
“Vihaan, उस दिन आखिर हुआ क्या था?”
कुछ सेकंड बाद reply आया—
“मैं तुम्हें सब बता सकता हूँ… लेकिन पहले तुम्हें वो जगह याद करनी होगी।”
Aashi ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“कौन-सी जगह?”
Vihaan ने लिखा—
“जहाँ हमने पहली बार बात की थी।”
Aashi ने आँखें बंद कर लीं।
फिर वही बारिश…
वही छोटी-सी जगह…
किताबों से भरी मेज़…
और हाथ में नीली डायरी।
लेकिन इस बार उसे कुछ और याद आया।
उस दिन वह अकेली नहीं थी।
उसके पास कोई और भी बैठा था।
एक लड़की।
Aashi ने अचानक आँखें खोल दीं।
“लेकिन वो कौन थी?”
उसने खुद से पूछा।
उसे उस लड़की का चेहरा याद नहीं आ रहा था।
सिर्फ उसकी आवाज़…
बहुत धीमी-सी आवाज़—
“तुम्हें ये बात किसी को नहीं बतानी चाहिए।”
Aashi का सिर घूम गया।
उसने तुरंत डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए।
एक पन्ने पर कुछ लिखा हुआ था, लेकिन आधी स्याही फैल चुकी थी।
उसने मोबाइल की flashlight जलाई।
धीरे-धीरे शब्द साफ दिखाई देने लगे—
“उसने कहा था कि अगर मैं सच जानना चाहती हूँ, तो पहले अपने घर में देखूँ…”
Aashi का हाथ रुक गया।
“घर में?”
उसने अगली लाइन पढ़ने की कोशिश की, लेकिन वहाँ स्याही पूरी तरह मिट चुकी थी।
तभी बाहर से माँ की आवाज़ आई—
“Aashi! खाना लगा दिया है।”
Aashi ने जल्दी से डायरी बंद कर दी।
“हाँ माँ, आती हूँ!”
वह उठने ही वाली थी कि उसकी नज़र डायरी के नीचे रखे एक पुराने कागज़ पर पड़ी।
उसने कागज़ उठाया।
पीछे सिर्फ एक तारीख लिखी थी—
22 August
और नीचे एक नाम…
“Rajesh.”
Aashi के चेहरे का रंग बदल गया।
Rajesh… उसके पापा का नाम।
उसने काँपते हाथों से कागज़ पलटा।
पीछे सिर्फ एक वाक्य लिखा था—
“जिस दिन तुम्हें सच पता चलेगा, उस दिन शायद तुम अपने पापा से वही सवाल पूछोगी जो आज तुम मुझसे पूछ रही हो।”
Aashi कुछ पल तक उस कागज़ को देखती रही।
फिर उसकी नज़र फोन पर गई।
Vihaan का नया message आ चुका था—
“अब समझ आया कि मैं इतने साल चुप क्यों था?”
Aashi ने तुरंत reply किया—
“नहीं…”
फिर कुछ सेकंड रुककर उसने लिखा—
“मुझे अब अपने पापा से एक सवाल पूछना है।”
और पहली बार उसे डर Vihaan से नहीं…
अपने ही घर से लगने लगा।
🌙 **क्रमशः…**