रात के करीब बारह बज रहे थे। रामपुर गाँव सन्नाटे की एक गहरी चादर में लिपटा हुआ था। आसमान में काले बादलों का डेरा था, जिससे उठती ठंडी हवाएँ गाँव की पगडंडियों पर लगे पीपल के पेड़ों को किसी खौफनाक तरीके से झकझोर रही थीं। गाँव के किनारे पर स्थित वर्षों पुराना शिव मंदिर का खंडहर दिन में जितना उजाड़ दिखता था, इस अमावस की काली रात में उतना ही भयावह प्रतीत हो रहा था।
अवंतिका: छलावा और हकीकत - 1
रात के करीब बारह बज रहे थे। रामपुर गाँव सन्नाटे की एक गहरी चादर में लिपटा हुआ था। आसमान काले बादलों का डेरा था, जिससे उठती ठंडी हवाएँ गाँव की पगडंडियों पर लगे पीपल के पेड़ों को किसी खौफनाक तरीके से झकझोर रही थीं। गाँव के किनारे पर स्थित वर्षों पुराना शिव मंदिर का खंडहर दिन में जितना उजाड़ दिखता था, इस अमावस की काली रात में उतना ही भयावह प्रतीत हो रहा था।खण्डहर के एक अंधेरे कोने में विक्रम हड़बड़ी में खड़ा था। उसकी सांसें फूली हुई थीं और चेहरा पसीने से तर-बतर था। वह बार-बार अपनी कलाई ...Read More
अवंतिका: छलावा और हकीकत - 2
सूरज की पहली किरण जब रामपुर गाँव पर पड़ी, तो रोज़मर्रा की शांति एक खौफनाक चीख के साथ टूट सुबह मवेशी चराने निकले कुछ ग्रामीणों की नज़र जब गाँव के बहार स्थित पुराने शिव मंदिर के खंडहर पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर विक्रम की लहूलुहान लाश बेजान पड़ी थी।कुछ ही पलों में यह खबर पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई। लोग खंडहर के बाहर इकट्ठा होने लगे। हर कोई सहमा हुआ था और आपस में फुसफुसा रहा था— "अरे, ये तो विक्रम है!", "कल रात तक तो यह यहीं था, किसने इतनी ...Read More