चंद्रगुप्त - चतुर्थ - अंक - 43

by Jayshankar Prasad in Hindi Novel Episodes

मौर्य कहेते हैं की यह सब ढोंग है रक्त और प्रतिशोध, क्रूरता और मृत्यु का खेल देखते ही जीवन बिता, अब क्या मैं इस सरल पथ पर चल सकूंगा? यह ब्राह्मण आँख मुंदने खोलने का अभिनय भले ही ...Read More