Mukhbir - 1 by राज बोहरे in Hindi Social Stories PDF

मुख़बिर - 1

by राज बोहरे in Hindi Social Stories

मैंने इस बार शायद गलत जगह पांव रख दिया था। पांव तले से थोड़ी सी मिट्टी नीचे को रिसकी थी, जिससे हल्की सी आवाज हुई। मुझे लगा, मेरी गलती से शोर पैदा हो रहा है। अभी हाल गालियां सुनने ...Read More