Nishchhal aatma ki prem-pipasa... - 27 by Anandvardhan Ojha in Hindi Novel Episodes PDF

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 27

by Anandvardhan Ojha Verified icon in Hindi Novel Episodes

'बस, मैं तेरा अन्वेषक था, जनम-जनम का… 'दिन हांफते-दौड़ते थककर शाम की छाया में जा बैठा। हम दफ़्तर से लौटे--निःशब्द, अपने-अपने पैर घसीटते हुए। शाही ने चाय बनायी, हम दोनों ने पी, लेकिन कोई किसी से कुछ नहीं बोला। ...Read More