Parchayi by Devika Singh in Hindi Fiction Stories PDF

परछाई

by Devika Singh Matrubharti Verified in Hindi Fiction Stories

कभी कभी मेरा दिल होता है कि मैं बहुत रोऊं लेकिन अगर रोंऊंगी तो उसको कैसे संभालूंगी, यही चिंता दिन रात सताती है। उसके लिए मुझे दुगनी ताकत से खड़ा होना है। वह विशेष है इतना विशेष कि उसके ...Read More