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બહાર મુશળધાર વરસાદ વરસી રહ્યો હતો. કોલાબાના એ જૂના મકાનના એકાંતમાં અભિમન્યુ તેના...
युद्ध होणार याची जाणीव प्रत्येकाला झालीच होती. इकडे लग्न उरकून त्याची बहिण स...
आँगन में अब सन्नाटा नहीं था—वहाँ डर जम गया था। कार्तिक अब भी दरवाज़े की तरफ़ भाग...
रात का जंगल कीड़ों की किटकिट और सियारों की हुंकारों से भरा था। पुराने पत्थर की ख...
1बरसात की वह शाम न तो बहुत ख़ुशनुमा थी, न ही बहुत उदास।बस एक अजीब-सी चुप्पी थी—ज...
कोई भी इंसान इतना बेख़ौफ़,कैसे हो सकता है की खुद को कानून से ऊपर,समझे।एक इंसान...
अतृप्त आत्मा का आह्वान: काले कुएँ का अभिशापराजस्थान के रेतीले धोरों के बीच बसा &...
ఎపిసోడ్ 9ఉదయం సూర్యుడు పూర్తిగా ఉదయించకముందే అఖిరా లేచింది. రాత్రంతా నిద్ర పట్టల...
part- 5सुहानी ने मोबाइल को देर तक देखा।हर्ष का voice note अब भी वहीं था—...
अध्याय ८--------------सोन्याच्या खाणीतील अंधार----------------------------------...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
ఉదయం 8 గంటలకు ఫోన్ మోగింది. అఖిరా నిద్ర మత్తులో ఉండగా, ఫోన్ రిసీవ్ చేసి, “హలో” అని ఆవలిస్తూ అన్నది. అటు వైపు నుండి సత్య ఉత్సాహంగా, “హలో అఖిరా! రెడీ అయ్యావా?” అని అడిగింది. అఖ...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
सह्याद्रीच्या कड्यांवरून वाहणारा वारा नुसता थंड नव्हता; तो मूक साक्षीदारासारखा होता. नुकताच पाऊस पडून गेल्यामुळे हवेत गारवा होता. जंगलातील उंच झाडांच्या फांद्यांवरून तो थंड वारा जा...
त्यावेळी मी तीन वर्षांचा होतो, माझा मोठा भाऊ सुखेश पाच वर्षांचा होता आणि माझी धाकटी बहीण भाविका फक्त सहा महिन्यांची होती. माझ्या आईला एका गंभीर आजाराने ग्रासले होते. तिला...
સંજય કોલેજનાં પહેલાં વર્ષમાં હતો. ઘર સુખી અને સંપન હતું. તે ભણવામાં હોશિયાર હતો. તે સુંદર અને સંસ્કારી હતો. તેના મા-બાપને એક નો એક જ દિકરો હતો અટલે લાડ કોડથી એનો ઉછેર થયો હતો.શહેરન...
'જય શ્રી કૃષ્ણ' વાંચક મિત્રો! આજ એક ન્યુ ધારાવાહિક નિલક્રિષ્નામાં પ્રવેશ કરવા જઇ રહી છું. વાંચક મિત્રો તમારો સાથ, સહકાર હંમેશા મળતો રહ્યો છે, અને આગળ પણ મળતો રહે! એવી અપેક...
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