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    7: कृष्ण कहाँ हैं?तुमने ढूँढा उसे मूर्तियों में, और मंदिरों की दीवारों में,तुमने...

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         लोह पर मक्की की मोटी-मोटी रोटियां थापती वीरों के दिमाग में व...

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    આપણે એટલે કે મનુષ્ય જાતિ પોતાને જીવસૃષ્ટિની ટોચે સમજીએ છીએ અને પોતાને ખૂબ જ જ્ઞા...

  • टापुओं पर पिकनिक - भाग 50

    ५०. आघोष ओळखू येत नव्हता. एका महिन्यात त्याचा पेहराव पूर्णपणे बदलला होता. त्याच्...

टापुओं पर पिकनिक. By Prabodh Kumar Govil

आर्यन तेरा वर्षांचा झाला. काल त्याचा वाढदिवस होता. तो या वाढदिवसाची कितीतरी दिवसांपासून वाट पाहत होता. तो खूप उत्सुक होता. असणारच ना, कारण हा वाढदिवस त्याच्यासाठी खूप खास होता....

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इश्क और अश्क By Aradhana

"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!"

"रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...

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हम फिर से मिले मगर इस तरह By MASHAALLHA KHAN

इंसान की किस्मत मे जो लिखा वो उसे मिलकर ही रहेता है, चाहे मौहब्बत हो या हो अश्क.ये कहानी है अरुण और रूपाली की जो कॉलेज मे मिले फिर अच्छे दोस्त बने , रूपाली जो अरुण से प्यार कर बैठी...

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यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी.

उन्हें कांदिव...

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कोंदण पर्व एक By Shabdbhramar

एक पाऊल दिसायचं स्वप्नात
अर्ध पाण्यात अर्ध रेतीच्या किनाऱ्यात
गोरी गुलाबी टाच.. अन
नाजूक चंदेरी पैंजण पाण्यावर लहरत असायचं...
पाण्याची लहर यायची पाऊल चढायची,
अन ओसरली कि,
सू...

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মহাভারতের কাহিনি By Ashoke Ghosh

  মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-১    প্রাককথন   সেইসব মানুষের সংখ্যা অত্যন্ত নগণ্য, যাঁরা বিশালাকার মহাগ্রন্থ মহাভারত সম্পূর্ণ পাঠ করেছেন। অধিকাংশ মানুষই মহাভারতের কিছু কিছু গল্প পড়েছেন,...

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આવો ભજવીએ By SUNIL ANJARIA

માંદગીમાંદગીપાત્રો: તુષાર (એક કિશોર)        1.લલિતભાઈ :  પિતા.        2.કલા બહેન  :   માતા        3.ઝમકુ        :   કામવાળી        4.પ્રવિણા      :   બહેન        5.ડોક્ટર.(પડદો બંધ...

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तोतया वारसदार By Dilip Bhide

त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...

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દક્ષિણ ભારત નો પ્રવાસ By Ankursinh Rajput

Day ૧બેંગ્લોરની સફર માટે આમ તો પરફેક્ટલિ રેડી જ હતા પણ એલાર્મ નું નોટ સો મધુર ધૂને મારા કાન ના કોષોની આત્માને થર્ડ ડિગ્રી ટોર્ચર કરી દીધું ને ઊભો થઈને તૈયાર થઈ ગયો, ઉબેર બુક કરીને...

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બેઇન્તેહા : નફરત અને પ્રેમ By Firdous

આર્ટ એન્ડ આર્કિટેક્ચર કંપનીમાં આજે સવારથી બધા એમ્પ્લોયની ભાગદોડ ચાલુ હતી, કારણ કે જે ક્લાયન્ટ ૧૪ દિવસ બાદ આવવાના હતા, તે અચાનક સોમવારે આવી જવાથી બધા એમ્પ્લોય પોત પોતાના કામ પર લાગી...

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