मैं सेवा निवृत अभियंता हूं। लेखक हूं और एक इन्सान हूं। जबतक मेरे हाथ में लेखनी है, सुविधाओं से बंचित समाज के लिए लिखता रहूंगा। साहित्य का मैं साधक हूं। यह मेरी कमाई का साधन नहीं।