मैं लक्ष्मी नारायण 'पन्ना', बचपन से ही कहानी और कविताओं में रुचि थी परन्तु साहित्य से कोई लगाव नही रहा, कारण कि इस क्षेत्र में जानकारी का अभाव और विषय की भिन्नता। लखनऊ शहर की आबो हवा और लखनऊ विश्वविद्द्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर कराने के पश्चात बेरोजगरी के दंस ने ज़िन्दगी के कई पहलुओं से रूबरू करा दिया, जो मेरे लेखन को धार दे गया।शुरुआत में बिना किसी जानकारी के शेरो शायरी और लघु कविताओं को लिखना शुरू किया।मुझे अपने लेखन के लिए प्रकाशक और समीक्षक की तलाश थी । प्रकाशक की तलाश तो मातृभारत

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