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-  यादों की सलेहगाह" - प्रकरण 92 नीला भी उस की जिंद...
बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन? शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सा...
एपिसोड 6: हवेली का पीछाअयान की वापसीरोहन के बलिदान के बाद अयान हवेली से बाहर निक...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 4: दिल्ली की वो लड़की, जिसे सपनों में हवेली...
Episode - 12 (दीवार और दरिंदगी का पर्दा) रात का सन्नाटा अस्पताल की उन पुरानी दीव...
Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling f...
दोहा:१७साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥कथा:...
Chapter 1 — पहली बारिश, पहला प्यारशाम धीरे-धीरे शहर पर उतर रही थी।आसमान बादलों स...
भाग 3अवनि ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से कदमों की आवाज़ आई और...
सुबह 9:10 बजे,ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के कारनामे, कब से आवाज...
आज थाने में बड़ा शोर था। एक मासूम सी,, लगभग 23 साल की एक औरत थी। "औरत तो क्या बोले वो उम्र से " एक लडकी ही थी। बदन पर पुरानी सी साड़ी और रंग साफ़,,,, मगर हाथ एक मजदूर क...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
पंद्रह दिन के हनीमून से वापिस घर लौटते हुए अधीर ने बीस दिन पहले सात फेरे लेने वाली पत्नी अवनी से बेड पर लेटे हुए गले में बाहें डालते हुए कहा- "अब तो शादी भी हो गई, हनीमून भी हो...
अब मान भी जाओ राधे ...!! राधा और देव कभी पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों के पारिवारिक सबंध भी बहुत अच्छे थे। दोनों के पापा बिजनेसमैन थे।. दोनों साथ में खेलते ,कभी लड़ाई करते तो कभी...
(1) लाइक एंड कॉमेंट्स रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...
"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..." यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...
एक ज़माना था… जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों से मापा जाता था। उस छोटे से कस्बे की सुबह बड़ी सादी होती थी। सूरज निकलता, चूल्हों में आग जलती, और गलियों में झाड...
रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थरों पर जोर से गिर रही थीं, और हर तरफ सिर्फ अंधेरा था।यह कहानी है २२ साल के आरव की, जो कुछ ही समय पहल...
रामू: जो खुद को बहुत समझदार मानता है। श्यामू: रामू का पड़ोसी, जो थोड़ा सीधा है लेकिन मौके पर चौका मारता है। बसंती चाची: मोहल्ले की "न्यूज़ चैनल"। इन्हें सबके घर की खबर होती...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
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