मेरा साहित्यिक परिचय : सच बताऊँ तो साहित्य के क्षेत्र में मेरा कोई नाम नहीं, कोई पहचान नहीं, एक लघु हस्ताक्षर के रूप में मैं शून्य से शुरू हो शून्य पर ही समाप्त हो जाता हूँ, जो भी मन मे आये लिख देता हूँ कविता, कहानी, राजनैतिक विश्लेषण जो भी मन मे आया लिख डाला कभी ये सोचा ही नहीं कि कोई पढ़ेगा भी की नहीं व्हाट्सअप या फेसबुक पर मित्रों को भेज देता हूँ आलोचना हो तो अवॉयड कर देता हूँ क्योंकि खुद को पसँद है तभी भेजा और प्रशंसा हो तो मन ही मन फूलकर कुप्पा हो जाता हूँ ।

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