Best Classic Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Classic Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Languages
Categories
Featured Books

The Kama Sutra - Part 1 - CHAPTER 4 By Mallanaga Vatsyayana

CHAPTER IV. THE LIFE OF A CITIZEN.Having thus acquired learning, a man, with the wealth that he may have gained by gift, conquest, purchase, deposit, or inheritance from his ancest...

Read Free

પ્રારંભ - 54 By Ashwin Rawal

પ્રારંભ પ્રકરણ 54રુચિએ કેતનને ડીનર પાર્ટી માટે પોતાના બંગલે બોલાવ્યો હતો અને એના માટે એણે સ્વાદિષ્ટ દાળઢોકળી બનાવી હતી. દાળઢોકળી કેતનની પ્રિય આઈટમ હતી એટલે દિલથી એનો રસાસ્વાદ માણતો...

Read Free

દરિયા નું મીઠું પાણી - 7 - પુત્રવધૂ By Binal Jay Thumbar

(સાચી ઘટના - નામ બદલાયેલા છે)" બાપુ, પ્રણામ.."પચીસ વર્ષના પુત્ર હમીરસિંહે પિતાનાં ચરણોમાં મસ્તક નમાવ્યું. સાથે ઉભેલી એની નવોઢા નું પાનેતર ઢાંકેલું માથું પણ આશીર્વાદની આશામાં ઝૂકી ગ...

Read Free

વરદાન કે અભિશાપ - ભાગ 7 By Payal Chavda

વરદાન કે અભિશાપ (ભાગ-૭) (વિશ્વરાજ નામે એક ગાદીપતિ હતા. ગાદીપતિ એટલે જેમના માથે દેવીશક્તિનો હાથ હોય અને જે પરિવારના મોભી હોય. વિશ્વરામના મોટા દીકરા ધનરાજે અલગ રહેવા જવાનું નકકી કર્ય...

Read Free

रहस्यमय अंधविश्वास: अंतिम सत्य की तलाश By Kali Hari

अर्जुन, नीलम और रूपेश की जीत के बाद, वे दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्णय लेते हैं। उन्होंने एक गुप्त स्थान पर गुफा चुनी है, जो अत्यंत मजबूत सुरक्षा प्रणाली से लदी हुई है।गुफा...

Read Free

THE SECRET WORLD OF DETECTIVE SHIVAY AND ADITI (Part-1) By vansh Prajapati ......vishesh ️

પહેલો કેશ - મિકીની શોધ (ફ્લેશબૅંક )અધૂરા શ્વાસ સાથે સાથે દોડી શકાતું ન હતું અને ધબકારા પણ વધી રહ્યા હતા,આંખોમાં જુનુન હતું સાથે -સાથે તેના કપાળમાં ડર જરાય લાગતો ન હતો.... લઘભગ 18 વ...

Read Free

રેવા By Jagruti Pandya

આજે નર્મદાશંકરનું મન ચકડોળે ચડ્યું હતું. તેમનાં ગુરુએ જ્યારે છેલ્લી દીક્ષા પરિવારમાંથી લેવાની વાત કરી હતી. નર્મદાશંકરને જમાતમાં આવ્યે પચાસ પચાસ વર્ષો વીતી ગયા છતાં પણ હજુ સુધી તેમન...

Read Free

कीर के उपवन की कली By DINESH KUMAR KEER

*कीर के उपवन की कली*भारत: -दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुनः अखंड बनाएंगे,गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनाएंगे। उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से, कमर कसें बलिदान करें,जो पाया उसमे...

Read Free

घुंघरू By Yogesh Kanava

घुंघरू आज ना जाने क्या हुआ था मुझे, वापस आ तो रहा था लेकिन लग रहा था कि कुछ ना कुछ पीछे छूट गया है। मैं जब गया था तो सोचा भी न था कि इस प्रकार से, इतनी बड़ी सौगात के साथ लौटूगाँ। मै...

Read Free

चेहरे के विपरीत चेहरा By Anant Dhish Aman

चेहरे के विपरीत चेहरा हाँ! घर से दूर बड़े महानगर में हूँ, हाँ बड़े महानगर में! देखे भी हो कभी या सिर्फ सुना और पढा हीं है। हाँ सच कह रहा हूँ महानगर में रहने आया हूँ पढने और खूब बड़ा इ...

Read Free

मुस्कान - दिल से बंधी एक डोर (भाग-2) By DINESH KUMAR KEER

रिश्तों की अहमियत.... ? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?""चुप रहो माँ" राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।फिर स्टोर रूम में पड़े सामान...

Read Free

परदेस में ज़िंदगी - भाग 2 By Ekta Vyas

कहानी:- परदेस मैं ज़िंदगी भाग - 2 अब तक आपने पढ़ा की किस प्रकार मितेश भाई के जीवन में उतार चढ़ाव आए और वो लोग हमेशा हमेशा के लिए विदेश चले गए। अब आगे विदेश का जीवन मितेश भाई के लिए...

Read Free

कोरड़ी By Yogesh Kanava

बरसाती बादलों के उमड़ आते ही पुरानी छोटे अक्सर सालती हैं । उनमें दर्द उभरता है , कुछ याद दिलाता है कि बचपन में लड़कपन में जो बार-बार पेड़ की डाल से कूदते थे , दीवार फान्दते जब अमिय...

Read Free

बूढ़ा बरगद By Yogesh Kanava

घूमने-फिरने का शौकीन संदेश आज फिर निकल गया था एक अनजानी सी डगर पर। घूमना-फिरना, नई से नई जगह देखना और उस जगह की पूरी जानकारी लेकर कुछ ना कुछ लिखना संदेश को बहुत ज्यादा पसंद था। वो...

Read Free

मुख्यधारा By Yogesh Kanava

बहुत दिनों से सन्देश कहीं जा नहीं पाया था। वो बस अपने ही कार्यालय की मारामारी में उलझा सा रह गया था। सन्देश जैसा घुम्मकड़ प्रवृति का व्यक्ति एक कुर्सी से बंधकर रह जाये तो उसके भीतर...

Read Free

सौगन्ध - (अन्तिम भाग) By Saroj Verma

मेरी बुआ ने,जो मेरे प्रसव के समय वहाँ उपस्थित थी,कन्या को जन्म देने के पश्चात मैं अचेत हो गई और जब सचेत हुई तो मुझे ये दुखभरी सूचना मिली...वसुन्धरा बोली.... तब भूकालेश्वर जी बोले.....

Read Free

और मैं वही का ककनूस हूं By Yogesh Kanava

बुझते हुए उजालों में दूर तक केवल धूल का ही राज लगता है दूर जहां आसमान धरती से आलिंगन करता जान पड़ रहा है और लाज की मारी धरती बस सुरमई हो गई सी लगती है पर यह गुबार उसे किस कदर मटमैल...

Read Free

बिसायती बाबा By Yogesh Kanava

पीठ पर गठरी लादे, सफेद ट्रीम की हुई दाढ़ी वाला बाबा महीने में एक बार उस गांव में आ ही जाता था। जब भी आता था गांवभर की औरतें उसे घेर लेती और अपनी-अपनी पसंद का सामान पूछती थी उससे। पू...

Read Free

आलू के परोंठे By Yogesh Kanava

मेरे हाथ आटे में सने थे, डोर बैल बार बार बज रही थी । मैने फंकी (हां मेरी बड़ी बेटी) को आवाज़ लगाई और दरवाज़े पर देखने के लिए कहा । वो अपने म्यूजिक में मस्त थी और उसे म्यूजिक सुनते समय...

Read Free

The Kama Sutra - Part 1 - CHAPTER 4 By Mallanaga Vatsyayana

CHAPTER IV. THE LIFE OF A CITIZEN.Having thus acquired learning, a man, with the wealth that he may have gained by gift, conquest, purchase, deposit, or inheritance from his ancest...

Read Free

પ્રારંભ - 54 By Ashwin Rawal

પ્રારંભ પ્રકરણ 54રુચિએ કેતનને ડીનર પાર્ટી માટે પોતાના બંગલે બોલાવ્યો હતો અને એના માટે એણે સ્વાદિષ્ટ દાળઢોકળી બનાવી હતી. દાળઢોકળી કેતનની પ્રિય આઈટમ હતી એટલે દિલથી એનો રસાસ્વાદ માણતો...

Read Free

દરિયા નું મીઠું પાણી - 7 - પુત્રવધૂ By Binal Jay Thumbar

(સાચી ઘટના - નામ બદલાયેલા છે)" બાપુ, પ્રણામ.."પચીસ વર્ષના પુત્ર હમીરસિંહે પિતાનાં ચરણોમાં મસ્તક નમાવ્યું. સાથે ઉભેલી એની નવોઢા નું પાનેતર ઢાંકેલું માથું પણ આશીર્વાદની આશામાં ઝૂકી ગ...

Read Free

વરદાન કે અભિશાપ - ભાગ 7 By Payal Chavda

વરદાન કે અભિશાપ (ભાગ-૭) (વિશ્વરાજ નામે એક ગાદીપતિ હતા. ગાદીપતિ એટલે જેમના માથે દેવીશક્તિનો હાથ હોય અને જે પરિવારના મોભી હોય. વિશ્વરામના મોટા દીકરા ધનરાજે અલગ રહેવા જવાનું નકકી કર્ય...

Read Free

रहस्यमय अंधविश्वास: अंतिम सत्य की तलाश By Kali Hari

अर्जुन, नीलम और रूपेश की जीत के बाद, वे दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्णय लेते हैं। उन्होंने एक गुप्त स्थान पर गुफा चुनी है, जो अत्यंत मजबूत सुरक्षा प्रणाली से लदी हुई है।गुफा...

Read Free

THE SECRET WORLD OF DETECTIVE SHIVAY AND ADITI (Part-1) By vansh Prajapati ......vishesh ️

પહેલો કેશ - મિકીની શોધ (ફ્લેશબૅંક )અધૂરા શ્વાસ સાથે સાથે દોડી શકાતું ન હતું અને ધબકારા પણ વધી રહ્યા હતા,આંખોમાં જુનુન હતું સાથે -સાથે તેના કપાળમાં ડર જરાય લાગતો ન હતો.... લઘભગ 18 વ...

Read Free

રેવા By Jagruti Pandya

આજે નર્મદાશંકરનું મન ચકડોળે ચડ્યું હતું. તેમનાં ગુરુએ જ્યારે છેલ્લી દીક્ષા પરિવારમાંથી લેવાની વાત કરી હતી. નર્મદાશંકરને જમાતમાં આવ્યે પચાસ પચાસ વર્ષો વીતી ગયા છતાં પણ હજુ સુધી તેમન...

Read Free

कीर के उपवन की कली By DINESH KUMAR KEER

*कीर के उपवन की कली*भारत: -दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुनः अखंड बनाएंगे,गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनाएंगे। उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से, कमर कसें बलिदान करें,जो पाया उसमे...

Read Free

घुंघरू By Yogesh Kanava

घुंघरू आज ना जाने क्या हुआ था मुझे, वापस आ तो रहा था लेकिन लग रहा था कि कुछ ना कुछ पीछे छूट गया है। मैं जब गया था तो सोचा भी न था कि इस प्रकार से, इतनी बड़ी सौगात के साथ लौटूगाँ। मै...

Read Free

चेहरे के विपरीत चेहरा By Anant Dhish Aman

चेहरे के विपरीत चेहरा हाँ! घर से दूर बड़े महानगर में हूँ, हाँ बड़े महानगर में! देखे भी हो कभी या सिर्फ सुना और पढा हीं है। हाँ सच कह रहा हूँ महानगर में रहने आया हूँ पढने और खूब बड़ा इ...

Read Free

मुस्कान - दिल से बंधी एक डोर (भाग-2) By DINESH KUMAR KEER

रिश्तों की अहमियत.... ? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?""चुप रहो माँ" राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।फिर स्टोर रूम में पड़े सामान...

Read Free

परदेस में ज़िंदगी - भाग 2 By Ekta Vyas

कहानी:- परदेस मैं ज़िंदगी भाग - 2 अब तक आपने पढ़ा की किस प्रकार मितेश भाई के जीवन में उतार चढ़ाव आए और वो लोग हमेशा हमेशा के लिए विदेश चले गए। अब आगे विदेश का जीवन मितेश भाई के लिए...

Read Free

कोरड़ी By Yogesh Kanava

बरसाती बादलों के उमड़ आते ही पुरानी छोटे अक्सर सालती हैं । उनमें दर्द उभरता है , कुछ याद दिलाता है कि बचपन में लड़कपन में जो बार-बार पेड़ की डाल से कूदते थे , दीवार फान्दते जब अमिय...

Read Free

बूढ़ा बरगद By Yogesh Kanava

घूमने-फिरने का शौकीन संदेश आज फिर निकल गया था एक अनजानी सी डगर पर। घूमना-फिरना, नई से नई जगह देखना और उस जगह की पूरी जानकारी लेकर कुछ ना कुछ लिखना संदेश को बहुत ज्यादा पसंद था। वो...

Read Free

मुख्यधारा By Yogesh Kanava

बहुत दिनों से सन्देश कहीं जा नहीं पाया था। वो बस अपने ही कार्यालय की मारामारी में उलझा सा रह गया था। सन्देश जैसा घुम्मकड़ प्रवृति का व्यक्ति एक कुर्सी से बंधकर रह जाये तो उसके भीतर...

Read Free

सौगन्ध - (अन्तिम भाग) By Saroj Verma

मेरी बुआ ने,जो मेरे प्रसव के समय वहाँ उपस्थित थी,कन्या को जन्म देने के पश्चात मैं अचेत हो गई और जब सचेत हुई तो मुझे ये दुखभरी सूचना मिली...वसुन्धरा बोली.... तब भूकालेश्वर जी बोले.....

Read Free

और मैं वही का ककनूस हूं By Yogesh Kanava

बुझते हुए उजालों में दूर तक केवल धूल का ही राज लगता है दूर जहां आसमान धरती से आलिंगन करता जान पड़ रहा है और लाज की मारी धरती बस सुरमई हो गई सी लगती है पर यह गुबार उसे किस कदर मटमैल...

Read Free

बिसायती बाबा By Yogesh Kanava

पीठ पर गठरी लादे, सफेद ट्रीम की हुई दाढ़ी वाला बाबा महीने में एक बार उस गांव में आ ही जाता था। जब भी आता था गांवभर की औरतें उसे घेर लेती और अपनी-अपनी पसंद का सामान पूछती थी उससे। पू...

Read Free

आलू के परोंठे By Yogesh Kanava

मेरे हाथ आटे में सने थे, डोर बैल बार बार बज रही थी । मैने फंकी (हां मेरी बड़ी बेटी) को आवाज़ लगाई और दरवाज़े पर देखने के लिए कहा । वो अपने म्यूजिक में मस्त थी और उसे म्यूजिक सुनते समय...

Read Free