Best Children Stories stories in hindi read and download free PDF

निडर - 5
by Asha Saraswat
  • 459

         कहानी अब तक       गट्टू भाई राजा से मिलते हैं । राजा उनकी बात सुनने के लिए दरबार में लेकर आते हैं और अपने ...

स्कूल की खिड़की
by Lalit Rathod
  • 723

स्कूल पहले अस्पताल हुआ करता था, जिसे बाद में पढ़ने का कक्ष बनाया गया। कुछ लोगों का कहना था की यह कमरा अंग्रेज समय का बना हुआ था। यहां ...

निडर - 4
by Asha Saraswat
  • 405

    कहानी अब तक    राजा राज दरबार के बाहर आकर गट्टू भाई के द्वारा अपने सैनिकों की दुर्दशा को देखते है।       अब आगे      राजा थोड़ी देर ...

निडर - 3
by Asha Saraswat
  • 738

     कहानी अब तक       गट्टू भाई राजा से लड़ने चले। रास्ते में ऑंधी तूफ़ान, वर्षा, चींटी मधु मक्खी एवं धुआँ मिले ।उन सब के अनुरोध पर वह उन ...

निडर - 2
by Asha Saraswat
  • 729

      कहानी अब तक    राजा से हल बैल लाने का गट्टू भाई निश्चय कर लेता है।         अब आगे     गट्टू भाई खेत में ...

निडर - 1
by Asha Saraswat
  • 1.1k

       यह कहानी बहुत छोटी है, परंतु इससे सीख बहुत बड़ी मिलती है ।    आत्मविश्वास एवं कर्मठता की सीख मिलती है, निडरता की सीख मिलती है ...

डरावना ख्वाब
by Salim Choudhary
  • 2k

आज ईद की चाँद रात है और कल ईद है हम सब बच्चे कल के लिए बहुत ही ज्यादा खुश है हम  लोग इफ्तारी के बाद ईद का चाँद ...

नकलची मोनू
by RACHNA ROY
  • 2.4k

मोनू ग्यारह साल का है और कक्षा सात का छात्र है। मोनू में एक खराब आदत है वह सबकी नकल किया करता है। चाहें वो बड़ा हो या छोटा। ...

छिपी हुई मदद
by Sandeep Shrivastava
  • 1.5k

रघुवन में एक दिन सुबह होते ही एक आदमी और एक छोटी बच्चे प्रवेश करे | दोनों इधर उधर कुछ खोज रहे थे | दोनों कुछ परेशान लग रहे ...

दोस्ती मिलन
by Vishnu Dabhi
  • 1.4k

            ऊंचे पहाड़ और वहां से निकल हुई नदिया, बड़े बड़े पेड़ , पौधे से भरा एक जंगल था| पक्षी ओ की मधुर संगीत ...

प्रकृति की संतान
by Sandeep Shrivastava
  • 1.4k

कूकी कोयल सारे रघुवन में बड़ी चिंता में यहाँ वहां घूम रही थी | कभी इस पेड़ तो कभी उस पेड़ पे उड़ती बैठती थी | फिर एक घने ...

तोता और आम
by Abhinav Bajpai
  • 1.7k

आंख खुली तो मैं चारपाई पर लेटा हुआ था। और मेरे चारों तरफ परिवार वाले मुझे घेर कर बैठे हुए थे, बाई तरफ चारपाई पर दादी बैठी सिर पर ...

ज़ेब्रा क्रासिंग
by Sandeep Shrivastava
  • 891

"रघुवन में दोपहर का समय था| झबरु ज़ेब्रा झाडिओं के बीच मजे से हरी हरी घास चर रहा था | टोनू तोता उसकी पीठ पे बैठा, अपनी चोंच से ...

कर्मफल
by Asha Saraswat
  • 1.7k

       खेत में गेहूं काटने का समय था ।प्रतिदिन खेतों में किसान गेहूं काटते और इकट्ठे करके खेत में ही रख दिया करते ।जब खेत में गेहूं पड़े ...

शाकाहारी शेर
by Sandeep Shrivastava
  • 2.6k

रघुवन के शेर, शेरसिंह का आजकल हाल बहुत बुरा था| एक तो बढ़ती आयु के कारण पहले जैसी चुस्ती फुर्ती नहीं रही, दूसरे एक दिन शिकार करते हुए उसके ...

नमक का क़र्ज़
by Sandeep Shrivastava
  • 1.2k

रघुवन में नदी किनारे दो पदयात्री,अपना भोजन करने के लिए बैठे थे| उनके पास भोजन से भरा हुआ एक डिब्बा था| जैसे ही उनमें से एक ने वो डिब्बा ...

शुभि (10) अंतिम भाग
by Asha Saraswat
  • 1.3k

शुभि  अंतिम भाग            प्रार्थना में प्रधानाध्यापक जी ने बताया कि आज से तीन दिन का स्काउट शिविर लगेगा, जिन बच्चों के नाम बोले जा रहे ...

अन्तरिक्ष में पाखी
by RACHNA ROY
  • 1.5k

पाखी एक बड़ी ही प्यारी सी चंचल लड़की थी। अपने मम्मी पापा की सबसे प्यारी बेटी। इकलौती संतान थी पर कभी कोई नखरे नहीं थे पाखी के। अपने ही ...

मीठे अंगूर - खट्टे अंगूर
by Sandeep Shrivastava
  • 1.9k

रघुवन की छोटी पहाड़ी पर जो फूलों की बगिया है, उस पर पेड़ोंपर अंगूर के रसीले गुच्छे लगे हुए थे।अंगूर खाने के लालच में उधर कई जानवरों का आना ...

मित्रता का कर्त्तव्य
by Sandeep Shrivastava
  • 1.8k

रघुवन के दो बंदर, सोनू और मोनू बहुत अच्छे मित्र थे | दोनों हमेशा साथ साथ रहते थे| उनका खाना पीना, घूमना फिरना, सोना जागना सब साथ में ही ...

शुभि (9)
by Asha Saraswat
  • 1.3k

        शुभि (9)       आज शुभि का मन बहुत ख़राब था ,पढ़ाई में भी उसका बिलकुल मन नहीं लगा ।बार-बार उसकी ऑंखें ऑंसुओं से गीली ...

दानी की कहानी - 4 - मूल से प्यारा ब्याज़
by Pranava Bharti
  • 1.5k

दानी की कहानी(मूल से प्यारा ब्याज़ ) --------------------------------     समय के गुजरने के साथ दानी हमें तो और भी सचेत लगती हैं | मम्मी कहती हैं ; "हमने ...

सोहबत
by padma sharma
  • 939

सोहबत पिताजी की आवाज नीरवता को भंग करती चली गई। वे जोर से चिल्ला रहे थे-"क्या कहा, तू आगे नहीं पढ़ेगा ? पढ़ेगा नहीं तो और क्या करेगा? तू ...

जुर्रत
by padma sharma
  • 921

जुर्रत कोठी कैम्पस का सन्नाटा बच्चों के शोरगुल से टूट गया। सारे बच्चे मजे करने के लिए कोठी की चहारदीवारी फांद के भीतर जा पहुँचे थेबच्चों की छुट्टियों के ...

मोर पंख
by Sandeep Shrivastava
  • 1.7k

 रघुवन के मेरु मोर को जबसे पता चला है कि वो भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है तब से उसके स्वभाव की अकड़न कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी।हर ...

शुभि (8)
by Asha Saraswat
  • 1.3k

    शुभि (8)        दादी जी..दादी जी..बाहर से आवाज़ आ रही थी शुभि ने बाहर जाकर देखा तो सुभाष भैया दरवाज़े पर खड़े थे ।भैया के ...

तहजीब
by padma sharma
  • 1.6k

तहजीब शहर के प्रसिद्ध सिनेमा हॉल के सामने भीड़ जमा थी। सम्पूर्ण देशवासियों के प्रतीक के रूप में हर वर्ग, हर पेशे तथा हर धर्म के लोग यहाँ उपस्थित ...

भ्रम का भूत
by Asha Saraswat
  • 1.4k

          भ्रम का भूत     सीमा का घर गली के अंत में था। जब कभी भी बिजली गुल हो जाती तो घर में बहुत गर्मी ...

भगवान की लाठी
by Sandeep Shrivastava
  • 2.1k

“भगवान की लाठी “रघुवन में कीटु लकड़बग्घा की धृष्टता प्रतिदिन बढ़ती जा रहीं थीं। धृष्टता क्या, सच कहें तो अपराध बढ़ते जा रहे थे। दूसरों को हानि पहुंचा कर ...

जीवन का मूलमंत्र
by padma sharma
  • 1k

जीवन का मूलमंत्र "ट्यूशन की फीस तो इतनी लेते हैं लेकिन स्कूल की तरह यहाँ भी न तो पूरा कोर्स कराते, न हरेक को ठीक से समझाते हैं।" गुंजन ...