Best Classic Stories stories in hindi read and download free PDF

खुशबुएं पकड़ में कहां आती हैं
by Prabodh Kumar Govil
  • 324

उसे पक्का यकीन हो गया कि भावनाएं कहीं नहीं पहुंचतीं। वह कोई अन्तर्यामी तो है नहीं, पहुंचती भी होंगी, पर इतना वह ज़रूर कह सकता है कि भावनाओं की ...

धुस - कुटुस
by Prabodh Kumar Govil
  • 252

"धुस- कुटुस" तहलका मच गया। ये तो सोने पर सुहागा ही था कि एक ओर जहां विश्व नीड़म विद्यानिकेतन का स्वर्ण जयंती समारोह मनाए जाने की घोषणा ज़ोर- शोर ...

विभीषिका
by rajendra shrivastava
  • 495

लघु-कथा-- विभीषिका                                                       ...

मातृत्व
by Sangeeta Gupta
  • (11)
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 "आंती,हमाली बोल दे दो " गुलाब की क्यारी गोड़ते हुए सुरभि ने पीछे पलटकर देखा। मेहंदी की बाढ़ के टूटे हुए पैबंद से एक गोरा चिट्टा बच्चा लाल स्वेटर पहने, ...

स्थायित्व
by Ramnarayan Sungariya
  • 429

कहानी--                                स्थायित्व                          आर। एन। सुनगरया                   '' हॉं कमलेश मैं इतना टूट चुका हूँ ..... इसलिए ....... बस अब पथराई औखों और अक्रशील बैठे ...

पागल-ए-इश्क़ - (पार्ट -4)
by Deepak Bundela AryMoulik
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कंटीन्यू पार्ट -4महक की कार तेज गती से घर की तरफ दौड़े जा रही थी.. महक पीछे की सीट पर बैठी बैठी सोच रही थी.. कि रेनू को जरूर ...

हरी चूड़ियाँ
by राजेश ओझा
  • (13)
  • 933

   शब्बीर चच्चा आज जैसे बाजार से घर आये..बच्चों ने रोज की तरह घेर लिया..'मेरे लिये क्या है-मेरे लिये क्या है' रोज की तरह थैले को खींचने की होड़ ...

दिल की दौलत
by Ramnarayan Sungariya
  • 792

कहानी       दिल की दौलत                      आर. एन. सुनगरया,                         मैं बहुत खुश दिख रही हूँ, इसलिये नहीं कि आज मेरी ...

बचपन की यादें - 3
by Bhupendra Dongriyal
  • 684

               (3)        हर दिन की तरह स्कूल की छुट्टी होने पर हर एक गाँव के बच्चे अपनी-अपनी टोलियाँ बना कर ...

नो झगड़ा नो लाइफ
by r k lal
  • (15)
  • 1.4k

नो झगड़ा नो लाइफ आर ० के ० लाल              रात के दस बज रहे थे। सचिन अभी अभी काम से लौटा था। सचिन की पत्नी वर्षा बड़े ...

बचपन की यादें - 2
by Bhupendra Dongriyal
  • 651

                             (२)       राजेश और मैं एक ही कक्षा में पढ़ते थे । अब राजेश ने अपने ...

गंधैला
by राजेश ओझा
  • 789

रमेसर तिवारी जमींदार खानदान से थे..जमींदारी उन्मूलन भले हो गयी हो पर 'मुई हाथी तौ सवाव लाख' वाली बात उनपर फिट बैठ रही थी..बड़ा सा दो मंजिला मकान था..क्षेत्र ...

बचपन की यादें - 1
by Bhupendra Dongriyal
  • 822

                             (१)         जब मैं छोटा बच्चा था,मैं भी स्कूल जाता था। तब ...

अंत भला तो सब भला
by Rama Sharma Manavi
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   राधिका के मोबाइल की घण्टी बजती है, देखा तो कोई नया नम्बर था।पुनः बजने पर फोन उठा लिया, हैलो करने पर उधर से चहकती हुई आवाज आई,राधिका कैसी ...

हर बार वो
by Afzal Malla
  • 696

हर बार वो (कहानी नही है ये है सच्चाई)हर बार वो पल्लू क्यों संभालेतुम कभी अपनी नजरे संभाल लोहर बार वोही घर क्यों संभालेकभी तुम हाथ बटा लिया कारोहर ...

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों
by r k lal
  • 686

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों आर 0 के0 लाल                                       मुझे अगर कोई कठिन काम लगता था  तो वह बच्चों को  कहानी सुनाना था। मैं बड़ा ...

कोरा कागज
by Sunita Agarwal
  • 1.3k

बारिश थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी।आकाश में बिजली चमक रही थी,बादल गरज रहे थे।शाहीन ने घड़ी पर नजर डाली तो देखा रात के बारह बज ...

नैसर्गिक सुख
by ramnarayan sungaria
  • 440

लघु कथा--                                                        ...

चार बीघा खेत
by राजेश ओझा
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  • 1.6k

दल थम्हन शुकुल ने जैसे ही जलेबी को दही में लपेटा था कि मोबाइल बज उठी..अनमने होकर जलेबी को दोने में रखा और मोबाइल निकाला..अन्दाजा सही निकला..फोन बड़े बेटे ...

कन्यादान
by Sunita Agarwal
  • 1.3k

सहेलियों से घिरी हुई अवनी दुल्हन के लाल जोड़े में बेहद  खूबसूरत लग रही है।उसकी सखियाँ हँसी ठिठोली कर रही हैं। "देखो अवनी के हाथों में मेंहदी कितनी गहरी ...

बेहया के फूल
by राजेश ओझा
  • (12)
  • 1.4k

 'सुनिए, आप जहां भी हैं, वहां से जल्दी आ जाइए!' फोन पर पत्नी वैदेही की अकुलाहट भरी आवाज़ सुनकर मनोहर चौंक गए। पूछने पर पता चला कि मंजू का ...

अग्नि परीक्षा
by Rekha Pancholi
  • 958

जय श्री राम !जय श्री राम !का उद्घोष, सिंधु की उत्तंग लहरों से टकराकर स्वर्ण नगरी में फैल गया । यह संदेश था, जो सांझ  के धुंधलके में इस सन्नाटे ...

सलोनी का फोन
by राजेश ओझा
  • (13)
  • 1.5k

आज होली के त्योहार में जहां सब मगन थे वहीं महंगू का चित्त खोया खोया था..महंगू की दुलहिन अंदाजा लगा तो रहीं थीं पर एक अन्जाने भय से कांप ...

First - एक अनोखा रक्षाबंधन
by Vishal
  • 563

कहानी शुरू होता है छोटे से बच्चे से जिसकी उम्र लगभग 7-8 साल का है,और वो घर में अकेले टीवी पर कार्टून देख रहा है और वो अपनी दुनिया ...

इच्छापूर्ति
by Monty Khandelwal
  • 750

एक शहर था जहां पर बहुत ही अमीर  व्यक्ति रहता था जिसके पास खूब सारी गाड़ियां बंगले और कई फैक्ट्रिया थी हर तरह से वह धनवान था ना किसी ...

एक लड़की भीगी भागी सी...
by Swati Solanki Shahiba
  • 769

मुंबई की बारिश। यार इस बारिश में तो यहां मुंबई में रहना मुश्किल कर दिया। ओह नो !!तुझे भी अभी टूटना था अपनी चप्पल की ओर देखते हुए ,अफसोस ...

ममता की छाँव - 3
by Sarita Sharma
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  • 1.2k

मौली अपनी माँ को खो चुकी थी। हालांकि उसका इसपर विस्वास कर पाना मुश्किल था, क्योंकि अभी कल की ही तो बात थी, जब वह मां के मना करने ...

उस एक सुबह के बाद
by राजेश ओझा
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  • 1.5k

रमा सारे काम निपटा कर बैठी ही थी कि मोबाइल बज उठा..स्क्रीन पर विटिया दीपाली का नम्बर चमक रहा था..हौले से फोन उठाया"हां बेटा..! हलो..""मम्मी अखिलेश अंकल को कल ...

ऑनलाइन क्लास की टेंशन
by r k lal
  • (17)
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ऑनलाइन क्लास की टेंशन आर ० के ० लाल                       अनु और मौली दो सगी बहने लखनऊ के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ती हैं। अनु कक्षा तीन ...

वह सब जो मैंने कहा
by VIRENDER VEER MEHTA
  • 1.2k

                     आज 'लोकल' में भीड़ नहीं थी। ऐसा कम ही होता है, मेरे आस पास भी केवल तीन लोग ही ...