Best Classic Stories stories in hindi read and download free PDF

लकीर का फ़क़ीर
by राज कुमार कांदु
  • 150

दफ्तर से निकल कर दीपक बस स्टॉप की तरफ धीरे धीरे बढ़ रहा था कि उसके फोन की घंटी बज उठी। जेब से इयरफोन निकालकर उसने कान से लगाया ...

विष कन्या - 36
by Bhumika
  • (14)
  • 348

       आगे हमने देखा की, महाराज तेजप्रताप से विष कन्या के विषय में पूछते हे पर तेजप्रताप अट्टहास करता है और कहेता है की मेरा शीश धड़ ...

मोक्ष
by Pratap Singh
  • 201

    आस-पास के चालीस गावों के सबसे बड़े जमींदार उदय प्रताप के यहां बहुत बड़ा यज्ञ हो रहा था।। बाहर से आये स्वामी जी यज्ञ के बाद कथा ...

विष कन्या - 35
by Bhumika
  • (16)
  • 888

              आगे हमने देखा की, तेजप्रताप बताता हे की केसे उसने इस राज्य के सैनिक को अपने साथ षडयंत्र में सम्मिलित करके राजकुमारी को ...

विष कन्या - 34
by Bhumika
  • (14)
  • 849

       आगे हमने देखा की, तेजप्रताप स्वीकार करता हे की, उसने महाराज इंद्रवर्मा के विरुद्ध षडयंत्र रचा हे। सबके पूछने पर वो कारण बताता है की, उसकी ...

विष कन्या - 33
by Bhumika
  • (17)
  • 993

       आगे हमने देखा की,राजकुमारी अब ठीक होने लगी है। एक दिन लावण्या को महाराज के कक्ष में उपस्थित होने का संदेश मिलता है। जब को वहां ...

विष कन्या - 32
by Bhumika
  • (15)
  • 876

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय को याद करके वृषाली चिंतित हे, तभी सारिका और लावण्या कक्ष में चौसर लेके आते हे। वृषाली को चौसर देखकर चारूलता ...

विष कन्या - 31
by Bhumika
  • (13)
  • 1.1k

       आगे हमने देखा की, रात्रि का समय है, बाहर बिन मौसम  वर्षा हो रही है। महाराज राजगुरु के कक्ष में जाकर मृत्युंजय के विषय में पूछते ...

विष कन्या - 30
by Bhumika
  • (14)
  • 996

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय राजकुमारी कि जिम्मेदारी लावण्या को सौंपता है और उनके सिवा किसी को भी राजकुमारी के कक्ष में प्रवेश ने न दे ...

पिता की खोज
by राज कुमार कांदु
  • 813

" आज तो तुम्हें बताना ही पड़ेगा अम्मी... कौन हैं मेरे अब्बू ? क्या नाम है उनका ? कहाँ रहते हैं ?.. और तुम अकेले क्यों रहती हो ?"  ...

विष कन्या - 29
by Bhumika
  • (13)
  • 1.2k

       आगे हमने देखा की, राजकुमारी वृषाली अब धीरे धीरे धीरे स्वस्थ होने लगी है। लावण्या, सारिका, मृत्युंजय, भुजंगा ओर कुमार निकुंभ सब समान उम्र के हे ...

विष कन्या - 28
by Bhumika
  • (12)
  • 1.5k

        आगे हमने देखा की, सब अपनी सैया में सोने का प्रयत्न कर रहे हैं, किंतु सबके मस्तिष्क में अपने अपने प्रश्न चल रहे हैं। प्रातः ...

संयोग-मुराद मन की - 1
by किशनलाल शर्मा
  • 819

या हू-------पहला लिफाफा खोलते ही उसमे से पत्र के साथ निकले फोटो को देखकर  अनुराग  खुशी से उछल पड़ा।"क्या हुआ बेटा?" अनुराग की आवाज सुनकर उसकी मां कमरे में ...

विष कन्या - 27
by Bhumika
  • (20)
  • 1.2k

       आगे हमने देखा की, राजकुमारी वृषाली मूर्छा से बाहर आ गई हैं। सब लोग यह देखकर खुश हे। तभी ये पता चलता हे की वो चल ...

विष कन्या - 26
by Bhumika
  • (20)
  • 1.4k

       आगे हमने देखा की, राजगुरु और सेनापति मृत्युंजय से मिलने उसके कक्ष में जाते है। दोनो राजमहल में होनेवाले षडयंत्र के विषय में जानने केलिए उत्सुक ...

हारने से पहले
by Poonam Gujrani Surat
  • 876

कहानीहारने से पहले टिप....टिप.... टिप.....टपकती हुई गुल्कोज की बूंदें पिछले चार दिनों से लगातार मेरे शरीर में प्रवेश कर रही थी। इसके अलावा जाने कितनी दवाइयां, इंजेक्शन, विटामिन, प्रोटिन ...

विष कन्या - 25
by Bhumika
  • (21)
  • 1.8k

       आगे हमने देखा की, सेनापति राजगुरु को मृत्युंजय का संदेश देते है और राजगुरु राजमहल पधारते है। दर्पण के सामने बैठी लावण्या कहीं खोई हुई है, ...

दूरी क्यों--दाम्पत्य प्रेम
by किशनलाल शर्मा
  • 1.1k

प्लेटफार्म एक के अंतिम छोर पर खाली पड़ी बैंच पर वह आकर बैठ गया।जून का महीना।सूरज ढल चुका था।आसमान एकदम साफ था।शाम भी अपनी अंतिम अवस्था की ओर बढ़ ...

उनींदा सा एक दिन
by Abhinav Bajpai
  • 759

सुकेश जब चार दिनों बाद घर पहुंचा तो वह दिन समाप्त हो चुके थे, रुई से हल्के दिन... उन चार दिनों के बाद उसके मन में घर पहुंचने की ...

विष कन्या - 24
by Bhumika
  • (15)
  • 1.6k

       आगे हमने देखा के मध्य रात्रि लावण्या की नींद टूट जाती है और वो कक्ष से बाहर टहल ने केलिए निकलती है। अचानक उसकी नजर महल ...

विष कन्या - 23
by Bhumika
  • (19)
  • 1.5k

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय और लावण्या अच्छे मित्र बन जाते है। निकुंभ भी मृत्युंजय के आगे मित्रता का प्रस्ताव रखता है और उन दोनो के ...

विष कन्या - 22
by Bhumika
  • (22)
  • 1.7k

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय और लावण्या जब प्रातः राजकुमारी के कक्ष में पहुंचते हे तब वहां महाराज पहले से ही उपस्थित होते हे। वो दोनो ...

कागज के फूल
by राज कुमार कांदु
  • 1k

          कमजोर, कृषकाय अमर कार की अगली सीट पर बैठा न जाने किस ख्याल में गुम था कि अचानक कार को एक हल्का सा झटका ...

उदास इंद्रधनुष - 4
by Amrita Sinha
  • 747

भीतर घुसते ही ब्रीफ़केस को सोफ़े पर रखा और बोले बस फ़्रेश होकर आता हूँ बहुत थक गया हूँ । नींद भी पूरी नहीं हुई है,इसीलिए मैं सोच रहा ...

विष कन्या - 21
by Bhumika
  • (17)
  • 1.9k

           आगे हमने देखा की, राजकुमारी के शरीर में चेतना का संचार हुआ है। मृत्युंजय कोशिश कर रहा हे की राजकुमारी के शरीर को ऊर्जा ...

उदास इंद्रधनुष - 3
by Amrita Sinha
  • 705

खा- पीकर जब तक हम लोग तो मैदान में गुड्डी (पतंग) उड़ाने पहुँचे तब तक मोहल्ले के कई बच्चे अपनी पतंगों को आसमान में लहरा रहे थे। जनवरी की ...

उदास इंद्रधनुष - 2
by Amrita Sinha
  • 924

फ़ोन डिसकनेक्ट हो चुका था।कोमल चुपचाप अपने कमरे में लौट आई और बिस्तर पर निढाल लेट गई । बत्ती बंद करने का उसका मनन हुआ, रात गहराने लगी थी पर उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। सीलिंग फ़ैन के चलने की आवाज़ कमरे के खालीपन को भर रही थीऔर कोमल की यादों के फाहों 

विष कन्या - 20
by Bhumika
  • (15)
  • 1.8k

       आगे हमने देखा की, राजगुरु सौमित्र कुछ समय पश्चात गुरुकुल से राजमहल पधारे हैं। महाराज उनके साथ वार्तालाप कर रहे ही तभी  वहां मृत्युंजय आता है। ...

मैं वेश्या हूँ...
by राज कुमार कांदु
  • 1.5k

हाँ ! तुमने ठीक कहा ! मैं वेश्या हूँ ! लेकिन क्या कभी तुमने यह भी सोचा है कि हम लड़कियाँ वेश्या क्यों बनती हैं ? नहीं न ! ...

College Life
by Atul Baghresh
  • 1k

किसी मंज़िल की फिकर नहीं थीफ़ीकार करने की उम्र नहीं थीयाद है वो सुबहजीस दिन कॉलेज का पहला दिन तकहुश भी थ, सेहमे भी थेनही पता था इस अन्जान ...