Best Classic Stories stories in hindi read and download free PDF

उदास इंद्रधनुष - 4
by Amrita Sinha
  • 135

भीतर घुसते ही ब्रीफ़केस को सोफ़े पर रखा और बोले बस फ़्रेश होकर आता हूँ बहुत थक गया हूँ । नींद भी पूरी नहीं हुई है,इसीलिए मैं सोच रहा ...

विष कन्या - 21
by Bhumika
  • (11)
  • 621

           आगे हमने देखा की, राजकुमारी के शरीर में चेतना का संचार हुआ है। मृत्युंजय कोशिश कर रहा हे की राजकुमारी के शरीर को ऊर्जा ...

उदास इंद्रधनुष - 3
by Amrita Sinha
  • 159

खा- पीकर जब तक हम लोग तो मैदान में गुड्डी (पतंग) उड़ाने पहुँचे तब तक मोहल्ले के कई बच्चे अपनी पतंगों को आसमान में लहरा रहे थे। जनवरी की ...

उदास इंद्रधनुष - 2
by Amrita Sinha
  • 231

फ़ोन डिसकनेक्ट हो चुका था।कोमल चुपचाप अपने कमरे में लौट आई और बिस्तर पर निढाल लेट गई । बत्ती बंद करने का उसका मनन हुआ, रात गहराने लगी थी पर उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। सीलिंग फ़ैन के चलने की आवाज़ कमरे के खालीपन को भर रही थीऔर कोमल की यादों के फाहों 

विष कन्या - 20
by Bhumika
  • (13)
  • 855

       आगे हमने देखा की, राजगुरु सौमित्र कुछ समय पश्चात गुरुकुल से राजमहल पधारे हैं। महाराज उनके साथ वार्तालाप कर रहे ही तभी  वहां मृत्युंजय आता है। ...

मैं वेश्या हूँ...
by राज कुमार कांदु
  • 867

हाँ ! तुमने ठीक कहा ! मैं वेश्या हूँ ! लेकिन क्या कभी तुमने यह भी सोचा है कि हम लड़कियाँ वेश्या क्यों बनती हैं ? नहीं न ! ...

College Life
by Atul Baghresh
  • 297

किसी मंज़िल की फिकर नहीं थीफ़ीकार करने की उम्र नहीं थीयाद है वो सुबहजीस दिन कॉलेज का पहला दिन तकहुश भी थ, सेहमे भी थेनही पता था इस अन्जान ...

विष कन्या - 19
by Bhumika
  • (17)
  • 831

       आगे हमने देखा की, लावण्या मध्याह्न के समय अपने कक्ष के जरूखे में खड़ी है। जब सारिका पूछती हे की वो किस विषय में सोच विचार ...

सलीब अपना-अपना
by Amrita Sinha
  • 888

सलीब अपना अपनापरीक्षाएँ ख़त्म कर घर में यूँही बेकार बैठना अच्छा नहीं लग रहा था मीता को । घर बैठे - बैठे ऊब रही थी कि माँ ने सुझाया कि क्यों नहीं वह पेंटिंग का एक क्रैश कोर्स जॉइन कर ले । मीता की सहेलियों ने भी कोई न कोई कोर्स ज्वाइन कर लिया था और मीता को 

विष कन्या - 18
by Bhumika
  • 822

       आगे हमने देखा की, लावण्या को औषधि पिसते हुए देखकर मृत्युंजय कहता हे की इतने कोमल हाथ में ये पत्थर का सिलबट्टा शोभा नही देता। लावण्या ...

एक अजनबी से मुलाकात
by Atul Baghresh
  • 528

रोज़ की तरह में वाक करनेघर से पार्क के लिए निकल रहा ताहीड्फोने उठए, शूज पेह्नेओर निकल गया घर स।तोडे देर पार्क में वाक करने के बादमे अपनी जगह ...

इस्तीफ़ा
by Amrita Sinha
  • 951

कहानी             —- इस्तीफ़ा——           अमृता सिन्हा जबसे सिस्टर जूही स्कूल की प्रिंसिपल बनकर आयी हैं तब से पूरे स्टाफ़ रूम में हड़कंप मचा रहता है। स्कूल में अनुशासन  पहले भी थापर इन दिनों उनकी तरफ़ से  कई नए नियम लागू कर दिए गए हैं जिसके कारण पूरे दिन 

विष कन्या - 17
by Bhumika
  • (12)
  • 846

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय सुबह सुबह राजकुमारी वृषाली के कक्ष में पहुंचता है और महाराज निंद्रा से जागते है। मृत्युंजय शुभ प्रभात कहकर उनका अभिवादन ...

विश्वासघात--भाग(१२)
by Saroj Verma
  • 1.1k

लीला और विजय की खबर सुनकर शक्तिसिंह जी की आँखों से आँसू बह निकलें, उनका मन व्याकुल हो उठा अपने नन्हें को देखने के लिए और उन्होंने प्रदीप से ...

विश्वासघात--भाग(११)
by Saroj Verma
  • 1.1k

शाम हुई ,मधु के जन्मदिन के लिए  प्रदीप फूलों का गुलदस्ता लेकर सुनहरी चौक पहुँच गया और मधु की सहेली वीना की मोटर का इंतज़ार करने लगा,कुछ देर के ...

विश्वासघात--भाग(१०)
by Saroj Verma
  • 1k

साधना ने अपनी बेटी मधु से कहा कि पढ़ाई में ध्यान लगाएंगी तो काम आएगा,ये क्या किसी से जरा सी बहस हो गई तो तू उससे बदला लेने पर ...

शुक्रिया दोस्त
by Atul Baghresh
  • 825

शुक्रिया मुझे वो ज़िन्दगी के सबसे हसीं पल देने के लिए शुक्रिया मेरी परेशानी को खुद की तकलीफ मान कर अपने सर लेने के लिए शुक्रिया उन मस्तियो के ...

वापसी
by Amrita Sinha
  • 1.2k

                               वापसी ————।                               ...

विश्वासघात--भाग(९)
by Saroj Verma
  • 1k

दयाशंकर की बात सुनकर जमींदार शक्तिसिंह कुछ सोच समझकर बोले____        अगर ये ही वो नटराज है तो इससे टकराना तो आसान ना होगा,क्योंकि ये तो अब बहुत बड़ा ...

विश्वासघात--भाग(८)
by Saroj Verma
  • 1.2k

और उधर संदीप और प्रदीप के कमरे पर___   क्या हुआ भइया! आप अभी तक गए नहीं है,प्रदीप ने पूछा।। हाँ,आज जरा कचहरी जाना है, सर ने बुलाया था ...

विष कन्या - 16
by Bhumika
  • (15)
  • 1.1k

       आगे हमने देखा की, मृत्युंजय अपने कक्ष के जरूखे से लावण्या को छुपते छुपाते वाटिका में बने मार्गसे महल से बाहर की ओर जाते हुए देखता ...

विश्वासघात--भाग(७)
by Saroj Verma
  • 1.1k

शाम का वक्त था..... डाक्टर महेश्वरी अपने दवाखाने में कुछ उदास सी बैठी थी,तभी विजयेन्द्र उसके पास पहुँचा और महेश्वरी को उदास देखकर पूछ बैठा.....   क्या हुआ डाक्टरनी ...

विश्वासघात--भाग(६)
by Saroj Verma
  • 1.2k

शाम का समय था___   क्यों रे प्रदीप ! मंदिर चलेगा,संदीप ने पूछा।। ना भइया! मै सोच रहा हूँ कि खाना बनाने के बाद पढ़ने बैठ जाऊँ, इम्तिहान आने ...

विश्वासघात--भाग(५)
by Saroj Verma
  • 1.1k

पन्द्रह अगस्त का जलसा खत्म होनें के बाद डाँक्टर महेश्वरी, मास्टर साहब को खोज रहीं थीं ताकि अब उनसे जाने की इजाजत ले सकें और जब वे नहीं दिखें ...

गुलनार
by mandavi barway
  • 927

गुलनारजैसे ही मेरी नींद खुली, मैंने देखा कि दूर खड़ी वो कातर दृष्टि से मुझे देख रही थी। आँखों की चमक, सेब जैसे गालों का गुलाबीपन बहुत फीका था। मुझे ...

विष कन्या - 15
by Bhumika
  • (24)
  • 1.4k

        आगे हमने देखा की, महाराज इंद्रवर्मा मृत्युंजय को मध्याह्न के समय अति सीघ्र उपस्थित होने की आज्ञा देते है। मृत्युंजय जब वहां पहुंचता है तो ...

सलीब पर टँगी लड़की
by Amrita Sinha
  • 549

कहानी सलीब पर टंगी लड़की                    ———— अमृता सिन्हा ————————बेडरूम में आराम करते-करते थकने लगी तो किचन में आ गई पल्लवी ।साफ़-सुथरे और चमकते किचन को देखकर उसके होठों परमुस्कान तैर आयी ।प्रमिला सब काम क़रीने से कर गई थी और खाना भी बना कर टेबल पर स

विष कन्या - 14
by Bhumika
  • (27)
  • 1.4k

        आगे हमने देखा की, मृत्युंजय और भुजंगा के जाने के बाद सारिका लावण्या का उपहास करती  है और कहती है की मृत्युंजय का व्यक्तित्व मनमोहक ...

आज का रावण
by राज कुमार कांदु
  • 585

जय श्री राम का घोष अवकाश में गूँज उठा और खुशी और कौतूहल से भरा रावण धरती के उस हिस्से पर आ धमका जहाँ से यह घोषणा अभी भी ...

विष कन्या - 13
by Bhumika
  • (31)
  • 1.4k

        आगे हमने देखा की, मृत्युंजय और लावण्या में नोक झोक हो रही हैं। मृत्युंजय लावण्या के सामने मित्रता का प्रस्ताव रखता है। लावण्या व्यंग व्यंग ...