Best Detective stories stories in hindi read and download free PDF

फाँसी के बाद - 19
by Ibne Safi
  • 408

(19) वापसी पर ब्लैकी को हमीद ने वहीँ पाया जहां छोड़ गया था । उसके पूछने पर ब्लैकी ने कहा । “इस इमारत के एक कमरे में इस समय ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 14
by S Bhagyam Sharma
  • 255

अध्याय 14 डॉ. अमरदीप फ़िक्र में डूबे हुए.... अपने सामने खड़े पोरको की तीनों बहनों पर एक सामान्य निगाह डाल कर बात करना शुरू किया। "यह देखिए ! तुम्हारे ...

फाँसी के बाद - 18
by Ibne Safi
  • 435

(18) “मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि कोई शक्ति रनधा के पीछे थी जो रनधा के फांसी पा जाने के बाद रनधा ने नाम से लाभ उठा रही ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 13
by S Bhagyam Sharma
  • 387

अध्याय 13 सिल्वरलैन स्टेट बंगला एक छोटे समुद्र जैसा फैला हुआ था। ए.बी.सी.डी. के कार्यक्रम खत्म करके दूसरे दिन | सिम्हा ने ऊपर अपने पिताजी के कमरे को दिखाया। ...

फाँसी के बाद - 17
by Ibne Safi
  • 696

(17) “रात आप रनधा की कैद में थे । अगर वह आपको मार डालना चाहता रहा होता तो रात ही मार डाले होता – इस प्रकार आपको मारने के ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 12
by S Bhagyam Sharma
  • 480

अध्याय 12 डॉ. अमरदीप के हाथ में जो 'मेडिकल बुलेटिन' था पढ़कर खत्म करते ही स्टाफ नर्स पुष्पम अंदर आई। उन्होंने गर्दन उठा कर उसे देखा। पुष्पम बोली "डॉक्टर ...

फाँसी के बाद - 16
by Ibne Safi
  • 645

(16) “और सुहराब जी, मिस्टर मेहता, मिस्टर नौशेर, लाल जी, उसकी लड़की सीमा, प्रकाश और इन्स्पेक्टर आसिफ़ को मौत की धमकियाँ मिल चुकी हैं ।” “इसी लिस्ट में मुझे ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 11
by S Bhagyam Sharma
  • 453

अध्याय 11 सिम्हा इतनी भी सुंदर नहीं थी। कोई भी आदमी के दोबारा देखने लायक भी नहीं थी। साड़ी पहनकर माथे पर एक स्टिकर की बिंदी लगाए हुए थी ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 10
by S Bhagyam Sharma
  • 495

अध्याय 10 तिरुचिरंमंपलम घबराकर डॉक्टर के हाथ को पकड़ लिया। "डा.... डॉक्टर ! आप क्या कह रहे हैं ? मेरे बेटे पोरको क्या हुआ है?" डॉ अमरदीप, अपने हाथ ...

फाँसी के बाद - 15
by Ibne Safi
  • 741

(15) “जब तुम लोग वहां पहुंचे थे तो मैं भी वहां मौजूद था ।” – हमीद ने शुष्क स्वर में कहा – “क्षमा करना प्रकाश ! मेरा स्वर तुम्हें ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 9
by S Bhagyam Sharma
  • 645

अध्याय 9 विवेक, विष्णु और इंस्पेक्टर पंगजाटशन तीनों उस छोटे हॉस्पिटल के अंदर घुसे । आउट पेशेंट, इन पेशेंट वार्ड को पारकर हॉस्पिटल के पीछे मर्चुरी के कमरे में ...

फाँसी के बाद - 14
by Ibne Safi
  • 789

(14) इतने में एक खाली टैक्सी आकर रुकी और हमीद उस में बैठ गया । पहले तो ख्याल था कि सीधा घर जायेगा मगर बाद में इरादा बदल दिया ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 8
by S Bhagyam Sharma
  • 606

अध्याय 8 डॉ. अमरदीप, अपने सामने आंखों में आंसू लिए खड़े बुजुर्ग और उसकी पत्नी, उनके साथ उनकी तीन सुंदर युवा बेटियां एक क्षण उनके ऊपर नजर डाली | ...

फाँसी के बाद - 13
by Ibne Safi
  • 726

(13) “यह भी एक दिलचस्प और रहस्यपूर्ण कहानी है । जब उसके दोनों रिश्तेदार उसकी लाश लेकर चले थे तो हमारे दो आदमी उनके पीछे लग गये थे । ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 7
by S Bhagyam Sharma
  • 696

अध्याय 7 विवेक और विष्णु मुन्नार में उस छोटे राजकीय हॉस्पिटल के सामने पेड़ के नीचे कार पार्क कर उसके अंदर बैठे हुए थे। बड़े-बड़े देवदार के पेड़.... चारों ...

फाँसी के बाद - 12
by Ibne Safi
  • 759

(12) रात के तीन बज रहे थे । ठंड अपने पूरे यौवन पर थी । सड़कें सुनसान थीं । गहरा कुहरा पड़ने के कारण अब ट्रक भी नहीं चल ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 6
by S Bhagyam Sharma
  • 618

अध्याय 6 घबराते हुए डॉक्टर अमरदीप ने पोरको के पास जाकर उसके पल्स की जांच करने लगे। नाड़ी की धड़कन स्वाभाविक नहीं थी। वह पाताल पर जा रही थी। ...

फाँसी के बाद - 11
by Ibne Safi
  • 861

(11) वह नगर का बाहरी इलाका था । यहां वह लोग आबाद थे जो मिल और फैक्ट्रियों में काम करते थे और उनके फ्लैट – ऐसा लगता था जैसे ...

द ईमेल भारत खतरे में - (भाग 4)
by मदन सिंह शेखावत
  • 576

में चांदनी चौक के लखोरी रेस्टोरेंट में शबनम के साथ पहुंच गया था। यह रेस्टोरेंट काफी प्रसिद्ध था। अभी तक शिवानी का आना बाकी था। मेने पहले ही वी ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 5
by S Bhagyam Sharma
  • 741

अध्याय 5 विवेक के पूरे चेहरे पर सदमे की रेखाएं फैल गई। "आप क्या बोल रहे हैं ? ए.बी.सी.डी. का मर्डर? कैसे सर?" दूसरी तरफ से सी.पी.जी. शर्मन बोल ...

फाँसी के बाद - 10
by Ibne Safi
  • 786

(10) सरला मोटर साइकल से उतर तो गई मगर फ़्लैट के दरवाजे की ओर नहीं बढ़ी । बस वहीँ खड़ी रही । शायद किसी अवसर की ताक में थी ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - अंतिम भाग
by Kumar Rahman
  • (25)
  • 1.3k

 खुदकुशी “वक्त बर्बाद मत करो। इसे ठिकाने लगाओ और बाहर जाकर शूटिंग कंपलीट करो।” आने वाले ने तेज आवाज में कहा। “कैप्टन किशन!” उसकी आवाज सुनकर इंस्पेक्टर सोहराब ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 4
by S Bhagyam Sharma
  • 696

अध्याय 4 डॉ. अमरदीप ने पोरको को आश्चर्य से देखा ‌। "क्या आत्मा ?" अमरदीप के होंठो पर एक हंसी आई। "कौन सी आत्मा.... भाप…... वाली आत्मा...?" "मनुष्य की ...

फाँसी के बाद - 9
by Ibne Safi
  • 873

(9) “सुनिये कप्तान साहब !” – सीमा ज़रूरत से ज्यादा गंभीर होकर बोली – “वह ड्राइवर साहब मेरे मित्र हैं इसलिये मैं उनके विरुद्ध एक शब्द भी सुनना नहीं ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 3
by S Bhagyam Sharma
  • 1k

अध्याय 3 रूपला बिल्कुल ऊंची चोटी पर चढ़कर खड़ी हुई तो नीचे उतर न पाने की वजह से तड़पने लगी। अपनी होंठों को बाहर निकाल कर बोली। "वि....वि... विष्णु...! ...

फाँसी के बाद - 8
by Ibne Safi
  • 1.1k

(8) नीचे पहुंचा तो प्रकाश की मोटर स्टार्ट हो चुकी थी और सीमा अपनी कार में बैठने जा रही थी । फिर जैसे ही दरवाजा खोलकर ड्राइविंग सीट पर ...

द ईमेल भारत खतरे में - (भाग 3)
by मदन सिंह शेखावत
  • 753

बार बार ये गाना सभी इंटेलिजेंस संस्थाओ से सुना जा रहा था। कभी कभी तो ऐसा लग रहा था कि ये गाना हमारे लिए कोई वाइरस बन गया था ...

फाँसी के बाद - 7
by Ibne Safi
  • 984

(7) रात आर्लेक्चनू वाले तुम्हें उस समय कोठी में पहुँचा गये जब कि मैं मौजूद नहीं था । आने पर तुम्हें देखा मगर मेरे पास इतना समय नहीं था ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 2
by S Bhagyam Sharma
  • 987

अध्याय 2 चेन्नई। स्वर्णम मेडिकल सेंटर। न्यूरो वार्ड। डॉ. अमरदीप अपने सामने बैठे हुए उस 30 साल के युवा से बात कर रहे थे। "आपका नाम बताइए !" "पोरको" ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 33
by Kumar Rahman
  • (18)
  • 1.6k

डीएनए रिपोर्ट सार्जेंट सलीम शेक्सपियर कैफे से सीधे गुलमोहर विला पहुंचा था। उसने इंस्पेक्टर मनीष को वहीं बुलाया था। सार्जेंट सलीम के पहुंचने के कुछ देर बाद ही मनीष ...