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    अनजान रीश्ता - 32
    by Heena katariya

    अविनाश यूंही रोहन के साथ बैठा हुआ था। की तभी उसे मोबाईल के बजने की आवाज सुनाई देती हैं । अविनाश रोहन से बात करके काफी अच्छा महसूस कर ...

    झगड़ों में गाँव
    by महेश रौतेला
    • 42

    झगड़ों में गाँव:पहाड़ों में एक अद्भुत शान्ति होती है,अगर महसूस कर सको तो। समाज में कहीं आपसी मेलजोल है तो कहीं संघर्ष-विवाद की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं।प्यार ...

    Jashn in Corona
    by इंदर भोले नाथ
    • 30

    ये कहानी शुरू होती है, उत्तर प्रदेश मे स्थित जिले के एक छोटे से गांव से । मैं जिले और गांव का नाम नहीं रखना चाहता है क्योंकि ये ...

    कानून का जाल
    by राज कुमार कांदु
    • 46

        शहर में आये दिन युवा लड़कियों के अपहरण और उनके साथ हैवानियत की खबरें आती रहती थी । कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद अपराधियों की दबंगई के ...

    The Haunting of Hill House
    by Sarvesh Saxena
    • 3.1k

    नमस्कार दोस्तों, मुझे उम्मीद है आप सभी लोग घरों में सुरक्षित होंगे और कोरोना से बचने के लिए सारे नियमों का पालन कर रहे होंगे, इस खाली और मुश्किल समय ...

    बैकुंठ के दर्शन ।
    by सुप्रिया सिंह
    • 1.8k

    मुझे अच्छी तरह से याद है ,मैं रात पढ़ते -पढ़ते सो गया था । मेरे दोंनो हाथ मेरे सीने पर रखे हुए थे । उससे पहले मैं कोई सस्पेंस ...

    लाईट हाउस...
    by Dr Vinita Rahurikar
    • 1.9k

    लाईट हाउस... पूजा करने के बाद समय काटने के लिए सविता जी एक पत्रिका लेकर बाहर ड्राइंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गई। पढ़ने से अधिक अच्छा तरीका ...

    बेटी की इच्छा..
    by Rudra Pratap VîPîN
    • 1.8k

    मातृत्व- एक छोटा-सा शब्द, जो अपने आप में पूरा संसार सुंदरता, ऐसो आराम, ज्ञान समेटे है. यह एक जादुई शब्द है, एक जादुई एहसास, जो कई जीवनों को बदलता ...

    महामाया - 3
    by Sunil Chaturvedi
    • 1.8k

    महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – तीन अखिल ने खिड़की के सामने लगा परदा हटाया और खिड़की खोल दी। ताजी ठंडी हवा का एक झोंका कमरे में प्रवेश कर गया। ...

    भूतिया बगीचा - SJT
    by Poetry Of SJT
    • 1.9k

    आज चार साल बाद आया हूं यहां , कुछ भी नहीं बदला  सब कुछ पहले जैसे ही है , आज भी सूरज की रोशनी अन्दर नहीं आ पाती है ...

    अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 17
    by Mirza Hafiz Baig
    • 1.8k

    भाग-17  प्रेम का अनावरण    ऊपर आते ही इन लोगों ने मुझे घेरे में ले लिया। और उस गुप्तचर ने तो बढ़कर मुझे जकड़ लिया और एक खंजर मेरे ...

    बकरी और बच्चे (भाग-०१)
    by Abhinav Bajpai
    • 890

    बकरी और बच्चे (भाग-०१)बच्चों की सूझबूझएक बकरी थी, उसके चार बच्चे थे। नाम थे - अल्लों, बल्लो, चेव और मेव। चारो बड़े ही नटखट और शैतान थे। बकरी रोज ...

    एक दिया मुंडेर पर
    by Satish Sardana Kumar
    • 915

    सिरसा!जाने कैसा शहर है यह?फतेहाबाद से पीलीबंगा बुआ के घर जाते समय यह शहर रास्ते में पड़ता था।बचपन से लेकर कॉलेज में ग्रेजुएशन करने तक मैं बहुत कम बार ...

    अनोखा कैमरा
    by Renu Jindal
    • 1k

    कई साल पहले की बात है, जब मैं ,.मेरा भाई अपने माता-पिता के साथ एक खूबसूरत से नगर -पालमपुर में रहते थे। यही तीन - चार साल पहले हमने ...

    विश्रान्ति - 7
    by Arvind Kumar Sahu
    • 920

    विश्रान्ति (‘रहस्य एक रात का’A NIGHT OF HORROR) अरविन्द कुमार ‘साहू’ विश्रान्ति (The horror night) (दुर्गा ने देखा, जच्चा दर्द से कराह रही थी) -6 दुर्गा ने अनुमान लगाया ...

    ज्याँकों राँखें साईंयाँ.. भाग 3
    by योगेश जोजारे
    • 986

    वह युवी को निगलने ही वाला था तभी युवीका हाथ अपने गले मे पहने, बाबा के लॉकेट पर पड़ा. जिस में बाबा की शिर्डी की पवित्र विभूति भरी थी. ...

    देह की दहलीज पर - 11
    by Kavita Verma
    • (17)
    • 1.1k

    साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर  संपादक कविता वर्मा लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  कथाकड़ी 11 अब तक आपने पढ़ा :- मुकुल की उपेक्षा से ...

    इश्क़ जुनून - 8
    by Paresh Makwana
    • 995

              वो ओर कोई नही कावेरी के क्लास का लड़का वीरा था।          वीरा ठुकर साहब के दोस्त रतनसिंह का छोटा बेटा ...

    हूफ प्रिंट - 13 - अंतिम भाग
    by Ashish Kumar Trivedi
    • 957

    हूफ प्रिंट Chapter 13 चंदर ने अपना जुल्म कबूल कर लिया। अपने बयान में उसने सारी कहानी सुनाई। बचपन से ही चंदर को फिल्मों का बहुत शौक था। अक्सर ...

    मन की बात
    by इंदर भोले नाथ
    • 935

    फूलचंद नाम का एक किसान था,उसके दो बेटे थे, रमेश और महेश। महेश की उमर १३ साल और रमेश की ३ साल थी फूलचंद की पत्नी का नाम पार्वती था, वो ...

    तस्वीर में अवांछित - 3 - अंतिम भाग
    by PANKAJ SUBEER
    • 946

    तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (3) लड़की ने जो टीवी पर फिल्म देख रही थी अंदर जाकर कुछ सामान ज़ोर से पटका और फिर किसी खिड़की या ...

    हंस चुगेगा दाना दुनका कौवा मोती खायेगा
    by S Sinha
    • 935

                                               कहानी  -    हंस चुगेगा  दाना दुनका  कौवा ...

    कृष्णा भाग-५
    by Saroj Prajapati
    • 828

    धीरे धीरे समय का पहिया आगे बढ़ता जा रहा था। कृष्णा को नौकरी करते हुए 4 साल हो गए थे और इस बीच अपनी योग्यता के बलबूते परीक्षा पास ...

    क्रश
    by Jitendra Shivhare
    • 929

    एक कहानी रोज़-39 *क्रश--कहानी* *चां* दनी मुख्य सलाहकार इंजीनियर बनकर गांव आई थी। मुसाखेड़ी गांव की मुख्य सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनान्तर्गत निर्मित होना थी। पुर्व में किये गये ...

    गांव से लौटकर
    by Lalit Rathod
    • 868

    गांव का आख़री दिन बहुत अजीब सा अकेलापन में शामिल कर लेता है। रात में ही दिमाग से घर में बिताया समय खत्म हो चुका होता है। अगली सुबह ...

    लॉक डाउन के पन्ने - प्रकृति कुछ कहती है :
    by Rishi Sachdeva
    • 817

    "ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा" और निश्चित रूप से ये समय भी जीवन में दुबारा नहीं आएगा।अधिकांश लोगों का मानना है कि ये मानव निर्मित अभिशाप है, कुछ का कहना ...

    निर्मम अंधेरे
    by Husn Tabassum nihan
    • 877

    निर्मम अंधेरे ‘‘ हे....दीदी, तू हिजड़ी है का ?‘‘ -छुटके ने तपाक से बोला तो डेहरी पर से लहसुन का झाबा उतारती नैय्या भीतर तक सुलग गई। छुटके को ...

    पसंद अपनी अपनी - 1
    by किशनलाल शर्मा
    • 821

    "बिजली घर-बिजली घर---ऑटोवाला ज़ोर ज़ोर से आवाज लगा रहा था।उमेश को देखते ही ऑटो वाले ने पूछा था।"कमलानगर जाना है।""कमलानगर के लिए बिजलीघर से  बस मिलेगी,"ऑटोवाला बोला,"आइये।आपकेे बैठते ही ...

    बेटी - भाग-४
    by Anil Sainger
    • 767

    यह सब उस जमाने तक ठीक था जब औरत घर से बाहर नहीं निकलती थीं | तब वह केवल घर और बच्चों तक ही सीमित थीं | आज वक्त ...

    होने से न होने तक - 18
    by Sumati Saxena Lal
    • 816

    होने से न होने तक 18. कौशल्या दीदी उठ कर खड़ी हो गयी थीं और खाना शुरू कराने के लिए सबकी प्लेटों में परोसने लगी थीं। सब लोग अपनी ...