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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Philosophy in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures....Read More


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काल्पनिक उपन्यास पर मुकदमा - 8 By Shanaya khan

The First Audienceमहल के पूर्वी प्रांगण में स्थित एक शांत कक्ष।यह अदालत नहीं थी।न ही यातना कक्ष।यह वह स्थान था जहाँ राजा उन लोगों से मिलते थे जिनके बारे में वे स्वयं निर्णय बनाना च...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 25 By Nitya Oswal

संत गुरु नानक देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के अन्याय और लालच को छोड़कर अपनी ईमानदारी की मेहनत से जीवन जीने का सच्चा मार्ग सिखाती है।“हक पराया नानका, उस सूअर उस गाय।गुरु पीर हाम...

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हिन्दू राष्ट्र और मुस्लिम राष्ट्र पर डॉ अंबेडकर के विचार By Er.Vishal Dhusiya

                           प्रस्तावना मैं जब भी कभी किसी अंधभक्त लोगों से मिलता हूँ और राजनीतिक चर्चायें होती हैं तो वो हर तरह से हारने के बाद हिन्दू मुस्लिम की राजनीति पर उतर जाते...

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क्रीमी लेयर: एक काला कानून By Er.Vishal Dhusiya

क्रीमी लेयर (Creamy Layer) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का वह संपन्न वर्ग है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुका है। इस श्रेणी में आने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थ...

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हर आक्रोश के पीछे की कहानी By Madhavi Tripathi

“किसी को शांत होने के लिए कहने से पहले एक बार यह समझने की कोशिश कीजिए कि उस मुकाम तक पहुँचने से पहले उसने कितनी बातें चुपचाप सहन की होंगी।”आज सुबह मैं चाय के साथ अख़बार पढ़ रही थी।...

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The Anger We See, The Story We Don’t By Madhavi Tripathi

“Before asking someone to calm down, ask yourself what they had to survive quietly to reach that point.”This morning, I was reading the newspaper with my tea.One headline caught my...

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मानव जीवन का लक्ष्य क्या है? By Nitya Oswal

मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य संसार के बंधनों को सदा के लिए तोड़ देना है। इस संसार के बंधन को आत्मज्ञान से ही तोड़ा जा सकता है। लेकिन जब तक आत्मज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक मनुष्य...

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शिक्षा व्यवस्था में धांधली By Er.Vishal Dhusiya

                    प्रस्तावना शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र के विकास, संस्कृति और प्रगति का मुख्य आधार स्तंभ होती है। यह केवल साक्षरता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्मा...

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दूसरों की मदद कैसे करें? By Nitya Oswal

परोपकार करने के लिए पैसे से ही दूसरों की मदद करें यह ज़रुरी नहीं है। हम अपनी शारीरिक शक्ति से, बुद्धि से या अच्छा व्यवहार करके भी लोगों की मदद कर सकते हैं। जैसे, किसी को कोई काम हो...

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આજકાલ ના છોકરાઓ By Ashish

આજકાલના છોકરાઓ માતા-પિતાનું નથી માનતા, પોતે સાચા અને માતા-પિતા ખોટા – સાચું કોણ હશે?આજના આધુનિક યુગમાં સૌથી વધુ ચર્ચાતો વિષય જો કોઈ હોય તો તે છે પેઢી વચ્ચેનો મતભેદ. ઘણીવાર વડીલો ફર...

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द परफेक्ट कपल! By Santoshi 'katha'

    परफेक्ट कपल..!   ये टाइटल पाने के लिए दो लोगों को अपनी आधी जिन्दगी imperfect होकर गुजारनी पड़ती है एक दूसरे के साथ... दोनों को खुद के व्यवहार , विचार, रहन-सहन और नज़रिए में बहो...

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आप ही लोगों को सिखाते हैं कि वे आपके साथ कैसा व्यवहार करें By Madhavi Tripathi

जिस बात को आप बार-बार स्वीकार करते हैं, वही धीरे-धीरे आपके लिए दूसरों का व्यवहार बन जाती है।कुछ सीख किताबों से नहीं मिलती।वे जीवन में बार-बार दोहराए जाने वाले अनुभवों से मिलती हैं।...

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ઋષિશાસ્ત્ર પ્રમાણે ગૃહનિર્માણ By Ashish

ઋષિશાસ્ત્ર પ્રમાણે ગૃહનિર્માણ – ભારતીય જ્ઞાન પરંપરાનો વૈજ્ઞાનિક અભિગમઆજ સુધી આપણે "વાસ્તુશાસ્ત્ર" વિશે ઘણું સાંભળ્યું છે, પરંતુ વાસ્તવમાં ભારતીય સ્થાપત્યની મૂળ પ્રેરણા માત્ર વાસ્તુ...

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क्या मांसाहार करना चाहिए? By Nitya Oswal

परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि, अहिंसा का पालन करने के लिए स्वाद की इन्द्रिय, यानी जीभ पर बहुत कंट्रोल रखना पड़ता है। जो अहिंसा का पालन करना चाहते हैं, उन्हें मांसाहार या अंडों का...

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अद्रश्य भार और एक मुस्कान By Shilpy Aggarwal

लेखक की कलम से-एक बच्चे की सहज मुस्कान से शुरू होकर वयस्क जीवन के अदृश्य बोझों तक पहुँचता यह ललित निबंध सहजता, स्वीकृति और मानवीय जुड़ाव पर चिंतन करता है।अदृश्य भार और एक मुस्कानक्...

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AI का विकल्प By prem chand hembram

AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्ता की कोई परंपरा थी?मानव सभ्यता आज एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence –...

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Conversations With Myself - 3 By Aarushi Singh Rajput

ज़िंदगी सच में अजीब होती है।इतना कुछ हो जाता है कि एक दिन अचानक एहसास होता है—हम बड़े कब हो गए?लोग अक्सर कहते हैं, "काश बचपन वापस मिल जाए।"लेकिन मैं हमेशा चुप रह जाती हूँ।क्योंकि म...

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અગોચર ઈતિહાસ - 1 - કુલધરા (રાજસ્થાન) By Vir jadeja

"જ્યાં માણસ જતો રહે છે, ત્યાં તેનો અર્થ રહી જાય છે.”રણ વચ્ચેનું મૌન કુલધરા.થારના રેતીના ઢૂવામાં, જૈસલમેરથી 18 કિમી દૂર, પથ્થરના હાડપિંજર જેવું ગામ પડ્યું છે — કુલધરા. છત વગરના ઘરો,...

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મનની બારી By Rupen Patel

અક્ષય એક મધ્યમવર્ગીય આઈટી (IT) પ્રોફેશનલ હતો. બેંગલુરુ જેવા મોટા શહેરમાં તે અને તેની પત્ની કાવ્યા, એક નાનકડા વન-બીએચકે ફ્લેટમાં રહેતા હતા. ફ્લેટ ચોથા માળે હતો, પણ તેની આસપાસ મોટી ઇ...

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समस्या नहीं , समाधान की चर्चा By prem chand hembram

समस्या नहीं, समाधान की चर्चाजड़ों को सींचने की आवश्यकतासमाज की अनेक समस्याओं पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है—नारी सम्मान पर, कन्या सुरक्षा पर, बुजुर्गों की सेवा पर, परिवारों के विघटन प...

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शिक्षा नहीं , मनुष्य निर्माण By prem chand hembram

शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ ज्ञान का विस्तार अभूतपूर्व है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष...

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पेरणी - भाग 2 By Ankush Shingade

पेरणी कादंबरी भाग २         लोकं शिक्षण घेत. उच्चशिक्षीत होत. परंतु ते धर्म, परंपरा व अंधश्रद्धा यात गुरफटत असत. त्याचा परिणाम श्यामलवर होवू लागला होता. त्यामुळंच ती म्हणत असे की य...

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હુ તારી જ્ગ્યા પર હોય તો....! By krupa pandya

આજે મારા ઘરે મારી એક જુની મિત્ર બિનલ આવી હતી. તે મારા સસરાને જોવા આવી હતી. કેમકે તેમને કેન્સરનું નિદાન થયું છે. તો, તે જોવા આવી હતી. હું મારા સસરાની દવા લેવા માર્કેટ ગઈ હતી, તેથી અ...

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रक्ताचा टिळा By Ankush Shingade

रक्ताचा टिळा या पुस्तकाविषयी          रक्ताचा टिळा ही माझी एकशे एकविसावी पुस्तक. ही पुस्तक संपुर्ण इस्रायल, अमेरिका व इराण युद्धावर आधारीत आहे.            ही पुस्तक लिहिण्यामागील उ...

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त्याग जीवन की प्राण प्रतिष्ठा है By Anant Dhish Aman

“त्यागात् शान्तिरनन्तरम्” — यह दिव्य सूत्र हमें बताता है कि त्याग के पश्चात् ही शान्ति का उदय होता है। वास्तव में त्याग जीवन की प्राण-प्रतिष्ठा है। जिस प्रकार किसी मंदिर में देवप्र...

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संन्यास क्या है? By Vedanta Life Agyat Agyani

संन्यास क्या है?संन्यास का अर्थ किसी चीज़ को छोड़ देना नहीं, बल्कि जीवन को ऐसे देखना है जहाँ चुनाव की गुलामी समाप्त हो जाती है।जहाँ मन “यह चाहिए, यह नहीं चाहिए” के बीच झूलता है, वह...

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આપણું ખોવાઈ ગયેલું ‘નિખાલસ હાસ્ય' By Jankruti Prajapati

एक સંશોધન મુજબ, એક નાનું બાળક દિવસમાં આશરે ૩૦૦ થી ૪૦૦ વાર ખિલખિલાટ હસે છે. જ્યારે આપણે મોટા થઈએ છીએ, ત્યારે એ હાસ્ય ઘટીને દિવસમાં માંડ ૧૫ થી ૨૦ વાર રહી જાય છે! અને વડીલોની વાત કરીએ...

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અક્ષયનીતિસૂત્ર - અધ્યાય 8 By yeash shah

અંતિમ અધ્યાયસૂત્ર:૭ કુદરત ઉવાચ:કરોડો વર્ષો થી સ્થિત એવા મારા અસ્તિત્વે  ઘણા પરિવર્તનો જોયા અને આ પરિવર્તનો ની સાથે સાથે ઘણી પેઢીઓ મેં વીતતી જોઈ. તથા  ભવિષ્ય માં પણ જોતો  રહીશ.અહીંય...

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माणुसकीचं... मातृत्व By Punam Bhagat

# मी हे का लिहिते...कारण माझ्या जवळचे ह्या दुःखात होरपळू नयेत...मी अगदी लहान असताना आई नसल्याचे दुःख किती आणि काय असते हे फील केले, जरी मला माझी आई आहे. पण समोरच्यांचं दुःख माझं का...

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कोख से अंत तक - 2 By ARTI MEENA

“माँ, जिसका काम है चोट खाकर भी फिर से खड़े हो जाना, वह अपने घाव भर लेगी। लेकिन अगर उसकी ही कोख में अब हम सुरक्षित नहीं रह सकते, तो वह फिर जीवन को जन्म दे देगी। पर क्या हम ही अपने भ...

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वेदान्त 2.0 - भाग 40 By Vedanta Life Agyat Agyani

// Playables SDK v1.0.0// Game lifecycle bridge: rAF-based game-ready detection + event communication(function() {  'use strict';  // Idempotency: skip if already initializ...

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प्रकृति की मौन चीख By Nitya Oswal

यह लेख आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्रकृति के साथ हो रहे अन्याय का एक आईना है। जहाँ हम विकास के नाम पर जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल रहे हैं, वहीं प्रकृति बिना कुछ कहे अपना अस्त...

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काल्पनिक उपन्यास पर मुकदमा - 8 By Shanaya khan

The First Audienceमहल के पूर्वी प्रांगण में स्थित एक शांत कक्ष।यह अदालत नहीं थी।न ही यातना कक्ष।यह वह स्थान था जहाँ राजा उन लोगों से मिलते थे जिनके बारे में वे स्वयं निर्णय बनाना च...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 25 By Nitya Oswal

संत गुरु नानक देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के अन्याय और लालच को छोड़कर अपनी ईमानदारी की मेहनत से जीवन जीने का सच्चा मार्ग सिखाती है।“हक पराया नानका, उस सूअर उस गाय।गुरु पीर हाम...

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हिन्दू राष्ट्र और मुस्लिम राष्ट्र पर डॉ अंबेडकर के विचार By Er.Vishal Dhusiya

                           प्रस्तावना मैं जब भी कभी किसी अंधभक्त लोगों से मिलता हूँ और राजनीतिक चर्चायें होती हैं तो वो हर तरह से हारने के बाद हिन्दू मुस्लिम की राजनीति पर उतर जाते...

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क्रीमी लेयर: एक काला कानून By Er.Vishal Dhusiya

क्रीमी लेयर (Creamy Layer) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का वह संपन्न वर्ग है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुका है। इस श्रेणी में आने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थ...

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The Anger We See, The Story We Don’t By Madhavi Tripathi

“Before asking someone to calm down, ask yourself what they had to survive quietly to reach that point.”This morning, I was reading the newspaper with my tea.One headline caught my...

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मानव जीवन का लक्ष्य क्या है? By Nitya Oswal

मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य संसार के बंधनों को सदा के लिए तोड़ देना है। इस संसार के बंधन को आत्मज्ञान से ही तोड़ा जा सकता है। लेकिन जब तक आत्मज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक मनुष्य...

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शिक्षा व्यवस्था में धांधली By Er.Vishal Dhusiya

                    प्रस्तावना शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र के विकास, संस्कृति और प्रगति का मुख्य आधार स्तंभ होती है। यह केवल साक्षरता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्मा...

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दूसरों की मदद कैसे करें? By Nitya Oswal

परोपकार करने के लिए पैसे से ही दूसरों की मदद करें यह ज़रुरी नहीं है। हम अपनी शारीरिक शक्ति से, बुद्धि से या अच्छा व्यवहार करके भी लोगों की मदद कर सकते हैं। जैसे, किसी को कोई काम हो...

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આજકાલ ના છોકરાઓ By Ashish

આજકાલના છોકરાઓ માતા-પિતાનું નથી માનતા, પોતે સાચા અને માતા-પિતા ખોટા – સાચું કોણ હશે?આજના આધુનિક યુગમાં સૌથી વધુ ચર્ચાતો વિષય જો કોઈ હોય તો તે છે પેઢી વચ્ચેનો મતભેદ. ઘણીવાર વડીલો ફર...

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द परफेक्ट कपल! By Santoshi 'katha'

    परफेक्ट कपल..!   ये टाइटल पाने के लिए दो लोगों को अपनी आधी जिन्दगी imperfect होकर गुजारनी पड़ती है एक दूसरे के साथ... दोनों को खुद के व्यवहार , विचार, रहन-सहन और नज़रिए में बहो...

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आप ही लोगों को सिखाते हैं कि वे आपके साथ कैसा व्यवहार करें By Madhavi Tripathi

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ઋષિશાસ્ત્ર પ્રમાણે ગૃહનિર્માણ By Ashish

ઋષિશાસ્ત્ર પ્રમાણે ગૃહનિર્માણ – ભારતીય જ્ઞાન પરંપરાનો વૈજ્ઞાનિક અભિગમઆજ સુધી આપણે "વાસ્તુશાસ્ત્ર" વિશે ઘણું સાંભળ્યું છે, પરંતુ વાસ્તવમાં ભારતીય સ્થાપત્યની મૂળ પ્રેરણા માત્ર વાસ્તુ...

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क्या मांसाहार करना चाहिए? By Nitya Oswal

परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि, अहिंसा का पालन करने के लिए स्वाद की इन्द्रिय, यानी जीभ पर बहुत कंट्रोल रखना पड़ता है। जो अहिंसा का पालन करना चाहते हैं, उन्हें मांसाहार या अंडों का...

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अद्रश्य भार और एक मुस्कान By Shilpy Aggarwal

लेखक की कलम से-एक बच्चे की सहज मुस्कान से शुरू होकर वयस्क जीवन के अदृश्य बोझों तक पहुँचता यह ललित निबंध सहजता, स्वीकृति और मानवीय जुड़ाव पर चिंतन करता है।अदृश्य भार और एक मुस्कानक्...

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AI का विकल्प By prem chand hembram

AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्ता की कोई परंपरा थी?मानव सभ्यता आज एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence –...

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Conversations With Myself - 3 By Aarushi Singh Rajput

ज़िंदगी सच में अजीब होती है।इतना कुछ हो जाता है कि एक दिन अचानक एहसास होता है—हम बड़े कब हो गए?लोग अक्सर कहते हैं, "काश बचपन वापस मिल जाए।"लेकिन मैं हमेशा चुप रह जाती हूँ।क्योंकि म...

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"જ્યાં માણસ જતો રહે છે, ત્યાં તેનો અર્થ રહી જાય છે.”રણ વચ્ચેનું મૌન કુલધરા.થારના રેતીના ઢૂવામાં, જૈસલમેરથી 18 કિમી દૂર, પથ્થરના હાડપિંજર જેવું ગામ પડ્યું છે — કુલધરા. છત વગરના ઘરો,...

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મનની બારી By Rupen Patel

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शिक्षा नहीं , मनुष्य निर्माण By prem chand hembram

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पेरणी - भाग 2 By Ankush Shingade

पेरणी कादंबरी भाग २         लोकं शिक्षण घेत. उच्चशिक्षीत होत. परंतु ते धर्म, परंपरा व अंधश्रद्धा यात गुरफटत असत. त्याचा परिणाम श्यामलवर होवू लागला होता. त्यामुळंच ती म्हणत असे की य...

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આજે મારા ઘરે મારી એક જુની મિત્ર બિનલ આવી હતી. તે મારા સસરાને જોવા આવી હતી. કેમકે તેમને કેન્સરનું નિદાન થયું છે. તો, તે જોવા આવી હતી. હું મારા સસરાની દવા લેવા માર્કેટ ગઈ હતી, તેથી અ...

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रक्ताचा टिळा By Ankush Shingade

रक्ताचा टिळा या पुस्तकाविषयी          रक्ताचा टिळा ही माझी एकशे एकविसावी पुस्तक. ही पुस्तक संपुर्ण इस्रायल, अमेरिका व इराण युद्धावर आधारीत आहे.            ही पुस्तक लिहिण्यामागील उ...

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“त्यागात् शान्तिरनन्तरम्” — यह दिव्य सूत्र हमें बताता है कि त्याग के पश्चात् ही शान्ति का उदय होता है। वास्तव में त्याग जीवन की प्राण-प्रतिष्ठा है। जिस प्रकार किसी मंदिर में देवप्र...

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संन्यास क्या है? By Vedanta Life Agyat Agyani

संन्यास क्या है?संन्यास का अर्थ किसी चीज़ को छोड़ देना नहीं, बल्कि जीवन को ऐसे देखना है जहाँ चुनाव की गुलामी समाप्त हो जाती है।जहाँ मन “यह चाहिए, यह नहीं चाहिए” के बीच झूलता है, वह...

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અક્ષયનીતિસૂત્ર - અધ્યાય 8 By yeash shah

અંતિમ અધ્યાયસૂત્ર:૭ કુદરત ઉવાચ:કરોડો વર્ષો થી સ્થિત એવા મારા અસ્તિત્વે  ઘણા પરિવર્તનો જોયા અને આ પરિવર્તનો ની સાથે સાથે ઘણી પેઢીઓ મેં વીતતી જોઈ. તથા  ભવિષ્ય માં પણ જોતો  રહીશ.અહીંય...

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माणुसकीचं... मातृत्व By Punam Bhagat

# मी हे का लिहिते...कारण माझ्या जवळचे ह्या दुःखात होरपळू नयेत...मी अगदी लहान असताना आई नसल्याचे दुःख किती आणि काय असते हे फील केले, जरी मला माझी आई आहे. पण समोरच्यांचं दुःख माझं का...

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कोख से अंत तक - 2 By ARTI MEENA

“माँ, जिसका काम है चोट खाकर भी फिर से खड़े हो जाना, वह अपने घाव भर लेगी। लेकिन अगर उसकी ही कोख में अब हम सुरक्षित नहीं रह सकते, तो वह फिर जीवन को जन्म दे देगी। पर क्या हम ही अपने भ...

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वेदान्त 2.0 - भाग 40 By Vedanta Life Agyat Agyani

// Playables SDK v1.0.0// Game lifecycle bridge: rAF-based game-ready detection + event communication(function() {  'use strict';  // Idempotency: skip if already initializ...

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प्रकृति की मौन चीख By Nitya Oswal

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