सुधीर कमल, 58 वर्ष, मूलतः एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं पर अपने तकनीकी कौशल का प्रयोग हिंदी व उर्दू लेखन में आजमाते रहते हैं। अब तक वे 16 कथायें, 7 लघुकथायें, बच्चों की शिक्षा से संबंघित विषय पर ’पिपासा’ नामक एक गंभीर उपन्यास तथा विभिन्न मनुष्यों की स्वाभाविक प्रवृत्तियों पर आधारित एक हास्य उपन्यास ’गलतफहमी’ रच चुके हैं। हजारों वर्षों से भारतीय राजनीति में गहरे व्याप्त कुत्सित आचरण पर उनका लिखा एक ड्रामा ’बाबुल राजा’ दिल्ली के मंचों में अनेक बार खेला जा चुका है। इसी प्रकार भारतीय हिंदू समाज में प्रचलित धार्मिक पाखंड पर आधारित ड्रामा ’राम राज्य’ भी उन्हीं की रचना है। उन्होंने हिंदी व उर्दू दोनों में अनेक कवितायें/नज्में भी रची हैं। उनकी हिंदी रचनाओं में जहां उर्दू के शब्दों का प्रयोग न के बराबर होता है वहीं कुछ रचनाओं में उर्दू शब्दों ने ही सौंदर्य वृद्धि की है। पता :14/4, अरुण नगर, जी पी ओ, रीवा (म.प्र.) 486001. मोबाइल : 09826224025 एवं 07000210507. व्हाट्सएप (कॉल हेतु नहीं) :