गाँव में नेउर को अच्छी खासी रोजगारी मिल जाती थी, वैसे तो वो मजदूरी ही करता था पर न जाने कैसे मंदी का दौर शुरू हुआ और नेउर को भी अब पहेले जैसी मजदूरी नहीं मिलती थी अचानक कहीं से एक साधु गाँव में आये और नेउर के घर के सामने ही ...