Best Short Stories stories in hindi read and download free PDF

चाय की खुशबू
by Anita Sinha
  • 171

चाय की खुशबू से ही चाय के जायके का पता लग जाता है। सुबह होते ही चाय की तलब महसूस होती है। आलस आती है थोड़ी देर बाद बनाऊंगी ...

चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 - 4 - अंतिम भाग
by Lajpat Rai Garg
  • 159

16 निरुत्तर सात-आठ वर्षीय सुमी अपनी मम्मी संग गर्मियों की छुट्टियों में अपनी ननिहाल आया हुआ था। बीस-बाईस वर्षीय नीतीश बेड पर बैठा टेलीविजन देख रहा था। सुमी बेडरूम ...

इस बरस के आम
by Renu Hussain
  • 273

चलो शुक्र है पापा घर आ गए, अब उनसे मिलने अस्पताल नहीं जाना होगा.....बहुत कष्ट झेला है वेंटिलेटर पर उन्होंने....उफ्फ...!! सारे शरीर पर इंजेक्शन ही इंजेक्शन.....वैसे वेंटिलेटर से बाहर ...

रात का खेल चले भाग-३
by Appa Jaunjat
  • 204

हमणे देखा कि कोइ तो बोलता हे मे अवोगा तो चलो देखे क्या होता है एक गाव मे दो पती पत्नी जा रहे थे तबी एक आदमी बोलता हे ...

एनकाउंटर
by Satyadeep Trivedi
  • 603

सँझवाती का समय है। बाज़ार में घुसने से पहले एक मोड़ पड़ता है, उस मोड़ पर पैंतालीस-छियालीस साल की एक औरत; एक टोकरी में तरकारी बेच रही है। औरत ...

जब ही मेट मौसी
by S Sinha
  • 483

                                           कहानी - जब ही   मेट  मौसी    प्रकृति की लीला भी कभी समझ से परे होती है . एक ही माँ के गर्भ से एक ही समय ...

चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 - 3
by Lajpat Rai Garg
  • 276

11 " काम भला, परिणाम...? "   रमणीक अपनी कार से पटियाला जाने के लिये घर से निकला। हाईवे पर थोड़ी दूर ही गया था कि सामने कई गाड़ियाँ ...

लव या अरेंज्ड
by Aditi Jain
  • 300

"सिएस्ता की बीच", यहीं तो आना चाहता था वो हमेशा से। कितना ख़ूबसूरत नज़ारा, साफ़ पानी, सफ़ेद रेत, अपनी मस्ती में मगन लोग। चारों ओर खुशियाँ ही खुशियाँ, और ...

जिंदगी से मुलाकात - भाग 12
by R.J. Artan
  • 270

एक अरसे बाद जब कोई उम्मीद नहीं बचती है, तो बचती है वो रहा जिस पर हम चल रहे हैं।मिलता तो कुछ नहीं बस मंजिल पर पहुंचने पर भटकने ...

बालू और पत्थर
by Anita Sinha
  • 636

     बालू और पत्थर जब भी हम बालू और पत्थर के विषयों पर गौर करते हैं तो देखते हैं कि बालू और पत्थर ना मिले तो जमता नहीं है। ...

रात का खेल चले भाग-२
by Appa Jaunjat
  • 255

तो काहाणी शुरु करते हे हमणे पिछले अध्याय मैं देखा कि राणी कि आत्मा बोलती हे राम आजावो तब राम बोलता हे मे आवोगा तो चलो काहाणी शुरु करते ...

छोटी कहानियां
by नवीन एकाकी
  • 468

दो जिस्म एक जानचाचा जलेबी खानी है... तो खा ले बेटा... पर मेरे पास आज पैसे नही तो कल दे देना... हम्म्म्म...ठीक है चाचा, कल पैसे दे दूंगी।  ठीक ...

चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 - 2
by Lajpat Rai Garg
  • 588

6 शह अठारह-बीस वर्ष की एक युवती, बाल बॉयकॉट, जींस और टॉप पहने, हाथ में पर्स झुलाती, सड़क पर मटकते हुए जा रही थी। सामने से आते बाइक-सवार युवकों ...

अधूरा सौदा
by राज कुमार कांदु
  • 714

अधूरा सौदा अमर औसत कद काठी का आकर्षक नवयुवक था। वह एक निजी कंपनी में जूनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर तैनात था। उसकी ऑफिस हेड रुबिका मैडम एक अधेड़ आधुनिक ...

अबकी बार... लल्लन प्रधान - 5 - (अंतिम भाग)
by Bhupendra Singh chauhan
  • 354

                               नाहर अपनी जीत में सबसे बड़ा रोड़ा लल्लन को मानते थे।चुनावी पंडितों द्वारा भी ...

चाय पीजिए जरुर
by Anita Sinha
  • 732

हां जी चाय पीजिए जरुर। कोरोना काल में चाय पीना हो गया है ज्यादा जरुरी। क्योंकि चाय गरम पेय पदार्थ है। वैसे आम तौर पर लोग सुबह-शाम तो पीते ...

चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 - 1
by Lajpat Rai Garg
  • 849

1 " फेरों का मुहूर्त " रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर ...

लेखन की दुनिया मे पहेला कदम
by Shivu M.R.Joshi
  • 291

लेखन की दुनिया में हमारा पहला दिन जब शुरू हुआ तब हमें लेखक बनने का ना कोई जज्बा था और ना कोई उम्मीद थी बस कुछ था तो एक ...

लघुकथाएँ
by किशनलाल शर्मा
  • 372

1--मापदण्डकिसी के    घर  मौत होने पर शमसान  जाकर घर लौटके आने पर पत्नी घर के बाहर ही पानी की बाल्टी रख देेती।नहाने के बाद हीी घर मे प्रवेश ...

घनी छाँव
by Sneh Goswami
  • 525

  घनी छाँव   महानगर की रेलमपेल । सब भागदौङ में व्यस्त हैं । घर के चारों  ओर कंक्रीट का जंगल बना है , कहीं कोई जान पहचान नहीं ...

रात का खेल चले
by Appa Jaunjat
  • 639

ये काहाणी एक डरावणी हे ये शो का नाम रात का खेल चले हे तो चलो देखे . एक गाव था तब एक आत्मा आती है और बोलती हे ...

नागिन - की नई काहाणी
by Datta Jaunjat
  • 384

काहाणी शुरु करते हे लेकिन पेहले नागिन कि आखरी जंग पडलो तो ही समज आएगा तो काहाणी शुरु करते हे हमणे पिछले अध्याय मैं देखा कि नेहा कि बेटी ...

विरासत
by Mukta Priyadarshani
  • (20)
  • 1.8k

सुबह के 7 बजे घंटी बजी, यह नाश्ते के लिए मैस के खुलने का संकेत था। “मृणालिनी लैट्स गो फॉर ब्रेक्फ़स्ट” शमा ने चिल्लाते हुए कहा कि दूसरी मंज़िल ...

नागिन‌ - की आखरी जंग
by Datta Jaunjat
  • 255

काहाणी शुरू करते लेकीन पेहले नागिन का अंतिम इंतकाम पडलो तो ही समज आएगा तो काहाणी शुरु करते हे हमणे पिछले अध्याय मैं देखा कि नागराणी कि बेटी संजना ...

निस्वार्थ प्रेम में जीता हुआ इंसान का स्वरुप चित्रण एवम चाल चलन वा चारित्रिक अवकलन
by Arvind Singh
  • 240

 अरविंद सिंह, आज आप लोगों को कुछ अपने अंदर के विचारों एवं परिकल्पनाओं को आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूं। तो चलिए शुरू करते हैं - ...

बदल गया मौसम
by anshu Singh
  • 459

बदल गया मौसम  वह ट्रेन से उतर कर, स्टेशन परिसर के बाहर निकली ही थी कि मौसम बदलने लगा। जैसे-जैसे उसके कदम आगे बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे धूप-छांव का ...

खोखले होते रिश्ते
by किशनलाल शर्मा
  • 732

खोखले होते रिश्ते व अन्य लघुकथायें1--खोखले होते रिश्ते"काजल कह रही थी।शुक्रवार को चली जा।एक दिन और मिल जाएगा।"मैं एक साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रुद्रपुर जा रहा ...

ना छलो मुझे
by Neerja Pandey
  • 510

आदित्य का आज रिज़ल्ट आना था। आई आई एम सी की इंट्रेस परीक्षा उसने दी थी। पेपर अच्छा हुआ था,उसे पूरी उम्मीद थी कि उसका सेलेक्शन हो जाएगा। जैसे ...

एक होली ऐसी भी
by Ritu
  • 465

  दोस्तो सबसे पहले तो आप सभी को रंगो से भरे  होली के त्यौहार की बहुत बहुत शुभकामनाएं। दोस्तो होली का नाम सुनते ही पहला खयाल रंगो का आता ...

गुजिया
by Mugdha
  • 519

दिया की शादी के बाद पहली होली थी। शाम की पार्टी की सभी तैयारियां लगभग हो चुकी थी। दिया ने सोचा कि वो अपने हाथों से गुजिया बनाकर सबको सरप्राइज़ ...