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    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 16
    by Pranava Bharti

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 16-गुड़िया का ब्याह शायद विधाता ने ही लड़कियों में विशिष्टता भरकर उन्हें सँवारा है कि वे सदा गुड़ियों के और अपने ...

    किटी पार्टी
    by Deepti Khanna
    • (3)
    • 42

    हर लम्हा कैद कर लूं इस जिंदगी का , समेट के रख लूं , तेरी खुदाई का । फिर मौका मिले या ना मिले, तेरे से प्यार जताने का ...

    देश-परदेश
    by Asha Rautela
    • (5)
    • 48

    देश-परदेश   (दृश्य- सब लोग डायनिंग टेबल पर खाना खा रहे हैं) देव राठौर ने आज घर आते ही फरमान सुना दिया कि अगले सप्ताह 1 महीने के लिए ...

    सुबह की चाय
    by Saroj Prajapati
    • (9)
    • 72

    अरे रचना मैं तुम्हें एक बात बताना भूल गया । तुम तो देख रही हो ना पापा की तबीयत खराब है तो प्लीज सुबह 4:30 बजे उन दोनों के ...

    आंखो देखी
    by किशनलाल शर्मा
    • (8)
    • 107

    नो नोईवा इटली से भारत भ्रमण को आई थी। उसके मित्र जोभारत भ्रमण करके गए थे, ने उसे बताया था कि भारत में विदेशी पर्यटक सुरक्षित नहीं है। टैक्सी ...

    दादू की माशूका
    by Shakuntala Sinha
    • (6)
    • 61

     1                                                     कहानी  - दादू  की माशूका    दीक्षांत समारोह समाप्त हुआ तो अंशु  सक्सेना और नूर अहमद दोनों दोस्त डिग्री लेने के बाद पटना यूनिवर्सिटी  की ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 15
    by Pranava Bharti
    • (3)
    • 50

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 15-नंदू "ओय ---देख दीदी आ गईं ---" नंदू ने रिक्शा देखते ही चिल्लाकर अपने नौकर हेमू को आवाज़ दी | "दीदी ...

    सप्तरंगी - लघु कथा
    by Nish
    • (3)
    • 36

    कौन ?"मिस गुजरात कॉन्टेस्ट" गुड इवनिंग एंड वेलकम में आपकी होस्ट शैलजा आपका स्वागत करती हूँ , इस खूबसूरत शाम के इस खूबसूरत प्रोग्राम में , जहा पुरे गुजरात की ...

    इत्ती सी, छोटी सी माँ
    by Annada patni
    • (6)
    • 254

    इत्ती सी, छोटी सी माँ अन्नदा पाटनी            जैसे ही खिड़की खोली कि एक छोटे से बच्चे के रोने की आवाज़ आई । सोचा कोई बात नहीं , थोड़ी देर में चुप हो जायेगा। पास रखे शेल्फ़ से पुस्तक निकाली ।  मन को एकाग्र कर पढ़ने का प्रयास करने लगी पर बच्चे     के रोने क

    मर्द
    by Anil Makariya
    • (12)
    • 240

    मर्द ------- --- --- आज हमेशा के मुकाबले ट्रेन में कम भीड़ थी । सुरेखा ने खाली जगह पर अपना ऑफिस बैग रखा और खुद बाजू में बैठ गई ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 14
    by Pranava Bharti
    • (1)
    • 62

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 14-बेहिसाब महिमा ने अपनी बहू से इतनी मुहब्बत कर ली कि अपनी बेटी को भी एक तरफ़ कर दिया | उसका ...

    दोहरी मार
    by Dr Narendra Shukl
    • (4)
    • 233

    आलू है । गोभी है । प्याज़  है । ‘ रात के करीब आठ बजे कड़कती ठंड में सुनसान - सी पड़ी सड़क के एक कोने में किसी बच्चे ...

    किरदार - 2
    by Kirdar
    • (4)
    • 127

    तब मैं नही जानता था और ये कह भी नही सकता था कि ये साल मेरी जिंदगी बदलने वाला होगा । इस साल में ऐसा कुछ होगा जो मेरी ...

    सुन रहे हो न बापू
    by Annada patni
    • (2)
    • 194

    सुन रहे हो न बापू अन्नदा पाटनी            कितने दिनों से सोच रही थी कि फोन करूँगी पर हर रोज किसी न किसी कारण रह ही जाता । कभी सोचती कि बात करूँ न करूँ , कहीं उन्हें क्रोध आ गया तो या बात अटपटी लगी तो । अब ग़ुस्सा आए तो आए , बात अटपटी लगे तो लगे , मैं आज उ

    गुरप्रीत
    by Pallavi Saxena
    • (3)
    • 158

    धीरे-धीरे दिन हफ्ते महीने बीत चले है। अब साल खत्म होने को है। जैसे-जैसे परीक्षा का समय निकट आ रहा है, वैसे-वैसे मेरे दिल की धड़कनों में इज़ाफ़ा होता ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 13
    by Pranava Bharti
    • (2)
    • 95

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 13-टच-मी-नॉट अम्मा के घर पर ऊपर छज्जे के बीचों-बीच एक सीमेंट का सुंदर सा गमला बना हुआ था | शायद छज्जा ...

    दिल से......
    by Swatigrover
    • (17)
    • 222

    "यार ! जफ़र  तेरा  हाल  भी  शहरुख  की  फिल्म  'दिल  से'  की  तरह  होने  वाला  है ।"  इमरान   ने  कहा । "क्यों  क्या  होने  वाला  है  मुझे ?" उस  फ़िल्म  में  ...

    रिश्ते -ज़रूरत या ईश्वरीय देन
    by A A Rajput
    • (2)
    • 197

    बहुत दिनो से सोच रहा था कि आज कल के रिश्तों में वो बात क्यूँ नहीं हैं जिस रिश्तों की कहानी मैं अपने पापा माँ या फिर दादादादी से ...

    दवा
    by महेश रौतेला
    • (2)
    • 219

    दवा:बगीचे में घूम रहा था। तभी एक बुजुर्ग बेंच पर बैठे दिखे। मैं उनकी बगल की बेंच पर बैठ गया। परिचय होने लगा। उनकी उम्र  तिरासी साल है। आँखों ...

    कार का भूत
    by Asha Rautela
    • (6)
    • 257

                                                              ...

    जय बजरंगबली
    by सिद्धार्थ शुक्ला
    • (1)
    • 164

    #जय_बजरंगबलीपूज्य हनुमान जी को खबर मिली कि पृथ्वी पर उनके गोत्र को लेकर काफी घमासान मचा है। उन्होंने तो कभी इस विषय मे सोचा ही नही था। और वो ...

    रिश्तों की अहमियत
    by Ayushi Singh
    • (1)
    • 246

    " चल यार निशी फाइनली आज का एग्जाम हुआ, सच में बहुत लेंथी था पेपर " हमने अपना हाथ झिटकते हुए कहा। " हां मीरा तू ठीक कह रही ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 12
    by Pranava Bharti
    • (1)
    • 90

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 12-प्रेम-पत्र नंदिता ने ऐसे घर में जन्म लिया था जहाँ हर बात पर, हर काम पर कंट्रोल का ताला लगा रहता ...

    नगर ढिंढोरा
    by Vandana Joshi
    • (8)
    • 205

    बारह बजने मे सिर्फ सात मिनट बाकी थे ,ज़्यादातर घरों की बिजलियाँ बंद थीं लेकिन कुछ थे जो अब भी अपने बच्चों को मोबाइल जब्त करने की धम्की दे ...

    मैं कहानी नहीं
    by Rohit Sharma
    • (4)
    • 214

    सुकेत का फोन वाइब्रेट कर रहा था। सुकेत का फोन केवल इसी नंबर पर वाइब्रेट करता था रिगटोन इस नंबर के लिए साइलेंट थी। लेकिन यह वाइब्रेशन वह तत्काल ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 11
    by Pranava Bharti
    • (2)
    • 138

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 11-छंगी ये उन दिनों की बात है जब दादी माँ बच्चों को अपने चारों ओर बैठाकर राम और कृष्ण की कहानियाँ ...

    लूसिफ़र
    by Anil Makariya
    • (8)
    • 311

    लुसिफ़र* * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * अम्बुश हमेशा की तरह आज रात को ...

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 10
    by Pranava Bharti
    • (5)
    • 309

    दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें (लघु कथा-संग्रह ) 10-मीतल मीतल सामने वाले घर की नई सेविका का नाम है | लंबी, उजली, बहुत ख़ूबसूरत! एक्टीवा लेकर आती है | मेहरा ...

    मर्यादा की अर्थी
    by Ved Prakash Tyagi Verified icon
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    मर्यादा की अर्थी जमीला ने जैसे हमेशा के लिए ही चारपाई पकड़ ली थी, सलीम  जो भी कमाकर लाता सब उसकी दवा चिकित्सा पर ही खर्च हो जाता। रिहाना ...

    सलीम-अनारकली
    by Swatigrover
    • (19)
    • 247

    सामने  कुर्सी  पर शान  से  बैठा  हुआ। रंग-बिरंगा  स्वेटर  और  गले में  मफलर   पहनकर  बड़ी-भूरी  आँखों  से   इधर-उधर  देखकर  पूरे  घर का  जायज़ा ले  रहा है । घर  के  सभी  सदस्यों की  गतिविधियों  को  ...