मदन टेम्पो चलाता है वरूणा से सरायरंजन । हार्न के अलावा एक अलग से रबर के गुब्बारे वाला पों पों बांध रखा है ।मजे की बात ये गुब्बारे वाला हार्न सिर्फ मोहल्ले में घुसने पर ही बजाता है । गली के मोड़ पर रहनेवाले अब्दुल मियां के यहाँ नई पतोहू आई है । थोड़े खुले मिजाज की है । बेटा रज्जाक तो निकाह के महीने भर बाद ही अमदाबाद चला गया । जरी गोटे का काम है उसका । हुआ यूं कि जैसे ही पों पों की आवाज हुई पतोहिया काम छोड़कर छत की तरफ भागी । अब्दुल तो खुद घाट घाट का