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    कशिश - 21
    by Seema Saxena Verified icon
    • 114

    कशिश सीमा असीम (21) अच्छा जी,सुना है कि आत्मकथा में एक एक शब्द सच होता है ! हाँ ! क्या आप अपनी आत्मकथा में मुझे भी लिखेंगे ! नहीं ...

    अगिन असनान - 2
    by Jaishree Roy
    • 86

    अगिन असनान (2) उस दिन जोगी घर लौटा तो चाँद बंसबारी के पीछे उतर चुका था। थाली में धरी रोटी-तरकारी पानी-सा ठंडा। ढिबरी का तेल भी खत्म! पहले तो ...

    ए मौसम की बारिश - ९
    by Paresh Makwana Verified icon
    • 164

                 एकदिन कॉलेज में मेने तुम्हे मुख्याजी की बेटी नंदनी के साथ देखा। उस पल मुजे लगा की आख़िर नंदनी ने अपनी कातिल अदाओ से तुम्हे अपना बना ही ...

    कभी अलविदा न कहना - 6
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 194

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता 6 घर पर एक अलग ही माहौल था। सोफे के कवर और पर्दे बदले जा चुके थे। किचन से आती खुशबू बता रही थी ...

    अमर प्रेम -- 5
    by Vandana Gupta
    • 140

    अमर प्रेम प्रेम और विरह का स्वरुप (5) जब समीर ने इतना आश्वासन दिलाया तब अर्चना ने हिम्मत करके राख में दबी चिंगारी का समीर को दर्शन कराने की ...

    कभी अलविदा न कहना - 5
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 336

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता 5 उस एक पल मेरे मन में पता नहीं कितने भाव आए और गए... इंतज़ार खत्म होने की खुशी, बूढ़े अंकल को सीट देने ...

    कशिश - 20
    by Seema Saxena Verified icon
    • 328

    कशिश सीमा असीम (20) वे दोनों एक होना चाहते थे भूल के दुनियाँ की सब रीति रिवाजें और रस्में ! बहुत सारे बंधनों में बांध देता है हमारा समाज ...

    अगिन असनान - 1
    by Jaishree Roy
    • 489

    अगिन असनान (1) भांडी-बासन में फूल-पत्ती आंक कर उसने हमेशा की तरह दालान में करीने से सजा दिया। भर दोपहर की तांबई पड़ती धूप में ताजा उतरे मटके, गमले ...

    ए मौसम की बारिश - ८
    by Paresh Makwana Verified icon
    • (11)
    • 392

              एक दिन एक कुछ खूबसूरत मोर अपनी पंख फैलाकर बारिश में नाच रहे थे। ओर तुम एक पेड़ के पीछे छुपकर कब से इस मनमोहक दृश्य को देखे ...

    प्यासे दिलों की दास्तां
    by Ajay Kumar Awasthi Verified icon
    • 320

          उसका रमेश से लिपट जाना रमेश के लिए सुखद आश्चर्य था । रमेश उसे चाहता था पर अपनी हद समझता था, क्योंकि प्रिया एक शादी शुदा स्त्री थी ...

    अमर प्रेम -- 4
    by Vandana Gupta
    • 180

    अमर प्रेम प्रेम और विरह का स्वरुप (4) उधर अजय अपने वादे पर अटल था ----- दोबारा कभी न मिलने का वादा। अब उसने अर्चना को पुकारना छोड़ दिया ...

    कशिश - 19
    by Seema Saxena Verified icon
    • 302

    कशिश सीमा असीम (19) थोड़ी ही देर में बेटर एक ट्रे में फुल प्लेट दाल फ्राई, गोभी की सब्जी का बड़ा डोंगा, दो पैक्ड दही, बड़ी प्लेट सलाद और ...

    कभी अलविदा न कहना - 4
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 330

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता 4 "अरे वैशाली! तुम यहाँ कैसे...?" उस स्मार्ट बंदे के पीछे से राजेश नमूदार हुआ और मैं सपनों की दुनिया से बाहर आ गयी। ...

    मैं, रेजा और 25 जून
    by Seema Sharma
    • (11)
    • 816

    मैं, रेजा और 25 जून सीमा शर्मा यह उम्र ही ऐसी होती है। सब कुछ अच्छा लगता है। सुंदरता और शोख रंग तो खींचते ही हैं, पर जो हट ...

    अमर प्रेम -- 3
    by Vandana Gupta
    • 216

    अमर प्रेम प्रेम और विरह का स्वरुप (3) एक ही पल में इतना कुछ अचानक घटित होना--------अर्चना को अपने होशोहवास को काबू करना मुश्किल होने लगा। जैसे तैसे ख़ुद ...

    जिस्मानी नहीं, रूहानी है मुहब्बत तेरी मेरी
    by Saroj Prajapati
    • 308

    काजल और रोहन ने स्कूल के बाद एक ही कॉलेज में एडमिशन लिया। दोनों में स्कूल समय से ही जान पहचान थी लेकिन कॉलेज में आते आते रोहन को ...

    कशिश - 18
    by Seema Saxena Verified icon
    • 354

    कशिश सीमा असीम (18) पारुल चलो जल्दी से पहले अपने रुम पर पहुँचो फिर बात करना ! राघव ने उसे फोन मिलाते हुए देखकर टोंका ! अरे मैं तो ...

    अधूरा इश्क - 1
    by Balak lakhani Verified icon
    • (14)
    • 634

    अधूरा इश्क   दोस्तों आपने मेरी आगे लिखी कहानी अधूरी हवस दिल से पाढ़ी और मेरी उम्मीद से भी ज्यादा आप सब को पसंद आई तो फिर एक और ...

    कभी अलविदा न कहना - 3
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 426

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता 3 रोते रोते हिचकियाँ बन्ध गयीं। दम घुटने लगा और मैं अचकचा कर उठ बैठी। माँ नहीं थीं मेरे आसपास... "ओह! यह ...

    ए मौसम की बारिश - ७
    by Paresh Makwana Verified icon
    • 318

              पीछे आ रही माही को किसीने वही से धका देकर नीचे की ओर फेंका..             'ज...जय..' उसकी दर्दनाक चींख मेरे कानो पर पड़ी ओर में कुछ समझ पावु ...

    और तुम आए - 2 - SJT
    by Poetry Of SJT
    • 102

    अतुल को बिना ज़वाब सुने ही जाना पड़ता है । -----------* कहानी अब आगे… * भाग – 2 ----------------------सलोनी को पता भी नहीं चलता की अतुल कब निकल गया ...

    मतलबी प्यार - 2
    by Ajay Garg
    • 176

    प्यार क्या है?यह सवाल हर उस शख्स के भीतर है जो प्यार पर हकीकत में विश्वास रखते हैं, चांद बड़ा दिखने में विश्वास रखते हैं और साथ ही साथ ...

    अमर प्रेम -- 2
    by Vandana Gupta
    • 230

    अमर प्रेम प्रेम और विरह का स्वरुप (2) एक बार अजय को चित्रकारी के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ उसे प्राप्त करने के लिए उसे अर्चना के शहर जाना ...

    कशिश - 17
    by Seema Saxena Verified icon
    • 312

    कशिश सीमा असीम (17) अभी और कितनी दूर है और कितना समय लगेगा ! अभी टेकसी वाले से पूछ कर तुम्हें बताता हूँ ! ड्राइवर अपनी ही धुन मे ...

    कभी अलविदा न कहना - 2
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 444

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता 2 सुबह जिस उत्साह से निकली थी नौकरी जॉइन करने, शाम को घर पहुँचने तक वह थकान की भेंट चढ़ चुका था। ...

    कुछ मीटर पर...ज़िंदगी!
    by Mohit Trendster
    • 238

    आस-पास के माहौल का इंसान पर काफ़ी असर पड़ता है। उस माहौल का एक बड़ा हिस्सा दूसरे इंसान ही होते हैं। एक कहावत है कि आप उन पांच लोगों ...

    मेरी महोब्बत-मेरा ख़ुदा - 1
    by Rajesh Kumar
    • 168

    कल से जून यानी छुट्टी का महीना शुरू होने वाला है। अरे यार, दसवीं की परीक्षा, हे भगवान कितनी मेहनत करनी पड़ी, चलो ये पेपरों का भूत तो उतरा ...

    ए मौसम की बारिश - ६
    by Paresh Makwana Verified icon
    • 300

               दादी को होश आते ही उसने सबसे पहले मुझे फोन किया ओर वहां जो कुछ भी हुवा सारी बात बताई।             उसी पल अपनी बाइक लेकर में माही ...

    अमर प्रेम -- 1
    by Vandana Gupta
    • 330

    अमर प्रेम प्रेम और विरह का स्वरुप (1) प्रेम और विरह का स्वरुपप्रेम ----एक दिव्य अनुभूति --------कोई प्रगट स्वरुप नही,कोई आकार नही मगर फिर भी सर्व्यापक ।प्रेम के बिना न ...

    कभी अलविदा न कहना - 1
    by Dr. Vandana Gupta Verified icon
    • 784

    कभी अलविदा न कहना डॉ वन्दना गुप्ता सारांश प्रस्तुत उपन्यास मुख्यतः प्रेम के धरातल पर लिखा गया है। संयुक्त परिवार में रह रही नायिका जब नौकरी करने दूसरे शहर ...