Love Stories Books in Gujarati, hindi, marathi and english language read and download PDF for free

    वह कोई और थी.....
    by Sudha Om Dhingra

    वह कोई और थी..... सुधा ओम ढींगरा क्रैब ट्री लेक पार्क में प्रातः सैर करने जाती हूँ। कुछेक दिन पहले वाकिंग ट्रेल (सैर करने वाली सड़क) पर सैर करते ...

    अनोखी वफ़ा
    by Rajesh Bhatnagar Verified icon
    • (3)
    • 76

    अनोखी वफ़ा राजेश कुमार भटनागर जब सांझ गहराकर काली पड़ने लगती और रात का अंधेरा अपनी बाहें फैलाने लगता तो उस अंधेरे से कहीं अधिक घोर अंधेरा छाने लगता ...

    बगावत दिल की
    by Shobhana Shyam
    • (3)
    • 101

    एक तरफ दिल है एक तरफ दिमाग किसकी बात मानेगी दिव्या ......

    अतीत से मुक्त
    by Balanath Rai
    • (2)
    • 39

    "जब तक हम अपने अतीत के बारे में सोचते रहेंगे तब तक हमारा वर्तमान भी अतीत बनता जाएगा इसलिए हमे अपने अतीत के बारे मे न सोचकर अपने  वर्तमान ...

    सेकेण्ड इनिंग 
    by Ashish Dalal
    • (12)
    • 125

    अपनी सहेलियों से शादी के बाद की पहली रात के बारें में बहुत से किस्से सुन रखे थे । पुरूष के के लिए पहली रात यानि अपने पुरुषत्व को ...

    प्रेम - 1
    by Priya Shah
    • (5)
    • 166

    अपने मोबाइल पे वो अपने कापते हाथो से मेसेज टाइप कर रही थी "हाँ, में आपसे प्यार करती हु, ये जानते हुए भी के हम एक नहीं हो सकते,  ...

    मुहब्बत ज़िंदाबाद!
    by Kailash Banwasi
    • (1)
    • 89

    मुहब्बत ज़िंदाबाद! राजकुमार सोनी के लिए कैलाश बनवासी कहानी शुरू हो इससे पहले ये तफ़सील ज़रूरी है... पिछले दस बरसों में जितना बदला है यह देश उतना शायद कभी ...

    हाडी राणी
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (14)
    • 255

    हुकम, अब तो पलंग छोड़ो | बाहर पधारो | सासुजी मेरे को कह रहे है तुमने मेरे बेटे को आलसी बना दिया | ये तो सूर्योदय पूर्व उठ कर ...

    इज़हार
    by Dilbag Singh Virk
    • (5)
    • 299

    इज़हार "हैलो, निखिल...किस सोच में डूबे हो।" - इंदु ने निखिल को चुपचाप बैठे देखकर पूछा। रूचि और सुरेश भी उसके पीछे-पीछे पहुँच गए। "कुछ खास नहीं, बस यूँ ...

    कामवासना से प्रेम तक (भाग-१)
    by Seema Kapoor
    • (17)
    • 1.5k

     एक सभ्य समाज में पुरुष और महिला के बीच सुंदरता से भरे संबंधों के बारे में यदि कहां जाए तो ----उसे कामसूत्र कहते हैं (क्या है ,कामवासना )और (क्या ...

    ब्लू व्हेल गेम
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (8)
    • 288

    घर पहुँचते ही चेंज किया और इयर प्लग्स लगा कर जगजीत को सुनने लगा, साथ ही साथ व्हाट्सअप पर आए चुटकले पढ़ हंस रहा था | श्रीमति जी हँसी ...

    कहानी तेरी मेरी
    by अnu
    • (11)
    • 392

    ये जिंदगी भी बड़ी अजीब होती है.. फिर भी कहाँ सबकी खुशनसीब होती है..ये जिंदगी हमें वो दे जाती है जिसकी हमें चाह नहीं होती और वो नहीं देती जो ...

    अपनों का सुरक्षा घेरा
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (5)
    • 238

    आज पहली बार वह अकेले ट्रेन से जा रही थी | घर में भरे पूरे परिवार में नारी मुक्ति पर इन्सान कितना कुछ बोलता है ?  क्या कुछ सोचता ...

    उसकी खुशबू
    by Sudha Om Dhingra
    • (5)
    • 372

    उसकी खुशबू सुधा ओम ढींगरा ऑफ़िस की लॉबी के कोने में पड़े कॉफ़ी पॉट से हर दो घंटे बाद कॉफ़ी लेने जाना और उससे बतियाना उसे बहुत अच्छा लगता.... ...

    शायरी - 5
    by pradeep Tripathi
    • (4)
    • 109

    मैं जुर्म घोर रात के सन्नाटे में कर रहा थामुझे भ्रम था कि अब मुझे देखेगा यहां कौनजुर्म करते हुए देखा नहीं मेरे सिवा कोई औरजब पेसे दर हुआ ...

    इश्क़ की इन्तेहां
    by सोनू समाधिया रसिक Verified icon
    • (6)
    • 292

    लेखक :_सोनू समाधिया रसिक ??"छोड़ो न अवि कोई देख लेगा। ""देख लेने दो। अब तुम मेरी हो और मेरा हक़ है प्यार करने का।" - अविनाश ने दिव्या को ...

    उस रात का सवेरा न हुआ
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (5)
    • 287

    पश्चिम के धोरे (रेत का टीला) को भगवान भास्कर मुकुट बन कर सुशोभित कर रहे थे | थार की धरा जैसे पीत वस्त्र धारण कर चुकी हो | यह ...

    जनवरी सी जानदार तू और दिसम्बर सा आकर्षक मैं
    by Ashish Dalal
    • (7)
    • 239

    वह इक्कीस का लम्बा छरहरा, कोमल सपनों की रंगीनियों से भरा नौजवान । नाम विवेक ।वह उन्नीस की दुबली पतली, देह के उभारों को सम्हालती ऐश्वर्य से भरी नवयुवती ...

    फरेब - 7
    by Raje.
    • (8)
    • 415

    समय लगभग ६:३० शामके, हो रहा है।इसलिए सुरज की रोशनी हल्की लग रही है। और बदन को चुभ नहीं रही थीं।एक छोटा-सा झरना जंगल की बहार की तरफ बेह ...

    दोस्ती है या प्यार - 1
    by pradeep Tripathi
    • (9)
    • 458

    दोस्तो चलो आज आप को एक नए प्यार की कहानी सुनाते हैं।   इस कहानी के मुख्य दो पात्र है एक मै प्रिंस (परिवर्तित नाम) और एक वो सुषमा (परिवर्तित ...

    उमादे
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (20)
    • 438

    जैसलमेर की राजकुमारी उमादे भटियाणी के अप्रतीम सौन्दर्य और विलक्षण बौद्धिक चातुर्य की प्रसिद्धि वायु में फैली सुगन्ध की भाँती चारों दिशाओं में फैलती जा रही थी | राज्य ...

    ठंडी सड़क
    by महेश रौतेला
    • (5)
    • 224

    ठंडी सड़क:"चाँद के उस पार चलो" फिल्म टेलीविजन पर चल रही है। फिल्म के अन्तिम दृश्य नैनीताल के मैदान में फिल्माया गया है।दृश्य लगभग रोमांटिक कहा जा सकता है।अन्त ...

    अमर प्रेम - 14 - अंतिम भाग
    by Pallavi Saxena
    • (7)
    • 290

    अमर प्रेम (14) कभी राहुल विदेश चला जाता है तो कभी अंजलि भारत आजती है बस इसी तरह गुज़र रही है दोनों कि ज़िंदगी और इसी तरह चलते हुए ...

    हमारी समानताए
    by Shrimali Montu
    • (9)
    • 364

    ॐ नमः शिवाय। हमारी वास्तवीक कहानी को पढने के लीए आए हुए आप सभी को मे और मोना सहर्ष आवकारते है । मेरी मोना द्वारा रचीत इस प्रथम वास्तवीक ...

    अमर प्रेम - 13
    by Pallavi Saxena
    • (3)
    • 295

    अमर प्रेम (13) इतने में अंजलि दूध का गिलास लिए कमरे में आती है और राहुल को देते हुए कहती है क्या हुआ तुम अब भी वही सोच रहे ...

    BECOME A HE-MAN - LAST PART
    by Urvil Gor Verified icon
    • (6)
    • 187

    आरव घर पहोचा तब उसके डेड ने 10000 रुपए तैयार रखे थे ओर उसकी बेग। आरव:- मोम ये क्या है कोई आया है क्या? आरव के डेड:- आरव सून ...

    वैश्या वृतांत - 30 - अंतिम भाग
    by Yashvant Kothari Verified icon
    • (8)
    • 595

    वैश्या वृतांत यशवन्त कोठारी अपराधी बच्चे और शिक्षक की भूमिका स्वच्छंदता, उच्छृंखला, बदलता सामाजिक मूल्यों तथा राजनीतिक जागरुकता ने छात्रों और अध्यापकों के बीच की खाई को बहुत चौड़ा ...

    दो पेड़
    by Dr Fateh Singh Bhati
    • (9)
    • 299

    पढ़ाई में व्यस्तता के कारण कोई दस वर्ष बाद मामा के साथ ननिहाल जा रहा था | दोपहर में टूटी फूटी बस ने गाँव से कोई दो तीन किलोमीटर ...

    वही दूरियाँ
    by Govind Sen
    • (11)
    • 601

    अचानक संजय से मिलना हुआ। लगभग दस साल बाद। आँखें मिली। पहचान की चमक कौंधी। यंत्रवत् हाथ आगे बढ़ गये। एक अप्रत्याशित मुलाकात थी वह। नौकरी लगी। शादी हुई। मैं ...

    पॉलिटेक्निक वाले फुट ओवर ब्रिज पर - 3 - अंतिम भाग
    by Pradeep Shrivastava Verified icon
    • (8)
    • 319

    श्वेतांश की इस बात पर रुहाना हल्के से हंस दी, फिर बोली, ‘सही कह रहे हो। पहले जब तुमको वहां बस स्टॉप पर लोगों को लिफ्ट देते देखती तो ...