दूसरा थप्पड़

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निशा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। होता भी क्यों नहीं, साधारण परिवार में जन्मी-पली वह अचानक हाई सोसाइटी में जो जा पहुंची थी। उसकी इस उछाल के पीछे भी एक कहानी है। बात बस कुछ दिनों पुरानी है। एक दिन निशा के पिता घनश्यामदास को, जो इन दिनों एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं,की मुलाकात अपने स्कूल के दिनों के साथी धर्मेन्द्र सिंह से अचानक हो गई। दोनों मित्र इस मुलाकात से बहुत प्रसन्न हुए। धर्मेन्द्र सिंह यद्यपि इन दिनों करोड़ों के कारोबारी थे, पर अभिमान ने उन्हें स्पर्श तक नहीं किया था। दोनों मित्रों के मिलने का सिलसिला