उसने फूलों की एक शाँप से रजनीगन्धा का बुके लिए और फिर से अपनी कैव में जा बैठा.... तब कैवड्राइवर ने पूछा... साहब! ये फूल किसके लिए हैं ? हैं किसी ख़ास के लिए,उसने जवाब दिया।। ख़ास तो महबूबा ही होती है,कैवड्राइवर बोला।। बस,ऐसा ही कुछ समझ लों,उसने जवाब दिया।। और फिर वो कुछ नहीं बोला,बस चुपचाप ही बैठा रहा,कैवड्राइवर कुछ पूछता तो वो हाँ या ना में जवाब दे देता,कुछ ही देर में वो स्टेशन पहुँच गया और कैव का किराया देकर ,अपना सामान और फूल लेकर प्लेटफार्म पर आकर अपनी ट्रेन का वेट करने लगा कुछ ही देर