जुगनू..

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आज कितने सालों बाद गाँव जा रहा हूँ,कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि क्षणदा की हालत ऐसी हो जाऐगी,कितना उछला कूदा करती थी वो,बस दिनभर हिरनियों की भाँति कुलाँचे भरती रहती थी और संग संग मुझे भी पकड़ ले जाती थी,उसी की वज़ह से हमेशा घर देर से जाने पर मुझे बहुत डाँट पड़ती थी,कितना शौक था रात में उसे जुगनूओं को पकड़ने का, फिर छोड़ भी देती थी कहती थी कि उसका साथी उसका इन्तजार कर रहा होगा,मुझसे हमेशा कहा करती ... पता है राजू,मेरे नाम का मतलब होता है रात यानि की क्षणदा और तुम्हारे नाम