उस पार भी तू - 8

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अगले हफ़्ते की एक सर्द-सी सुबह थी।प्रकाश, अपने कंधे पर झोला लटकाए,कॉलेज के गेट की ओर धीरे-धीरे क़दम बढ़ा रहा था।मन में हल्की उत्सुकता थी —इतने दिन बाद कॉलेज आना,और सबसे बढ़कर ये जानने की चाह कि राधिका कैसी है।जैसे ही वो कॉलेज के मुख्य द्वार से अंदर जाने को हुआ,वहीं — ठीक उसी जगह जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी,अचानक से सामने से आती राधिका से उसका आमना-सामना हो गया।दोनों के कदम ठिठक गए।एक पल को दोनों चौंके —फिर उसी क्षण प्रकाश ने शरारत भरी मुस्कान के साथअपना हाथ धीरे से अपने गाल पर रख दिया,जैसे इशारे में कह