BAGHA AUR BHARMALI - 8

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Chapter 8 — भारमाली और बागा की प्रेम यात्रारेगिस्तान के ऊपर की सुबह हमेशा की तरह शांत नहीं थी।बागा के ऊँट के पैरों से उठती रेत,पीछे छूटता जैसलमेर किला,और भारमाली के चेहरे पर उभरा डर और हैरानी—तीनों मिलकर एक अजीब-सी चुप्पी बना रहे थे।कुछ समय तक दोनों में कोई शब्द नहीं निकला।ऊँट की घंटी की आवाज़ ही दोहराती रही किअब उनके बीच सब बदल चुका है।भारमाली आखिर बोल पड़ी—“बागा-सा… ये क्या किया आपने?मैंने तो बस Tilak ही करने आई थी…”बागा ने हल्का-सा मुस्कुराते हुए कहा—“Tilak करने आई थी,पर बहना ने जिस खतरे की बात समझाई थी,उससे बचाने के लिए तुझे