अदृश्य पीया - 4

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सुनीति अलमारी से कौशिक का बैग निकालती है। उसमें से तस्वीरें, मार्कशीट और डायरी टेबल पर रख देती है। तरुण ध्यान से सब देखता है।सुनीति (गंभीर होकर) बोली - ये देखो तरुण… ये सब कौशिक का है। इतना होनहार, इतना अच्छा इंसान… अचानक कैसे ग़ायब हो गया?ये राज़ मुझे जानना है।तरुण (सोचते हुए) बोला - सुनीति, मेरी मानो तो तुम ये कमरा छोड़ दो।यहाँ रहना तुम्हारे लिए खतरनाक हो सकता है।नया फ्लैट ले लो, शांति से रहो।”तरुण अभी बोल ही रहा होता है कि अचानक उसकी पीठ पर ज़ोरदार तमाचा पड़ता है। वो चिल्लाकर उछल पड़ता है।तरुण (चीखकर) बोला - आह्ह! किसने… किसने मारा?कमरे