प्यार, परांठे और पंगा

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शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कबीर खुद को एक सुलझा हुआ इंसान समझता था, लेकिन सच तो यह था कि वह अपनी उलझनों को सलीके से तह करके रखने का आदी था। कबीर एक एड एजेंसी में क्रिएटिव डायरेक्टर था, जिसका काम था लोगों को सपने बेचना, जबकि उसकी अपनी जिंदगी में सपनों के नाम पर बस एक अच्छी नींद की हसरत बची थी। दूसरी तरफ थी मायरा, जो एक फ्रीलांस फोटोग्राफर थी और जिसका मानना था कि दुनिया की हर चीज को एक अलग एंगल से देखा जाना चाहिए, खासकर तब जब वह चीज कबीर की नाक के