Maharana Pratap - Chapter 3

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चित्तौड़ (राजमहल में)राणा उदय सिंह जी गंभीर स्वर में बोले “कुँवर प्रताप, आज जब भी इतिहास में झांकेंगे, तो दादा भाई के लिए हमारे मन में सदा आदर रहेगा। उन्हीं इसी महल में, मीरा भाभी की भक्ति के लिए एक छोटा-सा द्वीप बनवाया जाए। अब वह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं था, वह तो मीरा भाभी के जीवन का आधार बन गया था  जैसे उस जगह में उनकी आत्मा बसती हो।”यह सुनकर रानी जयवंता बाई जी प्रसन्न हो उठीं,“वह अपने समय के सच्चे सहचर थे, राणा जी  ऐसे पति जो अपनी पत्नी की श्रद्धा में सहभागी बने।”राणा उदय सिंह मुस्कुराकर बोले “अच्छा, तो