इस दिल में सिर्फ तुम

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भाग 1: हवेली के आँगन में शाम उतर रही थी।सूरज की आख़िरी किरणें संगमरमर की ज़मीन पर सुनहरी लकीरें खींच रही थीं। हवा में इत्र, चंदन और गुलाब की मिली-जुली खुशबू थी। कहीं दूर तबले की धीमी थाप सुनाई दे रही थी, जैसे हवेली खुद किसी पुराने राग में साँस ले रही हो।इसी आँगन में आयरा घूम रही थी।उसका घेरदार अनारकली हर घूम के साथ हवा में लहराता, जैसे कोई अधूरी ख़्वाहिश उड़ान भर रही हो। उसके खुले बाल, जिनमें हल्की-सी लहर थी, उसकी कमर तक आते थे। गालों पर शर्म की हल्की सुर्ख़ी और आँखों में वो चमक—जो सिर्फ़ तब