(भाग 1)उसने कभी ऊँची आवाज़ में कुछ नहीं कहा।न शिकायत… न इल्ज़ाम… न मोहब्बत का इज़हार।बस…चुपचाप सब सहती रही।और शायद…यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी।1सफेद लिली उसके हाथों में काँप रही थी।नाज़रीन को नहीं पता था कि ठंड से काँप रही है या दिल से।कमरा बहुत शांत था… इतना शांत कि दीवारों पर टंगी घड़ी की टिक-टिक भी उसे चुभ रही थी। उसकी उंगलियाँ फूल की डंडी को ऐसे पकड़े थीं जैसे अगर छोड़ दिया, तो सब कुछ हाथ से फिसल जाएगा।उसके पीछे खड़ा था — आरव मल्होत्रा।उसकी मौजूदगी ही काफी थी कमरे की हवा बदलने के लिए।वो पास था…बहुत