माफिया की मोहब्बत

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सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर हमेशा की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे में।लेकिन उन सबके बीच एक लड़की रोज की तरह धीरे-धीरे चलती हुई अंदर आई।सावी।उसके चेहरे पर कोई बनावटी चमक नहीं थी। न भारी मेकअप, न दिखावा। बस हल्की सी मुस्कान — जैसे वो दुनिया से ज्यादा खुद के ख्यालों में रहती हो।वो जैसे ही कॉलेज गेट पार करती है… रुक जाती है।गार्ड के केबिन के पास, उसी कोने में… फिर वही रखा था।एक