तेरे मेरे दरमियान - 72

(2.8k)
  • 3.3k
  • 2.3k

कुछ देर बाद पापा ने नरमी से कहा—अशोक :- "बेटा, तू पहले अपने आपसे साफ-साफ कह—क्या तू उसे खोने से डरती है?"जानवी ठहर गई। दिल का जवाब बिना सोचे आया:जानवी :- "हाँ, पापा… बहुत डर लगता है।"अशोक :- "तो प्यार है ये बेटा , तु जा और जाके उसे बोल दे ।ये शब्द जैसे उसके पूरे अस्तित्व को चुप करा गए।सच्चाई, जिसे वह आजतक नकारती रही, आज उसी की आंखों के सामने खड़ी थी—वह आदित्य से प्यार करती है।जानवी ने गहरी सांस ली। चेहरा साफ किया। खुद को संभाला।जानवी :- "पापा… अब मुझे वापस जाना होगा। पापा आदित्य की जान