डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 14

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सुबह की शुरुआत एक अलग ही कोलाहल के साथ हुई। बच्चों के स्कूल जाने का समय था। कल तक जो बच्चे आँख खुलते ही 'काया-काया' पुकारते थे, आज वे अपनी दादी मनोरमा और बुआ शिखा को सामने देख कर खुशी से झूम उठे। उनके लिए यह एक नया बदलाव था, एक नया उत्साह था।विहान अपनी दादी की गोद में जा बैठा और नन्ही अवनी शिखा बुआ के गले लग गई। काया रसोई के दरवाजे पर खड़ी यह सब देख रही थी। उसे लगा जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन सरक गई हो। कल तक जो बच्चे उसके आँचल से