Hindi Women Focused Books and stories free PDF

    तपस्या
    by Renu Gupta
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    इस कहानी का संक्षिप्त रूप राजस्थान पत्रिका में 2019 में प्रकाशित हो चुका है।   तपस्या ‘मौली.... पकौड़े थोड़े और करारे सिकवाओ और थोड़ी चटनी भी और दो इधर।’ ...

    सीता
    by Shikha Kaushik
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    ''आपने सीता के विवाह हेतु स्वयंवर का मार्ग क्यूँ चुना ? क्या यह उचित न होता कि आप स्वयं सीता के लिए सर्वश्रेष्ठ वर का चयन करते ?मैं इस ...

    तारा की बलि
    by Dinesh Tripathi
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              कहानी- "तारा की बलि"   यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है, हलाकि पात्र, स्थान व समय काल्पनिक है परन्तु कथावस्तु सही है|यह कहानी ऐसे ...

    जीत
    by Upasna Siag
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    (जमाना कोई भी हो, जब - जब किसी स्त्री ने अपने ऊपर हुए जुल्मों के विरुद्ध आवाज उठाई है। उसे न्याय अवश्य ही मिला है। ये घटना अंग्रजों के ज़माने ...

    पुनर्जन्म
    by Dinesh Tripathi
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                     कहानी- "पुनर्जन्म"        देव एक चबूतरे के बीचों बीच चारपाई में लेटे थे,एक तो गर्मी का महीना, और सुबह लगभग  दस ...

    एक औरत
    by Pritpal Kaur Verified icon
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    • 4.1k

    कमरे में बंद दरवाज़ों के भीतरी पल्लों पर जड़े शीशों से छन कर आती रोशनी बाहर धकलते बादामी रंग के परदे, नीम अँधेरे में सुगबुगाती सी लगती आराम कुर्सी, ...

    बीबी पचासा
    by Ajay Amitabh Suman
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    इस किताब में मैं पत्नी पे इस हास्य कविता को प्रस्तुत कर रहा हूँ  गृहस्वामिनी के चरण पकड़ , कवि मनु डरहूँ पुकारी , धड़क ह्रदय प्रणाम करहूँ ,स्वीकारो ...

    खोया हुआ प्यार
    by r k lal Verified icon
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    • 4.1k

    खोया हुआ प्यारआर 0 के 0 लालआज सुहानी के पति विराट पांच बजे ही अपनी कंपनी काम पर चले गए। सात बजे उनका बेटा भी स्कूल चला गया। तभी ...

    बेवजह... भाग-७
    by Harshad Molishree
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    इस कहानी का हेतु किसी भी भाषा, प्रजाति या प्रान्त को ठेस पोहचने के लिए नही है... यह पूरी तरह से एक कालपनित कथा है, इस कहानी का किसी ...

    नम्बर वन
    by Rajesh Bhatnagar
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    शाम गहराने लगी है । स्टेशन के बाहर अहाते में खड़े नीम के पेड़ शांत हैं । हवा जैसे मेरे दिमाग की भांति सुन्न होकर कहीं जा दुबकी है ...

    हाउस वाइफ नहीं बनूंगी
    by r k lal Verified icon
    • (33)
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    “हाउस वाइफ नहीं बनूंगी” आर 0 के 0 लाल               पूनम सुबह उठी तो उसके बुखार चढ़ा हुआ था। पूरा बदन तप रहा था, सर भी फटा ...

    जनवरी की वो रात
    by Saroj Prajapati
    • (14)
    • 191

    जनवरी माह की हो सर्द रात! म्यूनिसिपल हास्पिटल का जच्चा-बच्चा वार्ड भी मानो ठंड की चादर ओढ़े शांत पड़ा था । यह एक छोटा सा अस्पताल था , जहां ...

    रिसता हुआ अतीत
    by Rajesh Bhatnagar
    • (8)
    • 184

    लाजो बेजान कदमों से चलती हुई अपना थका बोझिल शरीर लिए धम्म से कुर्सी पर बैठ गई । उसके ज़हन मं छटपटाती एक ज़ख्मी औरत चीख-चीखकर जैसे उसे धिक्कार ...

    बर्फ में दबी आग
    by Dr. Vandana Gupta
    • (4)
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           बारिश थम चुकी थी.. बालकनी में झूले की गति के समान दोलायमान विचारों को विराम देने की कोशिश में कृति की नजर गमले में लगे पौधे ...

    मेरे उसूल, मेरी पहचान
    by Saroj Prajapati
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    रोशनी सरकारी विभाग में यूडीसी पद पर कार्यरत थी। सरल ,मृदुभाषी ,हंसमुख रोशनी के दो उसूल पक्के थे समय की पाबंदी और कार्य के प्रति ईमानदारी। चाहे मौसम की ...

    मज़बूरी
    by Nirpendra Kumar Sharma
    • (5)
    • 126

      "मज़बूरी"नन्ही रौनक गुब्बारे को देख कर मचल उठी, अम्मा अम्मा हमें भी गुब्बारा दिलाओ ना दिलाओ ना हम तो लेंगे वो लाल बाला, दिलाओ ना अम्मा।भइया कितने का ...

    शुभसंकल्प
    by Amita Joshi
    • (5)
    • 111

    "दीदी मैं दो दिन के लिए आपके पास रहने के लिए आना चाहती हूं",मीतू ने मुझसे फोन पर कहा ।उन दिनों मैं महाविद्यालय के कार्यों में कुछ अधिक व्यस्त ...

    मैं सच नहीं बोलूँगी.!
    by Pranav Vishvas
    • (9)
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    तेज़ बिजली की कड़कड़ाहट से मेरी नींद टूट गई, खैर बड़ी मुश्किल से आई थी मैं बिस्तर पर उठकर बैठ गई, साथ वाले तकिए को देखा जों सूना पड़ा ...

    अब और नहीं
    by Priya Vachhani
    • (12)
    • 166

    नेहा जल्दी-जल्दी तैयार होने लगी। साड़ी ठीक करते हुए माथे पर मैचिंग बिंदी लगाई, खुद को आईने में दाएं-बाएं देखकर पर्स उठा बाहर किचन की तरफ आ गई "कितनी देर ...

    आत्मसम्मान
    by Saroj Prajapati
    • (17)
    • 242

    मम्मी जीजा जी का फोन आया है।" " तू बात कर मैं अभी आई । " नहीं मम्मी कह रहें हैं जरूरी बात करनी है आपसे जल्दी आओ।" यह ...

    एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर...6
    by डॉ अनामिकासिन्हा
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    कुछ दिन गुज़र गए। पंचवटी की एक ही लता कम हुई थी लेकिन पंचवटी के बाकी पौधे मुर्झाये लगे थे। बेजान, नीरस, अजीब सा सूनापन बिखरने लगा था। परीक्षा ...

    गूंगी बहू
    by Saroj Prajapati
    • (25)
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    गूंगी बहूहंसमुख और बातूनी चंचल को आज लड़के वाले देखने अा रहे थे तो उसकी मां ने उसे हिदायत देते हुए समझाया " देख चंचल वो लोग जितना पूछे ...

    एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर - 5
    by डॉ अनामिकासिन्हा
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    सौम्या, रमा, पूनम, रंजना नूतन एक ही college की छात्रा थीं। चारो चार जिस्म एक प्राण, हर जगह साथ जातीं,  साथ घुमतीं तस्वीर खिंचवाती....  कभी-कभी तो शरारत ऐसा करतीं ...

    अब नहीं सहुगी...भाग 15
    by Sayra Khan Verified icon
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    शैली नूर के गले लिपट कर ज़ार ज़ार रोती रही lऔर कहा lनूर तू साथ है तो में अब नहीं सहुगी ओर अनुज की कम्पलेन करुंगी पुलिस स्टेशन जाकर ...

    अब नहीं साहूगि...भाग 14
    by Sayra Khan Verified icon
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    मेरी इस कहानी से किसी को कोई ठेस पहुंची हो तो माफी चाहती हूं लेकिन मेरी ये कहानी सिर्फ ओर सिर्फ गलत के खिलाफ आवाज उठाने की है क्यू ...

    एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर - 4
    by डॉ अनामिकासिन्हा
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    चांदनी को अनामिका तब से जानती थी जब चांदनी चौथी कक्षा में पढती थी। तब अनामिका स्वयं 11र्वीं कक्षा में पढती थी। पढते हुए पढाना इतना आसान काम नहीं। ...

    अब नहीं साहूगि...भाग 13
    by Sayra Khan Verified icon
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    नूर ने कहा !"में मोबाइल में उसकी सारी बाते रिकॉर्ड करती रहूंगी. जैसे आज की है और मोका मिला तो वीडियो भी ..!"फहाद ने कहा !"हमें इस सब से ...

    अकेली लड़की
    by r k lal Verified icon
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    “अकेली लड़की”     आर 0 के 0 लाल             रात के करीब दस बजे मैं गुरुग्राम जाने वाली जिस  बस में बैठी थी उसमें लड़कों का एक ग्रुप ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 12
    by Sayra Khan Verified icon
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    शैली जैसी तो नहीं जिसने बहुत प्रॉब्लम बढा दी थी, लेकिन तुम समझदार हो! में तुम्हे पहले किसी और के साथ नहीं जाने देना चाहता था ! इसलिए डील पोस्पों ...

    एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर - भाग - 3
    by डॉ अनामिकासिन्हा
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    आधुनिक युग के इस स्पर्धा में हर कोई मशीन की भाँति बस भागता जा रहा है। हर ओर धमाका चौकड़ी "बस तीव्र गति से भागता हुआ यह युग यंत्रवत ...