Best Women Focused stories in hindi read and download free PDF

गुनाह
by Durga

अवनि ने ज़िन्दगी और मौत से लड़ते हुए अपनी सूनी आँखों से माँ की ओर देखा और बोली - " क्यों आई हो यहाँ? चली जाओ कही ऐसा ना ...

आकाश बूँद
by Neelam Kulshreshtha
  • 483

[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] मैं क्या बदल गई हूँ ? ऊँह, अभी तो नहीं । अभी तो सिर्फ़ पहले जैसे आदर्श विचार ही धसकती हुई मिट्टी की तरह फिसल ...

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।
by ramgopal bhavuk
  • 171

मैंने प्रथम श्रेणी से कक्षा पाँच पास कर लिया था। मैं कक्षा छह की किताबं स्कूल बैग में पीठ पर लादकर स्कूल जाने लगी। कक्षा तीन पास करके मेरी ...

कुंठित
by Sunita Agarwal
  • 465

बसुधा का आज सुबह से ही मन बहुत खिन्न था।उसकातनिक भी मन नहीं लग रहा था।ऐसा लग रहा था कि यहाँ से कहीं भाग जाए ,ऐसी जगह,जहाँ अपनेपन का ...

परम्परावादी समाज में मैहर
by ramgopal bhavuk
  • 294

मेरे मित्र कहते हैं,-‘यार शब्बीर खान, तेरी किस्मत बहुत बुलन्द है, हमें तो मैहर घास ही नहीं डालती।’ सच तो यह है मेरी कौम की एक मात्र लड़की कॉलेज ...

प्राची-प्रतीची - (भाग-4)
by Jyoti Prajapati
  • 297

डॉ अनिरुद्ध और प्राची के लिए विशेष रूम था। वो रूम था ही अधिकारियों के ठहरने के लिए। प्रतीची, हर्ष और स्टाफ का एक अन्य सदस्य वीरेन ने अनिरुद्ध ...

प्रेम के नवरात्रि
by नाथूराम जाट
  • 330

आज फिर साल का दूसरा महीना आया है सब के मन में अनेको समन्दर के बराबर उफान  है, विशेष कर  लड़कियो के मन में. पर कुछ समझ नहीं आता ...

शिक्षा रूपी दरवाजा
by Pragya Chandna
  • 237

सोनी भारत के एक छोटे से गांव में रहने वाली आठ वर्षीय बालिका है....वह आज भी रोज की तरह अपने बापू से डरी-सहमी गेहूं के भूसे के ढेर में ...

प्राची-प्रतीची (भाग-3)
by Jyoti Prajapati
  • 333

हर्ष बिस्तर पर पड़े-पड़े  प्रतीची के साथ गाये गाने को गुनगुना रहा था। तभी पास में लैंप टेबल पर रखा मोबाइल घनघनाने लगा ! उसने मोबाइल उठाकर देखा,"कावेरी...! ये ...

रुक जा नूपुर
by Neelam Kulshreshtha
  • 927

नीलम कुलश्रेष्ठ “आज तुझे बरसों बाद पकड़ा है ।” बाज़ार में सहसा किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा । मैं चौंक कर मुड़ी, एक भरे बदन वाली गोरे ...

ख्वाब जो अधूरे रह गए
by Swty Sharma
  • 321

हमेशा से बस एक ही ख्वाब देखा है ,और आज फिर एक दिन आया है इस ख्याब को पूरा होते हुए देखने का । आज खुशी का कोई ठिकाना ...

बेटी या माँ
by Annada patni
  • 381

अन्नदा पाटनी अचानक पता लगा कि पिताजी को कैंसर है तो सावेरी की तो जैसे जान ही निकल गई । कैसे क्या होगा ? मां हैं नहीं और परिवार ...

कोरोना काल में बढ़ी घरेलू हिंसा चिंता का सबब।
by विवेक वर्मा
  • 366

कोरोना नें सामान्य जीवन जी रहे लोगों के जीवन शैली को किसी न किसी रूप में प्रभावित जरूर किया है।कोरोना के डर की वजह से लोगो को बीच एक ...

कुर्सी मेज
by Satish Sardana Kumar
  • 339

लड़कियों को पता नहीं ज़िंदगी से क्या चाहिए होता हैपूरी आयु असंतुष्ट रहती हैंऔर मजे में रहती हैंअसंतोष को दूर करने के लिए गहने बनवाती हैं और गहने तुड़वाती ...

सुनंदा छोकरी की डायरी
by Suryabala
  • 387

सूर्यबाला आज मैं कितने सुब्‍बे-सुब्‍बे उठ गई। खुशखुश बाल बनाया, पीला रिबन बाँधा। माँ के काम वाली बाई का दिया चमाचम फ्रॉक पेना। बाहर आई तो बाजू वाला करीम ...

प्राची-प्रतीची
by Jyoti Prajapati
  • 759

वो एक बार फिर रूम में आया....कुछ रह गया था जिसे लेने के लिए वो पहले भी आ चुका था !!!कुछ ही पल बीते होंगे कि वो फिर आ ...

रेगिस्तान में ओएसिस सी औरत
by Neelam Kulshreshtha
  • 741

औरत - 6 रेगिस्तान में ओएसिस सी औरत [ एक युवा विकलांग औरत अपने रेगिस्तानी जीवन में कोई ओएसिस अर्थात एक छोटा सा पानी का गढ्ढा, जो जीवन का ...

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी हैं?
by Saroj Verma
  • 648

तेरा साथ हैं तो मुझे क्या कमी है? मम्मा! आपका टिफिन, फिर छोड़ दिया ना किचन में,आज फिर आपको कैन्टीन का लंच करना पड़ता, कितनी लापरवाह हैं ना आप! ...

पथराई हुई औरत
by Neelam Kulshreshtha
  • 1.1k

[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ अब तक आपने लेखिका की चार कहानियां 'औरत सीरीज़ 'की पढ़ीं हैं -'वो दूसरी औरत', 'कटी हुई औरत ', उस पार की औरत ', ...

एक स्त्री के कारनामे
by Suryabala
  • 516

सूर्यबाला मैं औसत कद-काठी की लगभग खूबसूरत एक औरत हूँ, बल्कि महिला कहना ज्‍यादा ठीक होगा। सुशिक्षित, शिष्‍ट और बुद्धिमती, बल्कि बौद्धिक कहना ज्‍यादा ठीक होगा। शादी भी हो ...

मोहरा बनाम औरत
by Neelam Kulshreshtha
  • 948

नीलम कुलश्रेष्ठ वो एक सरकारी सुहावनी कॉलोनी है --------एक कतार में बने बंगले, जिनके अहातो में पेड़ पौधे, बीच के रास्ते पर गमलों की लम्बी कतारें हैं. किसी किसी ...

मनुष्य-राजेन्द्र लहरिया की कहानी
by राज बोहरे
  • 348

राजेन्द्र लहरिया                                    मनुष्य   कहानी   राजेन्द्र लहरिया हिंदी कहानीकारों में महत्वपूर्ण नाम है। उनकी कहानी "मनुष्य " न केवल स्त्री से बल्कि मनुष्य मात्र से ताल्लुक रखती है, ...

ज़िन्दगी का आखिरी दिन
by Saroj Verma
  • 513

अरे, सुबह के चार बजे का अलार्म बजा,चलो उठती हूं, लेकिन आज कुछ अजब सा एहसास हो रहा है,उम्र जो हो गई है, साठ कि जो हो गई हूं,चल ...

कुछ ख़्वाब अधूरे से
by Dr. Vandana Gupta
  • 471

बहुत पहले एक फ़िल्म आई थी... 'जागते रहो'... उसमें एक गाना था...ज़िन्दगी ख्वाब है... ख्वाब में झूठ क्या और भला सच है क्या... आज सोचती हूँ कि क्या वाकई ज़िन्दगी ...

सीता की रामायण
by Saroj Verma
  • 804

बधाई हों जमींदार साहब! बेटी हुई है...      शहर से आई डाक्टरनी ने बेटी का जन्म कराकर प्रसूति गृह से बाहर निकलते ही कहा।।    फिर से लड़की, जमींदार ...

फाइल
by Yogesh Kanava
  • 429

फाइल कोई चार बजे होंगे, सरकारी दफ्तरों में प्राय चार बजे ही शाम होने लगती है या यूं कहें कि लोग मान लेते हैं कि शाम हो गई है ...

कटी हुई औरत
by Neelam Kulshreshtha
  • (12)
  • 1.3k

नीलम कुलश्रेष्ठ " हूँ-------हूँ ----हूँम ----हूँम ----हूँ---. " वह बाल बिखराये सफ़ेद धोती में झूम रही थी, उसके मुँह से अजीब अजीब आवाज़े निकल रहीं थी. उसके घुँघराले बाल ...

निरपराध तो नही थी द्रोपदी भी
by Yogesh Kanava
  • 774

निरपराध तो नही थी द्रोपदी भी स्वर्गाधिपति का दरबार , दरबार में आज एक विचित्र सी स्थिति देखने को मिल रही है। सारे दरबारी सन हैं क्योंकि ऐसा ना ...

जी हाँ, मैं लेखिका हूँ - 16 - अंतिम भाग
by Neerja Hemendra
  • 444

कहानी -16- ’’ वो एक वामा हैं ’’ मोबाइल फोन की घंटी बजी। मैं उठ कर नम्बर देखती हूँ। यह नम्बर चन्दा चाची का है। आज लम्बे अरसे बाद ...

सम्बल
by Yogesh Kanava
  • 615

सम्बल मोबाइल की घण्टी बजी, नीलमणि ने झट से मोबाइल उठाया और देखा, अरे वाह तिवारीजी का फोन है । झट से कान के लगाया और बतियाने लगी । ...