Best Women Focused stories in hindi read and download free PDF

जीने के लिए - 1
by Rama Sharma Manavi
  • 35

 प्रथम अध्याय-----------    शोक संवेदना की औपचारिकता के निर्वहन हेतु आसपास के परिचित एवं रिश्तेदार आ-जा रहे थे।सामाजिक रूप से कल रात्रि आरती के पति विक्रम जी का देहावसान ...

सोशल साइट्स
by Priya Vachhani
  • 20

मोबाइल में मैसेज की टोन बजते ही अनीता का ध्यान मोबाइल की तरफ गया। सामने मधु का मैसेज देख चेहरे पर मुस्कान आ गई। मधु ने "हाय" भेजा था। ...

सावधान
by सिद्धार्थ शुक्ला
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#सावधानआपने कुछ समय से एक चीज नोट की हो या ना की हो मैंने नोट जरूर की है कि महिलाओं पर खासतौर से शादीशुदा दम्पत्तियों पर तरह-तरह के मजाक ...

औरतें रोती नहीं - 17
by Jayanti Ranganathan
  • 127

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 17 मन्नू की जिंदगी का का-पुरुष फरवरी 2007 मीटिंग लंबी चली। महिला कल्याण विभाग की मीटिंग जल्दी खत्म हो सकती थी भला? मन्नू ...

कुसूरवार कौन ??
by Varsha
  • 109

पूजा को अचानक मंडप में आया देख लोगो में खलबली मच गई....!!!!पर पूजा चुपचाप जाकर एक कोने में खड़ी हो गई......लोगों ने बातों की, इल्जामो की, और व्यंग बाणों ...

नूरीन - 6 - अंतिम भाग
by Pradeep Shrivastava
  • (19)
  • 197

नूरीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 6 अम्मी तुमने मेरे सामने इसके अलावा कोई रास्ता नहीं छोड़ा है। इसलिए जा रही हूं। हो सके तो गुनाहों से तौबा कर लेना। ...

औरतें रोती नहीं - 16
by Jayanti Ranganathan
  • 240

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 16 दगाबाज आईना वो दिन, वो शाम... मैं थरथराकर उठ गई। मेरा मोबाइल बज रहा था। थककर रुक गया। दो मिनट बाद मैसेज ...

खनकती चूड़ियाँ
by NISHA SHARMA ‘YATHARTH’
  • 282

अपने कपड़े उतारकर बिस्तर पर लेट जाओ और हाँ अपनी ये चूड़ियाँ उतार दो। बगल के कमरे में मेरी पत्नी सोयी है उसे बस पैरालाइसिस हुआ है,अभी मरी नहीं ...

नूरीन - 5
by Pradeep Shrivastava
  • (13)
  • 310

नूरीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 5 अम्मी के दबाव में मैंने जो गुनाह किया है उसकी सजा अल्लाह जो देगा वो तो देगा ही। पुलिस उससे पहले ही हड्डी-पसली ...

फैसला - 1
by Sunita Agarwal
  • 248

आज अनन्या की फुफेरी बहिन शालिनी की शादी है।दुल्हन की पोशाक में सजी सँवरी शालिनी बेहद खूबसूरत लग रही है।अनन्या भी दौड़ दौड़कर घर के काम काज में अपनी ...

औरतें रोती नहीं - 15
by Jayanti Ranganathan
  • 287

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 15 भटकती नींदों के सहारे पद्मजा: फरवरी 2007 पहली आर ऑनी से मिली, तो लगा एकदम अनजाना चेहरा नहीं है। तीसेक साल का ...

नूरीन - 4
by Pradeep Shrivastava
  • 369

नूरीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 अंततः मुन्ने खां को हवालात में डाल दिया गया। अगले तीन दिन उनके हवालात में ही कटने वाले थे। क्योंकि अगले दिन किसी ...

अनाम रिश्ते
by Sudha Adesh
  • 272

अनाम रिश्ते कार्तिकेय को घर लौटने में निरंतर आवश्यकता से अधिक देरी होने पर न जाने क्यों, कुछ दिनों से करीना को अत्यंत क्रोध आने लगा था । उसके टोकने ...

औरतें रोती नहीं - 14
by Jayanti Ranganathan
  • 298

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 14 तुम्हारे आसमान से मेरी दुनिया दूर है सितम्बर 2004: मन्नू की बदलती दुनिया सब कुछ अचानक हुआ। मन्नू यूं अकेली घर से ...

और कुहासा छँट गया.....
by Varsha
  • 211

            .... ...... पापा....अब मैं वहाँ कभी नहीं जाऊँगी....!!!!पापा वो इंसान नहीं जल्लाद है....उसका परिवार भी उसके साथ है हर कदम.....उन्हें बहू नहीं सिर्फ ...

लखनऊ की तवायफ
by Sudhir Kamal
  • 292

लखनऊ की तवायफ --“आदाब बजा लाता हूं बेगम साहिबा!” --“हूं……..साथ कौन जायेगा इस बार?” अमीना बेगम ने गहरी नजरों से मुआयना करते हुये पूछा। --“जी साबिर और मुख़्तार, ख़ालाजाद ...

नूरीन - 3
by Pradeep Shrivastava
  • (13)
  • 426

नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 दादा बेड पर लेटे-लेटे उस बिल्डर का इंतजार कर रहे थे। जिसे वह बात करने के लिए फ़ोन कर बुला चुके थे। क्योंकि माफिया ...

औरतें रोती नहीं - 13
by Jayanti Ranganathan
  • (11)
  • 350

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 13 अधूरे ख्वाबों की सिसकियां उज्ज्वला की नजर से: मई 2006 इस तरह जिंदगी ने ली करवट। वो भी सिर्फ चंद महीनों में। ...

वो पता
by Medha Jha
  • 190

वो पतासाल २००० , जिंदगी का वह पहला सफ़र जब वो और सृष्टि पहुंचे थे मुंबई करीब ८ बजे संध्या। हां , मुंबई के लिए वो संध्या ही था, ...

रिश्ते.. - 2
by Sunita Agarwal
  • 404

उसका प्रसब का समय करीब आने लगा उसका भाई उसे लेने आया ताकि आभा का पहला प्रसब मायके में हो सके।आभा की सास ने उससे सारे अच्छे कपड़े जेवर ...

नूरीन - 2
by Pradeep Shrivastava
  • (11)
  • 504

नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 हार कर वह अम्मी से बोली थी कि एक बार वह भी चाचाओं से बोले। लेकिन वह तो जैसे अंजाम का इंतजार कर रही ...

लव योर सेल्फ मम्मा
by Dr Vinita Rahurikar
  • 216

लव योर सेल्फ मम्मा ...किचन में मीनू के लिए मठरियाँ तलती अनुभा की आँखें बार-बार भर आ रही थीं. मन जाने कैसा तो हो रहा था। इसीलिए अपने मनोभावों ...

काश तुमने कह दिया होता
by Megha Rathi
  • 170

काश तुमने कह दिया होता कभी- कभी कुछ यादें ऐसी होती हैं जो इंसानियत और रिश्तों से विश्वाश तार-तार कर देती हैं। (पहचान छिपाने के लिए मैंने नाम व ...

औरतें रोती नहीं - 12
by Jayanti Ranganathan
  • 420

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 12 मेरी जिंदगी के सौदागर हैदराबाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले उज्ज्वला एक तरह से होश में आ गई। अंदर का तापमान बीस ...

ये कैसा प्यार
by Shivani Verma
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सोशल साइट फेसबुक पर उंगलियां चलाते-चलाते अचानक शैली की नजर एक पोस्ट पर रुक गई.... "कुछ जाना पहचाना सा चेहरा है.. पर याद नहीं आ रहा कौन." अपने दिमाग ...

नूरीन - 1
by Pradeep Shrivastava
  • 737

नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 नुरीन होश संभालने के साथ ही अपनी अम्मी की आदतों, कामों से असहमत होने लगी थी। जब कुछ बड़ी हुई तो आहत होने पर ...

पराग-कण
by Rajesh Mewade
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आज बहुत दिनों के बाद कुसुम से मुलाकात हुई। मैं उसी से मिलने उसके घर जा रहा था, लेकिन वो रास्ते में ही मिल गई। अचानक आज मुझे अपने ...

औरतें रोती नहीं - 11
by Jayanti Ranganathan
  • 350

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 11 अनजाने द्वीप यह भी एक दुनिया है! दुनिया जहान से बेखबर लोग। कहां आ रहे हैं, कहां जा रहे हैं? इनके चेहरे ...

ना जाने किस वेश में .......
by Medha Jha
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खाना - पीना हो गया और फिर हमारी बैठकी जमी मम्मी के घर उस रात। सब अपनी - अपनी बातें बता रहे थे । कुछ ही दिनों पहले मम्मी ...

यहां सबकी सोच नंगी है
by Dhiraj Jha
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 बाज़ार सजा हुआ है. साथ में खड़ी लीला, चंपा, जूली, रेखा, हेमा, ऐश, माधूरी एक-एक कर ग्राहक को लुभा कर ले जा रही हैं. सबको पता है कि यहां ...