Best Women Focused stories in hindi read and download free PDF

मुखौटा - 13
by S Bhagyam Sharma
  • 99

मुखौटा अध्याय 13 नलिनी आज सुबह से ही कहीं गई हुई है। लक्ष्मी को जल्दी काम खत्म करने को कह कर मैं उत्तर स्वामी पहाड़ी पर जाने के लिए ...

आजकल की छोरियां
by टीना सुमन
  • 132

यह आजकल की छोरियां "सुना भागवान तुमने, तुम्हारा बेटा क्या कह रहा है, अपनी मर्जी से शादी करेगा, पढ़ी-लिखी नौकरी वाली बहू लाएगा, तुम्हें नहीं पता आजकल की छोरियां, ...

कलयुगी सीता--भाग(१)
by Saroj Verma
  • 414

बात उस समय की है, जब मैं छै-सात साल का रहा हूंगा,अब मेरी उर्म करीब चालीस साल है,वो उस समय का माहौल था,जब लोगों को शहर की हवा नहीं ...

न्याय - एक अछूत लड़की की कथा(भाग 1)
by किशनलाल शर्मा
  • 147

" अरी उठना नही है क्या?कब तक खाट मे पड़ी रहेगी।चाय बन गई।अब तो उठ जा"।छमिया के बार बार आवाज  देने पर कमली उठी तो थी,लेकिन माँ के पास ...

Hostel Girls (Hindi) - 3
by Kamal Patadiya
  • 177

[दृश्य 3 : सिमरन from अमृतसर] सूरज का ढलता हुआ प्रकाश अमृतसर के पास एक गांव में खेत में चारों तरफ फैला हुआ था। जैसे खेतों की फसलों को ...

वो भूली दास्तां - भाग-१८
by Saroj Prajapati
  • (15)
  • 435

शादी के लिए विशाल व चांदनी की रजामंदी मिलते ही दोनों परिवारों की खुशी का ठिकाना ना रहा। दोनों ही परिवारों में शादी की तैयारियां होने लगी और 1 ...

मुखौटा - 12
by S Bhagyam Sharma
  • 246

मुखौटा अध्याय 12 "आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की ?", अचानक मैंने पूछ लिया। "आपके साथ भी कोई धोखा हुआ?", लगता है मेरी अक्ल सचमुच में मेरे बस ...

Hostel Girls (Hindi) - 2
by Kamal Patadiya
  • 309

(दृश्य 2 : प्रिया from मुंबई) नरीमन पोईट का सागर किनारा,,,,,,,,,, शाम ढलने को आई है। सूरज की किरणें समुद्र के पानी में पडती है तब समुद्र का पानी ...

आर्मी वर्दी वालीं औरत
by Prahlad Pk Verma
  • 303

आज 2 साल हो गये मेरे पति को शहीद हुए, मुझे खुद पर विश्वाश था कि मैं उनकी शहादत को कभी भूलने नहीं दूंगीमेरे पति आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल ...

मुखौटा - 11
by S Bhagyam Sharma
  • 261

मुखौटा अध्याय 11 'मैं हत्यारिन हूं' ऐसा मेरी मां अपने शब्दों से व्यक्त कर रही है, मेरे कोमल मन में आघात हुआ। उस आघात की याद आज भी मेरे ...

वो भूली दास्तां भाग-१७
by Saroj Prajapati
  • 426

जब से चांदनी को विशाल की पिछली जिंदगी के बारे में पता चला था, तब से उसे अपने उस व्यवहार के लिए बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। जो ...

Hostel Girls (Hindi) - 1
by Kamal Patadiya
  • 546

प्रकरण : 1 - संघर्ष गाथाए [दृश्य 1 : रेचल from गोवा] गोवा का समुद्र तट......... शाम का वक्त है। सूरज धीरे धीरे ढल रहा है। सागर की लहरें ...

वापसी
by Sunita Agarwal
  • 549

लम्बा कद,गहरी नीली,आँखेँ आकर्षक व्यक्तित्व उसके रूप के माया जाल में फँसे बिना न रह सकी थी वह।उसके बात करने का अंदाज, उसकी मुस्कराहट किसी का भी मन मोह ...

मुखौटा - 10
by S Bhagyam Sharma
  • 336

मुखौटा अध्याय 10 “व्हाट अ प्लेजेंट सरप्राइज !", बड़े उत्साह से कृष्णन बोला। हम दोनों को बारी-बारी से देख रोहिणी से बोला, "यू लुक ब्यूटीफुल ! एक टीनएजर लड़की ...

आपसी वाहवाही ने सुधार की गुंजाइश खत्म कर दी है
by Neelima Sharrma Nivia
  • 360

बिना किसी शोर-शराबे के कहानियां लिखने वाली आकांक्षा पारे काशिव लंबे अर्से से कहानियां लिख रही हैं। उनकी कई कहानियां काफी चर्चित रही हैं। उनकी हर कहानी पहली कहानी ...

वो भूली दास्तां भाग-१६
by Saroj Prajapati
  • 579

विशाल की एनजीओ का नाम आश्रय था। यहां गरीब तबके के बच्चे पढ़ने आते थे। इसके अलावा यहां सिलाई कढ़ाई कंप्यूटर आदि का फोर्स करवा उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाता ...

मुखौटा - 9
by S Bhagyam Sharma
  • 327

मुखौटा अध्याय 9 ‘तुम्हारी नानी तुम्हारे अंदर से बार-बार झांकती हैं।‘ यह अहंकार नहीं तो और क्या? लड़कियों का भी अपना आत्मसम्मान होता है, यह सोच ना होना अहंकार ...

घर को सब पता है
by NIKITA SHARMA
  • 357

  भारत एक ऐसा देश है जिसमें लोग पूरे देश को ही अपना परिवार मानते हैं सभी लोगों आपस में मित्र की तरह रहते हैं सभी में अपनापन, सहानुभूति ...

नियति
by Sunita Agarwal
  • 828

वह स्याह काली रात थी जब उसके जीवन में भी अंधकार के काले बादल छा गए थे । वह सोचती यह रात तो खत्म हो जाएगी पर उसके जीवन ...

मुखौटा - 8
by S Bhagyam Sharma
  • 372

मुखौटा अध्याय 8 "सख्त मतलब ?" "उश्श..! थोड़ा धीरे बात कर! वे सुन न लें।" "सुन ले तो ?" उसने परेशान होकर मुझे देखा। "उनको, सासु मां को, जोर ...

हवा के परों पर सफर
by राजनारायण बोहरे
  • 285

कहानी - इंतजार राजनारायण बोहरे ‘‘ ओफ्फो, देख तो रे ... क्या च्चीज है!’’उसने चौंक कर देखा उस तरफ, जहाँ से आवाज आई थी। ऐसे जुमले सुनने को कब ...

स्त्री मन के आवर्त्त
by Vidya Singh
  • 342

स्त्री मन के आवर्त्त डॉ. डिमरी के कमरे में जाने का इरादा बाँध कर निकले मेरे कदम दरवाजे पर ही ठिठक गए। अभी-अभी मैंने अपने कमरे को ताला लगा ...

वो भूली दास्तां, भाग-१५
by Saroj Prajapati
  • 453

खाना तैयार होने के बाद वह पड़ोसन सबको बुलाने आई। सभी उनके साथ जाने लगे तो वह बोली "आपकी बेटी नहीं आ रही क्या !" चांदनी की मम्मी ने ...

भाग्य-दुर्भाग्य
by Sunita Agarwal
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महीनों से देख रही थी कि घर में एक एक पैसा सोच समझ कर खर्च किया जाता।कोई भी वस्तु बर्बाद नहीं की जातीरात की रोटियाँ बच जातीं तो उन्हें ...

हक की ज़मीन
by padma sharma
  • 294

                  हक की ज़मीन             लगातार वारिश से पेड़ों पर अटी धूल छट गयी थी। चारों तरफ हरियाली छाई हुई थी सो सबका मन अपनी ही लौ ...

मुखौटा - 7
by S Bhagyam Sharma
  • 384

मुखौटा अध्याय 7 "दीदी, कौन आ रहा है देखो !" नलिनी बड़े उत्साह से बोली। मैं अपने विचारों को झटक कर उस तरफ देखने लगी। दुरैई आ रहा था ...

राइटिंग टेबल पर बैठी स्त्री - सपना सिंह का साक्षात्कार द्वारा नीलिमा
by Neelima Sharrma Nivia
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साक्षात्कारराइटिंग टेबल पर बैठी स्त्री किसी पारिवारिक सीन में नहीं अटती – सपना सिंह    राइटिंग टेबल पर बैठी स्त्री किसी पारिवारिक सीन में नहीं अटती - सपना सिंह सपना सिंहसपना सिंह ...

मनोविकृति
by Sunita Agarwal
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जब मेरे पति शौर्य ने आकर बताया कि उनका प्रमोशन हो गया है और उनकी पोस्टिंग मैनेजर के पद पर जयपुर हो गई है तो मेरी खुशी का ठिकाना ...

परवरिश
by Sunita Agarwal
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 उस दिन फिर माँ बेटे में किसी बात पर झगड़ा हुआ था और इस झगड़े ने हर बार की तरह रौद्र रूप धारण कर लिया।माँ बेटे दोनों में जोरदार ...

वो भूली दास्तां, भाग-१४
by Saroj Prajapati
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जब से चांदनी ने आकाश से फोन पर बात की, तब से ही वह उदास रहने लगी थी। हंसना बोलना तो उसने कब का छोड़ दिया था । अब ...