बदलाव

बदलाव ’’ क्या बनेगी मुनिया, किसी की दुल्हन? क्या करेगी मुनिया, किसी के घर का चैका-बरतन? ’’ मुनिया जब भी पढ़ने के लिए बैठती तो उसकी दादी व्यंग्य वाण चलाते हुए कहती। मुनिया अपनी किताब रखकर अपनी दादी की तरफ देखती और पुछने को सोचती कि ’ क्या बोला दादी जी आपने, जरा फिर से तो कहना। ’ लेकिन मुनिया अपनी दादी के मोटे चश्मे के भीतर व्यंग्य वाण को प्रदर्शित कर रही दादी की आँखों को देखकर मौन हो जाती और अपने चेहरे पर ढीठाई का उग्र पदर्शन करती हुई पुछती ’’ कुछ काम करवाना है तो आराम से