इंतजार सबसे खतरनाक हथियार होता है.और यह बात तारा जानती थी.उसने खुद को शांत रखा. अगर डर दिखा, तो वह हार जाएगी.करीब पंद्रह मिनट बाद दरवाजा खुला.मीरा देसाई अंदर आई.आज के बाद, उसने कहा, तुम सीधे मेरे लिए काम करोगी।यह प्रमोशन नहीं था.यह निगरानी थी.तारा ने सिर हिलाया. ठीक है।मीरा बाहर चली गई.तारा ने धीरे से सांस ली.उसे नहीं पता था कि इस वक्त नीचे, उसी इमारत के बाहर, कबीर खडा है. सादे कपडों में, बिना पहचान के, लेकिन पूरी तैयारी के साथ.अगर ऊपर कुछ भी गलत होता.तो वह अंदर घुसने वाला था.चाहे कीमत कुछ भी हो.मीरा देसाई के केबिन