मेरा प्यार - 4

​अध्याय 4: खामोशियाँ और कड़वा सच​ज़ोया के जाने के बाद, अज़ीम की दुकान पर सन्नाटा पसर गया। परिंदे अब भी आते थे, पर अज़ीम उन्हें दाना डालना भूल जाता। वह दिन भर दुकान के कोने में बैठा रहता, अपनी खाली हथेली को देखता जहाँ कभी ज़ोया की दी हुई चाय का प्याला होता था। उसे अपनी कड़वी बातों पर पछतावा था, पर उसकी 'खुद्दारी' उसे फोन करने या माफ़ी मांगने की इजाज़त नहीं दे रही थी। वह अंदर ही अंदर एक घुटन महसूस कर रहा था—ऐसी घुटन जो दुकान छिनने के डर से भी ज़्यादा गहरी थी।​उधर ज़ोया ने खुद