तिजोरी का सचज़रूरी काम निपटाने के लिए मैंने जल्दी से अपनी तिजोरी की ओर कदम बढ़ाए।मेरे मन में एक ही डर था कहीं अनीता गुस्से में तिजोरी तोड़कर सारा सोना लेकर तो नहीं चली गई?हाथ काँप रहे थे। मैंने पासवर्ड डाला।तिजोरी खुली।मैं ठिठक गया।अंदर रखा सारा सोना वैसा ही था एक भी गहना गायब नहीं।लेकिन सोने के नीचे एक नीली फाइल रखी थी… जो मैंने कभी नहीं देखी थी।मैंने फाइल निकाली। उसमें बैंक पासबुक, कुछ रसीदें और एक लिफाफा था।पासबुक पर नाम लिखा था “अनीता राकेश”।मेरी भौंहें सिकुड़ गईं। मैंने पन्ने पलटे… और जैसे-जैसे बैलेंस देखता गया, मेरा गला सूखता