बाहर जाते हुए दादी मन में- ये उल्लू का पठ्ठा पूरी तरह से अपनी उस मां पर ही गया है क्या कुछ गुण मेरे हर्ष के नहीं ले सकता था..? मगर नहीं। अब रोक न बेटा वरना मेरे इतने डायलोग वेस्ट हो जाएंगे.....सोचते हुए वो आगे बढ रही थी कि पिछे से ईशान बोला- रूकिए दादी मां...!दादी के होंठों पर मुस्कान आ गई जिसे छिपाते हुए वो पिछे मुड़ी और बोली- क्यों रूकुं..? तुझे क्या मेरी या ,मेरी बातों की कद्र है? पिछले नौ साल से हम सब वहां इंतजार कर रहे हैं मगर तूने तो हम सबसे रिश्ते नाते